सुबह के अज़कार

पढ़ने की सेटिंग
أَعُوذُ بِاللَّهِ مِنَ الشَّيْطَانِ الرَّجِيمِ
اللَّهُ لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ الْحَيُّ الْقَيُّومُ ۚ لَا تَأْخُذُهُ سِنَةٌ وَلَا نَوْمٌ ۚ لَّهُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ ۗ مَن ذَا الَّذِي يَشْفَعُ عِندَهُ إِلَّا بِإِذْنِهِ ۚ يَعْلَمُ مَا بَيْنَ أَيْدِيهِمْ وَمَا خَلْفَهُمْ ۖ وَلَا يُحِيطُونَ بِشَيْءٍ مِّنْ عِلْمِهِ إِلَّا بِمَا شَاءَ ۚ وَسِعَ كُرْسِيُّهُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ ۖ وَلَا يَئُودُهُ حِفْظُهُمَا ۚ وَهُوَ الْعَلِيُّ الْعَظِيمُ. [آيَةُ الْكُرْسِيِّ - الْبَقَرَةُ 255].
मैं धिक्कारे हुए शैतान से अल्लाह की पनाह माँगता हूँ
अल्लाह, उसके सिवा कोई उपास्य नहीं, वह जीवित और सबको संभालने वाला है। न उसे ऊँघ आती है और न नींद। जो कुछ आकाशों और धरती में है, सब उसी का है। कौन है जो उसकी अनुमति के बिना उसके पास सिफ़ारिश करे? वह जानता है जो उनके आगे है और जो उनके पीछे है, और वे उसके ज्ञान में से उतना ही जान सकते हैं जितना वह चाहे। उसकी कुर्सी आकाशों और धरती पर फैली हुई है और उनकी रक्षा उसे नहीं थकाती। वही सर्वोच्च, महान है। [आयतुल कुर्सी — अल-बक़रा 255]।
مَنْ قَالَهَا حِينَ يُصْبِحُ أُجِيرَ مِنَ الْجِنِّ حَتَّى يُمْسِيَ وَمَنْ قَالَهَا حِينَ يُمْسِي أُجِيرَ مِنَ الْجِنِّ حَتَّى يُصْبِحَ.
जो इसे सुबह पढ़ता है वह शाम तक जिन्नों से सुरक्षित रहता है और जो इसे शाम को पढ़ता है वह सुबह तक जिन्नों से सुरक्षित रहता है।
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَنِ الرَّحِيمِ
قُلْ هُوَ اللَّهُ أَحَدٌ، اللَّهُ الصَّمَدُ، لَمْ يَلِدْ وَلَمْ يُولَدْ، وَلَمْ يَكُن لَّهُ كُفُوًا أَحَدٌ.
अल्लाह के नाम से, जो अत्यंत कृपाशील और दयावान है
कह दो: वह अल्लाह एक है। अल्लाह सबकी आवश्यकता पूरी करने वाला और स्वयं निरपेक्ष है। न उसने किसी को जना और न वह जना गया, और कोई उसका समकक्ष नहीं है।
مَنْ قَالَهَا حِينَ يُصْبِحُ وَحِينَ يُمْسِي كَفَتْهُ مِنْ كُلِّ شَيْءٍ (الْإِخْلَاصِ وَالْمُعَوِّذَتَيْنِ).
जो इन्हें सुबह और शाम पढ़े, उसके लिए ये हर चीज़ से पर्याप्त हैं: सूरा अल-इख़लास और दोनों सुरक्षा की सूराएँ।
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَنِ الرَّحِيمِ
قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ الْفَلَقِ، مِن شَرِّ مَا خَلَقَ، وَمِن شَرِّ غَاسِقٍ إِذَا وَقَبَ، وَمِن شَرِّ النَّفَّاثَاتِ فِي الْعُقَدِ، وَمِن شَرِّ حَاسِدٍ إِذَا حَسَدَ.
अल्लाह के नाम से जो अत्यंत दयावान, परम दयालु है
कहो: मैं सुबह के रब की शरण माँगता हूँ, उसकी पैदा की हुई चीज़ों की बुराई से, अँधेरी रात की बुराई से जब वह छा जाए, गाँठों में फूँकने वालों की बुराई से और ईर्ष्या करने वाले की बुराई से जब वह ईर्ष्या करे।
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَنِ الرَّحِيمِ
قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ النَّاسِ، مَلِكِ النَّاسِ، إِلَٰهِ النَّاسِ، مِن شَرِّ الْوَسْوَاسِ الْخَنَّاسِ، الَّذِي يُوَسْوِسُ فِي صُدُورِ النَّاسِ، مِنَ الْجِنَّةِ وَالنَّاسِ.
अल्लाह के नाम से जो अत्यंत दयावान, परम दयालु है
कहो: मैं लोगों के रब, लोगों के बादशाह और लोगों के उपास्य की शरण माँगता हूँ, पीछे हट जाने वाले वसवसा डालने वाले की बुराई से, जो लोगों के दिलों में वसवसा डालता है, चाहे वह जिन्नों में से हो या मनुष्यों में से।
أَصْبَحْنَا وَأَصْبَحَ الْمُلْكُ لِلَّهِ وَالْحَمْدُ لِلَّهِ ، لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ، لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ، وَهُوَ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ ، رَبِّ أَسْأَلُكَ خَيْرَ مَا فِي هَذَا الْيَوْمِ وَخَيْرَ مَا بَعْدَهُ ، وَأَعُوذُ بِكَ مِنْ شَرِّ مَا فِي هَذَا الْيَوْمِ وَشَرِّ مَا بَعْدَهُ، رَبِّ أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْكَسَلِ وَسُوءِ الْكِبَرِ ، رَبِّ أَعُوذُ بِكَ مِنْ عَذَابٍ فِي النَّارِ وَعَذَابٍ فِي الْقَبْرِ.
हमने सुबह की और राज्य अल्लाह का है, सारी प्रशंसा अल्लाह के लिए है। अल्लाह के सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं, वह अकेला है, उसका कोई साझी नहीं। राज्य और प्रशंसा उसी के लिए हैं और वह हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है। ऐ मेरे पालनहार, मैं तुझसे इस दिन और इसके बाद की भलाई माँगता हूँ और इस दिन तथा इसके बाद की बुराई से तेरी शरण माँगता हूँ। ऐ मेरे पालनहार, मैं आलस्य और बुढ़ापे की कठिनाई से तेरी शरण माँगता हूँ। ऐ मेरे पालनहार, मैं आग की यातना और क़ब्र की यातना से तेरी शरण माँगता हूँ।
اللَّهُمَّ أَنْتَ رَبِّي لَا إِلَهَ إِلَّا أَنْتَ ، خَلَقْتَنِي وَأَنَا عَبْدُكَ ، وَأَنَا عَلَى عَهْدِكَ وَوَعْدِكَ مَا اسْتَطَعْتُ ، أَعُوذُ بِكَ مِنْ شَرِّ مَا صَنَعْتُ ، أَبُوءُ لَكَ بِنِعْمَتِكَ عَلَيَّ وَأَبُوءُ بِذَنْبِي فَاغْفِرْ لِي فَإِنَّهُ لَا يَغْفِرُ الذُّنُوبَ إِلَّا أَنْتَ .
ऐ अल्लाह! तू मेरा रब है, तेरे सिवा कोई सच्चा उपास्य नहीं। तूने मुझे पैदा किया और मैं तेरा बंदा हूँ। मैं अपनी क्षमता भर तेरे वचन और प्रतिज्ञा पर क़ायम हूँ। मैंने जो कुछ किया उसकी बुराई से तेरी पनाह माँगता हूँ। मैं अपने ऊपर तेरी नेमत स्वीकार करता हूँ और अपना गुनाह स्वीकार करता हूँ। मुझे क्षमा कर दे, क्योंकि तेरे सिवा गुनाहों को कोई क्षमा नहीं करता।
مَنْ قَالَهَا مُوقِنًا بِهَا حِينَ يُمْسِي وَمَاتَ مِنْ لَيْلَتِهِ دَخَلَ الْجَنَّةَ وَكَذَلِكَ حِينَ يُصْبِحُ.
जो इसे शाम को विश्वास के साथ कहे और उसी रात मर जाए, वह जन्नत में दाख़िल होगा; इसी प्रकार सुबह कहने पर भी।
رَضِيتُ بِاللَّهِ رَبًّا وَبِالْإِسْلَامِ دِينًا وَبِمُحَمَّدٍ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَبِيًّا.
मैं अल्लाह के रब होने, इस्लाम के धर्म होने और मुहम्मद (अल्लाह की रहमत और सलाम उन पर हो) के नबी होने पर राज़ी हूँ।
مَنْ قَالَهَا حِينَ يُصْبِحُ وَحِينَ يُمْسِي كَانَ حَقًّا عَلَى اللَّهِ أَنْ يُرْضِيَهُ يَوْمَ الْقِيَامَةِ.
जो इसे सुबह और शाम कहे, क़यामत के दिन अल्लाह उसे प्रसन्न करेगा।
اللَّهُمَّ إِنِّي أَصْبَحْتُ أُشْهِدُكَ ، وَأُشْهِدُ حَمَلَةَ عَرْشِكَ ، وَمَلَائِكَتَكَ ، وَجَمِيعَ خَلْقِكَ ، أَنَّكَ أَنْتَ اللَّهُ لَا إِلَهَ إِلَّا أَنْتَ وَحْدَكَ لَا شَرِيكَ لَكَ ، وَأَنَّ مُحَمَّدًا عَبْدُكَ وَرَسُولُكَ.
ऐ अल्लाह! मैंने सुबह करते हुए तुझे, तेरे अर्श को उठाने वालों को, तेरे फ़रिश्तों को और तेरी पूरी सृष्टि को गवाह बनाया कि तू ही अल्लाह है। तेरे सिवा कोई सच्चा उपास्य नहीं, तू अकेला है, तेरा कोई साझी नहीं और मुहम्मद तेरे बंदे और रसूल हैं।
مَنْ قَالَهَا أَعْتَقَهُ اللَّهُ مِنَ النَّارِ.
जो इसे कहे, अल्लाह उसे आग से मुक्त करेगा।
اللَّهُمَّ مَا أَصْبَحَ بِي مِنْ نِعْمَةٍ أَوْ بِأَحَدٍ مِنْ خَلْقِكَ ، فَمِنْكَ وَحْدَكَ لَا شَرِيكَ لَكَ ، فَلَكَ الْحَمْدُ وَلَكَ الشُّكْرُ.
ऐ अल्लाह! सुबह मुझे या तेरी सृष्टि में से किसी को जो भी नेमत मिली है, वह अकेले तेरी ओर से है, तेरा कोई साझी नहीं। सारी प्रशंसा और कृतज्ञता तेरे लिए है।
مَنْ قَالَهَا حِينَ يُصْبِحُ أَدَّى شُكْرَ يَوْمِهِ.
जो इसे सुबह कहे, उसने उस दिन की कृतज्ञता अदा कर दी।
حَسْبِيَ اللَّهُ لَا إِلَهَ إِلَّا هُوَ عَلَيْهِ تَوَكَّلْتُ وَهُوَ رَبُّ الْعَرْشِ الْعَظِيمِ.
मेरे लिए अल्लाह काफ़ी है। उसके सिवा कोई सच्चा उपास्य नहीं। मैंने उसी पर भरोसा किया और वही महान अर्श का रब है।
مَنْ قَالَهَا كَفَاهُ اللَّهُ مَا أَهَمَّهُ مِنْ أَمْرِ الدُّنْيَا وَالْآخِرَةِ.
जो इसे कहे, दुनिया और आख़िरत की जिन बातों की उसे चिंता है उनके लिए अल्लाह उसे पर्याप्त होगा।
بِسْمِ اللَّهِ الَّذِي لَا يَضُرُّ مَعَ اسْمِهِ شَيْءٌ فِي الْأَرْضِ وَلَا فِي السَّمَاءِ وَهُوَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ.
अल्लाह के नाम से, जिसके नाम के साथ धरती और आकाश में कोई चीज़ नुकसान नहीं पहुँचा सकती। वही सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है।
لَمْ يَضُرَّهُ مِنَ اللَّهِ شَيْءٌ.
Nothing will harm him, by Allah’s protection.
اللَّهُمَّ بِكَ أَصْبَحْنَا وَبِكَ أَمْسَيْنَا ، وَبِكَ نَحْيَا وَبِكَ نَمُوتُ وَإِلَيْكَ النُّشُورُ.
ऐ अल्लाह! तेरी ही मदद से हमने सुबह की और तेरी ही मदद से शाम की। तेरी ही मदद से हम जीते हैं और मरते हैं, और तेरी ही ओर दोबारा उठकर जाना है।
أَصْبَحْنَا عَلَى فِطْرَةِ الْإِسْلَامِ، وَعَلَى كَلِمَةِ الْإِخْلَاصِ، وَعَلَى دِينِ نَبِيِّنَا مُحَمَّدٍ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ، وَعَلَى مِلَّةِ أَبِينَا إِبْرَاهِيمَ حَنِيفًا مُسْلِمًا وَمَا كَانَ مِنَ الْمُشْرِكِينَ.
हमने इस्लाम की फ़ितरत, इख़लास के कलिमे, अपने नबी मुहम्मद (अल्लाह की रहमत और सलाम उन पर हो) के धर्म और अपने पिता इब्राहीम के मार्ग पर सुबह की। वे एकनिष्ठ मुस्लिम थे और बहुदेववादियों में से न थे।
سُبْحَانَ اللَّهِ وَبِحَمْدِهِ عَدَدَ خَلْقِهِ ، وَرِضَا نَفْسِهِ ، وَزِنَةَ عَرْشِهِ ، وَمِدَادَ كَلِمَاتِهِ.
अल्लाह अपनी प्रशंसा के साथ पवित्र है: उसकी सृष्टि की संख्या के बराबर, उसकी प्रसन्नता के बराबर, उसके अर्श के वज़न के बराबर और उसके शब्दों की स्याही के बराबर।
اللَّهُمَّ عَافِنِي فِي بَدَنِي ، اللَّهُمَّ عَافِنِي فِي سَمْعِي ، اللَّهُمَّ عَافِنِي فِي بَصَرِي ، لَا إِلَهَ إِلَّا أَنْتَ.
ऐ अल्लाह! मेरे शरीर को स्वास्थ्य दे। ऐ अल्लाह! मेरी सुनने की शक्ति को स्वास्थ्य दे। ऐ अल्लाह! मेरी देखने की शक्ति को स्वास्थ्य दे। तेरे सिवा कोई सच्चा उपास्य नहीं।
اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْكُفْرِ ، وَالْفَقْرِ ، وَأَعُوذُ بِكَ مِنْ عَذَابِ الْقَبْرِ ، لَا إِلَهَ إِلَّا أَنْتَ.
ऐ अल्लाह! मैं कुफ़्र और निर्धनता से तेरी पनाह माँगता हूँ और क़ब्र की यातना से तेरी पनाह माँगता हूँ। तेरे सिवा कोई सच्चा उपास्य नहीं।
اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ الْعَفْوَ وَالْعَافِيَةَ فِي الدُّنْيَا وَالْآخِرَةِ ، اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ الْعَفْوَ وَالْعَافِيَةَ فِي دِينِي وَدُنْيَايَ وَأَهْلِي وَمَالِي ، اللَّهُمَّ اسْتُرْ عَوْرَاتِي وَآمِنْ رَوْعَاتِي ، اللَّهُمَّ احْفَظْنِي مِنْ بَيْنِ يَدَيَّ وَمِنْ خَلْفِي وَعَنْ يَمِينِي وَعَنْ شِمَالِي ، وَمِنْ فَوْقِي ، وَأَعُوذُ بِعَظَمَتِكَ أَنْ أُغْتَالَ مِنْ تَحْتِي.
ऐ अल्लाह, मैं तुझसे दुनिया और आख़िरत में क्षमा और कल्याण माँगता हूँ। ऐ अल्लाह, मैं तुझसे अपने धर्म, संसार, परिवार और धन में क्षमा और कल्याण माँगता हूँ। ऐ अल्लाह, मेरे दोषों को ढँक दे और मेरे भय को शांति दे। ऐ अल्लाह, मेरे आगे, पीछे, दाएँ, बाएँ और ऊपर से मेरी रक्षा कर। मैं तेरी महानता की शरण माँगता हूँ कि मुझे नीचे से अचानक नष्ट न किया जाए।
يَا حَيُّ يَا قَيُّومُ بِرَحْمَتِكَ أَسْتَغِيثُ أَصْلِحْ لِي شَأْنِي كُلَّهُ وَلَا تَكِلْنِي إِلَى نَفْسِي طَرْفَةَ عَيْنٍ.
ऐ सदैव जीवित रहने वाले, ऐ सबको थामने और सँभालने वाले! मैं तेरी दया से सहायता चाहता हूँ। मेरे सारे काम ठीक कर दे और मुझे पलक झपकने भर के लिए भी मेरे अपने हवाले न कर।
أَصْبَحْنَا وَأَصْبَحَ الْمُلْكُ لِلَّهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ ، اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ خَيْرَ هَذَا الْيَوْمِ ، فَتْحَهُ ، وَنَصْرَهُ ، وَنُورَهُ وَبَرَكَتَهُ ، وَهُدَاهُ ، وَأَعُوذُ بِكَ مِنْ شَرِّ مَا فِيهِ وَشَرِّ مَا بَعْدَهُ.
हमने सुबह की और राज्य समस्त संसारों के पालनहार अल्लाह का है। ऐ अल्लाह, मैं तुझसे इस दिन की भलाई, इसकी शुरुआत, सहायता, प्रकाश, बरकत और मार्गदर्शन माँगता हूँ और इसकी बुराई तथा इसके बाद की बुराई से तेरी शरण माँगता हूँ।
اللَّهُمَّ عَالِمَ الْغَيْبِ وَالشَّهَادَةِ فَاطِرَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ رَبَّ كُلِّ شَيْءٍ وَمَلِيكَهُ ، أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا أَنْتَ ، أَعُوذُ بِكَ مِنْ شَرِّ نَفْسِي وَمِنْ شَرِّ الشَّيْطَانِ وَشِرْكِهِ ، وَأَنْ أَقْتَرِفَ عَلَى نَفْسِي سُوءًا أَوْ أَجُرَّهُ إِلَى مُسْلِمٍ.
ऐ अल्लाह, छिपे और प्रकट को जानने वाले, आकाशों और धरती के रचयिता, हर चीज़ के पालनहार और स्वामी, मैं गवाही देता हूँ कि तेरे सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं। मैं अपने मन की बुराई, शैतान की बुराई और उसके शिर्क से, तथा स्वयं अपने ऊपर कोई बुराई करने या उसे किसी मुसलमान तक पहुँचाने से तेरी शरण माँगता हूँ।
أَعُوذُ بِكَلِمَاتِ اللَّهِ التَّامَّاتِ مِنْ شَرِّ مَا خَلَقَ.
मैं अल्लाह के संपूर्ण वचनों की पनाह लेता हूँ, उसकी रची हुई चीज़ों की बुराई से।
اللَّهُمَّ إِنَّا نَعُوذُ بِكَ مِنْ أَنْ نُشْرِكَ بِكَ شَيْئًا نَعْلَمُهُ ، وَنَسْتَغْفِرُكَ لِمَا لَا نَعْلَمُهُ.
ऐ अल्लाह! हम तेरी पनाह माँगते हैं कि जानते हुए किसी चीज़ को तेरा साझी ठहराएँ, और जो हम नहीं जानते उसके लिए तुझसे क्षमा माँगते हैं।
اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْهَمِّ وَالْحَزَنِ، وَأَعُوذُ بِكَ مِنَ الْعَجْزِ وَالْكَسَلِ، وَأَعُوذُ بِكَ مِنَ الْجُبْنِ وَالْبُخْلِ، وَأَعُوذُ بِكَ مِنْ غَلَبَةِ الدَّيْنِ، وَقَهْرِ الرِّجَالِ.
ऐ अल्लाह! मैं चिंता और दुख से तेरी पनाह माँगता हूँ, बेबसी और आलस्य से तेरी पनाह माँगता हूँ, कायरता और कंजूसी से तेरी पनाह माँगता हूँ, और क़र्ज़ के बोझ तथा लोगों के दबाव से तेरी पनाह माँगता हूँ।
أَسْتَغْفِرُ اللَّهَ الْعَظِيمَ الَّذِي لَا إِلَهَ إِلَّا هُوَ، الْحَيَّ الْقَيُّومَ، وَأَتُوبُ إِلَيْهِ.
मैं महान अल्लाह से क्षमा माँगता हूँ, जिसके सिवा कोई सच्चा उपास्य नहीं, जो सदैव जीवित है और सबको थामने वाला है, और मैं उसी की ओर तौबा करता हूँ।
يَا رَبِّ , لَكَ الْحَمْدُ كَمَا يَنْبَغِي لِجَلَالِ وَجْهِكَ , وَلِعَظِيمِ سُلْطَانِكَ.
ऐ मेरे रब! सारी प्रशंसा तेरे लिए है, जैसी तेरे चेहरे की महानता और तेरे बड़े साम्राज्य के योग्य है।
اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ عِلْمًا نَافِعًا، وَرِزْقًا طَيِّبًا، وَعَمَلًا مُتَقَبَّلًا.
ऐ अल्लाह! मैं तुझसे लाभकारी ज्ञान, उत्तम जीविका और स्वीकृत कर्म माँगता हूँ।
اللَّهُمَّ أَنْتَ رَبِّي لَا إِلَهَ إِلَّا أَنْتَ ، عَلَيْكَ تَوَكَّلْتُ ، وَأَنْتَ رَبُّ الْعَرْشِ الْعَظِيمِ , مَا شَاءَ اللَّهُ كَانَ ، وَمَا لَمْ يَشَأْ لَمْ يَكُنْ ، وَلَا حَوْلَ وَلَا قُوَّةَ إِلَّا بِاللَّهِ الْعَلِيِّ الْعَظِيمِ , أَعْلَمُ أَنَّ اللَّهَ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ ، وَأَنَّ اللَّهَ قَدْ أَحَاطَ بِكُلِّ شَيْءٍ عِلْمًا , اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنْ شَرِّ نَفْسِي ، وَمِنْ شَرِّ كُلِّ دَابَّةٍ أَنْتَ آخِذٌ بِنَاصِيَتِهَا ، إِنَّ رَبِّي عَلَى صِرَاطٍ مُسْتَقِيمٍ.
ऐ अल्लाह, तू मेरा पालनहार है, तेरे सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं। मैंने तुझ पर भरोसा किया और तू महान अर्श का पालनहार है। जो अल्लाह चाहे वह होता है और जो वह न चाहे वह नहीं होता। उच्च और महान अल्लाह की सहायता के बिना न कोई शक्ति है और न कोई सामर्थ्य। मैं जानता हूँ कि अल्लाह हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है और अल्लाह ने अपने ज्ञान से हर चीज़ को घेर रखा है। ऐ अल्लाह, मैं अपने मन की बुराई और हर उस प्राणी की बुराई से तेरी शरण माँगता हूँ जिसकी चोटी तेरे अधिकार में है। निश्चय ही मेरा पालनहार सीधे मार्ग पर है।
ذِكْرٌ طَيِّبٌ.
अच्छा ज़िक्र।
اللَّهُمَّ صَلِّ وَسَلِّمْ وَبَارِكْ عَلَى نَبِيِّنَا مُحَمَّدٍ.
ऐ अल्लाह, हमारे नबी मुहम्मद पर सलावत, सलाम और बरकत नाज़िल फ़रमा।
مَنْ صَلَّى عَلَيَّ حِينَ يُصْبِحُ وَحِينَ يُمْسِي أَدْرَكَتْهُ شَفَاعَتِي يَوْمَ الْقِيَامَةِ.
जो व्यक्ति सुबह और शाम मुझ पर सलावत भेजता है, उसे क़ियामत के दिन मेरी शफ़ाअत प्राप्त होगी।
لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ، لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ وَهُوَ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ.
अल्लाह के सिवा कोई उपास्य नहीं, वह अकेला है, उसका कोई साझी नहीं। राज्य और प्रशंसा उसी के लिए हैं और वह हर चीज़ पर समर्थ है।
كَانَتْ لَهُ عَدْلَ عَشْرِ رِقَابٍ، وَكُتِبَتْ لَهُ مِئَةُ حَسَنَةٍ، وَمُحِيَتْ عَنْهُ مِئَةُ سَيِّئَةٍ، وَكَانَتْ لَهُ حِرْزًا مِنَ الشَّيْطَانِ.
उसे दस दासों को आज़ाद करने के बराबर सवाब मिलता है, उसके लिए सौ नेकियाँ लिखी जाती हैं, उससे सौ बुराइयाँ मिटा दी जाती हैं और यह शैतान से उसकी रक्षा बनता है।
سُبْحَانَ اللَّهِ وَبِحَمْدِهِ.
अल्लाह पवित्र है और उसी की प्रशंसा है।
حُطَّتْ خَطَايَاهُ وَإِنْ كَانَتْ مِثْلَ زَبَدِ الْبَحْرِ. لَمْ يَأْتِ أَحَدٌ يَوْمَ الْقِيَامَةِ بِأَفْضَلَ مِمَّا جَاءَ بِهِ إِلَّا أَحَدٌ قَالَ مِثْلَ مَا قَالَ أَوْ زَادَ عَلَيْهِ.
उसकी ग़लतियाँ मिटा दी जाती हैं, भले ही वे समुद्र के झाग के बराबर हों। क़ियामत के दिन उससे बेहतर अमल कोई नहीं लाएगा, सिवाय उसके जिसने उतना ही या उससे अधिक कहा हो।
أَسْتَغْفِرُ اللَّهَ وَأَتُوبُ إِلَيْهِ
मैं अल्लाह से क्षमा माँगता हूँ और उसी की ओर तौबा करता हूँ।
مِائَةُ حَسَنَةٍ، وَمُحِيَتْ عَنْهُ مِائَةُ سَيِّئَةٍ، وَكَانَتْ لَهُ حِرْزًا مِنَ الشَّيْطَانِ حَتَّى يُمْسِيَ.
One hundred good deeds are recorded, one hundred bad deeds erased, and it is protection from Satan until evening.
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हदीस पुस्तकालय से

हदीस
It was narrated that Aishah said: "We went out with the Messenger of Allah not thinking of anything but Hajj. When we came to Makkah we circumambulated the house, then the Messenger of Allah told those who have not brought a Hadi to exit Ihram. So those who have not brought a Hadi exited Ihram. His wives had not brought a HIad so They exited Ihram too." Aishah said: "My menses came so I did not circumambulate the Hous. On the night of Al-Hasbab (the twelfth night of Dhul-Hajjah) I said" "O Messenger of Allah, the people are going back having done Umrah and Hajj, But I am going back having done only Hajj. He said: 'Did you not perform Tawaf when we came to Makkah?' I said: 'No.' He said: 'Then go with your brother to At-Tanim and enter Ihram for Umrah then we will meet you and such and such a place."