पवित्र क़ुरआन में नबियों की दुआएँ

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"رَبَّنَا ظَلَمْنَا أَنفُسَنَا وَإِن لَّمْ تَغْفِرْ لَنَا وَتَرْحَمْنَا لَنَكُونَنَّ مِنَ الْخَاسِرِينَ". [الْأَعْرَافِ - 23].

“हमारे रब, हमने अपने ऊपर अत्याचार किया। यदि तू हमें क्षमा न करे और हम पर दया न करे तो हम अवश्य घाटा उठाने वालों में होंगे।” [अल-आराफ़ 7:23]

آدَمُ عَلَيْهِ السَّلَامُ.
आदम, उन पर सलामती हो।

"رَّبِّ اغْفِرْ لِي وَلِوَالِدَيَّ وَلِمَن دَخَلَ بَيْتِيَ مُؤْمِنًا وَلِلْمُؤْمِنِينَ وَالْمُؤْمِنَاتِ وَلَا تَزِدِ الظَّالِمِينَ إِلَّا تَبَارًا". [نُوحٍ - 28].

" رَبِّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ أَنْ أَسْأَلَكَ مَا لَيْسَ لِي بِهِ عِلْمٌ وَإِلَّا تَغْفِرْ لِي وَتَرْحَمْنِي أَكُن مِّنَ الْخَاسِرِينَ". [هُودٍ - 47].

"رَّبِّ أَنزِلْنِي مُنزَلًا مُّبَارَكًا وَأَنتَ خَيْرُ الْمُنزِلِينَ". [الْمُؤْمِنُونَ - 29].

“मेरे रब, मुझे, मेरे माता-पिता को, जो ईमान की अवस्था में मेरे घर में प्रवेश करे उसे और ईमान वाले पुरुषों और स्त्रियों को क्षमा कर; और अत्याचारियों के लिए विनाश ही बढ़ा।” [नूह 71:28]

“मेरे रब, मैं तेरी शरण माँगता हूँ कि तुझसे वह माँगूँ जिसका मुझे ज्ञान नहीं। यदि तू मुझे क्षमा न करे और मुझ पर दया न करे तो मैं घाटा उठाने वालों में हो जाऊँगा।” [हूद 11:47]

“मेरे रब, मुझे बरकत वाले स्थान पर उतार; तू उतारने वालों में सबसे उत्तम है।” [अल-मुमिनून 23:29]

نُوحٌ عَلَيْهِ السَّلَامُ.
नूह, उन पर सलामती हो।

"رَبَّنَا تَقَبَّلْ مِنَّا إِنَّكَ أَنتَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ (127) رَبَّنَا وَاجْعَلْنَا مُسْلِمَيْنِ لَكَ وَمِن ذُرِّيَّتِنَا أُمَّةً مُّسْلِمَةً لَّكَ وَأَرِنَا مَنَاسِكَنَا وَتُبْ عَلَيْنَا إِنَّكَ أَنتَ التَّوَّابُ الرَّحِيمُ (128)". [الْبَقَرَةِ - 127-128].

"رَبِّ اجْعَلْنِي مُقِيمَ الصَّلَاةِ وَمِن ذُرِّيَّتِي ۚ رَبَّنَا وَتَقَبَّلْ دُعَاءِ (40) رَبَّنَا اغْفِرْ لِي وَلِوَالِدَيَّ وَلِلْمُؤْمِنِينَ يَوْمَ يَقُومُ الْحِسَابُ (41)". [إِبْرَاهِيمَ - 40-41].

"رَبِّ هَبْ لِي حُكْمًا وَأَلْحِقْنِي بِالصَّالِحِينَ (83) وَاجْعَل لِّي لِسَانَ صِدْقٍ فِي الْآخِرِينَ (84) وَاجْعَلْنِي مِن وَرَثَةِ جَنَّةِ النَّعِيمِ (85)". [الشُّعَرَاءِ - 83-85].

"رَّبَّنَا عَلَيْكَ تَوَكَّلْنَا وَإِلَيْكَ أَنَبْنَا وَإِلَيْكَ الْمَصِيرُ (4) رَبَّنَا لَا تَجْعَلْنَا فِتْنَةً لِّلَّذِينَ كَفَرُوا وَاغْفِرْ لَنَا رَبَّنَا ۖ  إِنَّكَ أَنتَ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ (5)". [الْمُمْتَحَنَةِ - 4-5].

"رَبِّ هَبْ لِي مِنَ الصَّالِحِينَ". [الصَّافَّاتِ - 100].

“हमारे रब, हमसे स्वीकार कर; निश्चय ही तू सब सुनने वाला, सब जानने वाला है (127)। हमारे रब, हमें अपना आज्ञाकारी बना और हमारी संतान में से भी अपना आज्ञाकारी समुदाय बना। हमें हमारे उपासना के तरीके दिखा और हमारी तौबा स्वीकार कर। निश्चय ही तू बहुत तौबा स्वीकार करने वाला, दयालु है (128)।” [अल-बक़रा 2:127–128]

“मेरे रब, मुझे नमाज़ क़ायम करने वाला बना और मेरी संतान में से भी। हमारे रब, मेरी दुआ स्वीकार कर (40)। हमारे रब, जिस दिन हिसाब होगा उस दिन मुझे, मेरे माता-पिता को और ईमान वालों को क्षमा कर (41)।” [इब्राहीम 14:40–41]

“मेरे रब, मुझे विवेक प्रदान कर और मुझे नेक लोगों से मिला दे (83)। बाद में आने वालों में मेरे लिए सच्ची प्रशंसा रख (84) और मुझे नेमतों वाली जन्नत के वारिसों में शामिल कर (85)।” [अश-शुअरा 26:83–85]

“हमारे रब, हमने तुझ पर भरोसा किया और तेरी ओर लौटे; तेरी ही ओर अंतिम वापसी है (4)। हमारे रब, हमें इनकार करने वालों के लिए परीक्षा न बना और हमें क्षमा कर। हमारे रब, निश्चय ही तू प्रभुत्वशाली, तत्वदर्शी है (5)।” [अल-मुम्तहना 60:4–5]

“मेरे रब, मुझे नेक संतान प्रदान कर।” [अस-साफ़्फ़ात 37:100]

إِبْرَاهِيمُ عَلَيْهِ السَّلَامُ.
इब्राहीम, उन पर सलामती हो।

"إِنِّي تَوَكَّلْتُ عَلَى اللَّهِ رَبِّي وَرَبِّكُم ۚ مَّا مِن دَابَّةٍ إِلَّا هُوَ آخِذٌ بِنَاصِيَتِهَا ۚ إِنَّ رَبِّي عَلَىٰ صِرَاطٍ مُّسْتَقِيمٍ". [هُودٍ - 56].

“मैंने अल्लाह पर भरोसा किया है जो मेरा रब भी है और तुम्हारा रब भी। कोई जीव ऐसा नहीं जिसकी पेशानी उसके अधिकार में न हो। निश्चय ही मेरा रब सीधे रास्ते पर है।” [हूद 11:56]

هُودٌ عَلَيْهِ السَّلَامُ.
हूद, उन पर सलामती हो।

"رَبِّ انصُرْنِي عَلَى الْقَوْمِ الْمُفْسِدِينَ". [الْعَنْكَبُوتِ - 30].

"رَبِّ نَجِّنِي وَأَهْلِي مِمَّا يَعْمَلُونَ". [الشُّعَرَاءِ - 169].

“मेरे रब, बिगाड़ फैलाने वाले लोगों के विरुद्ध मेरी सहायता कर।” [अल-अनकबूत 29:30]

“मेरे रब, मुझे और मेरे परिवार को उनके कर्मों से बचा ले।” [अश-शुअरा 26:169]

لُوطٌ عَلَيْهِ السَّلَامُ.
लूत, उन पर सलामती हो।

"فَاطِرَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ أَنتَ وَلِيِّي فِي الدُّنْيَا وَالْآخِرَةِ ۖ تَوَفَّنِي مُسْلِمًا وَأَلْحِقْنِي بِالصَّالِحِينَ". [يُوسُفَ - 101].

“हे आकाशों और धरती के पैदा करने वाले, तू दुनिया और आख़िरत में मेरा संरक्षक है। मुझे मुसलमान रहते हुए मृत्यु दे और मुझे नेक लोगों से मिला दे।” [यूसुफ़ 12:101]

يُوسُفُ عَلَيْهِ السَّلَامُ.
यूसुफ़, उन पर सलामती हो।

"وَسِعَ رَبُّنَا كُلَّ شَيْءٍ عِلْمًا عَلَى اللَّهِ تَوَكَّلْنَا رَبَّنَا افْتَحْ بَيْنَنَا وَبَيْنَ قَوْمِنَا بِالْحَقِّ وَأَنتَ خَيْرُ الْفَاتِحِينَ". [الْأَعْرَافِ - 89].

“हमारे रब का ज्ञान हर चीज़ को घेरे हुए है। हमने अल्लाह पर भरोसा किया। हमारे रब, हमारे और हमारे लोगों के बीच सत्य के साथ फैसला कर; तू सबसे अच्छा फैसला करने वाला है।” [अल-आराफ़ 7:89]

شُعَيْبٌ عَلَيْهِ السَّلَامُ.
शुऐब, उन पर सलामती हो।

"رَبِّ إِنِّي ظَلَمْتُ نَفْسِي فَاغْفِرْ لِي". [الْقَصَصِ - 16].

"رَبِّ بِمَا أَنْعَمْتَ عَلَيَّ فَلَنْ أَكُونَ ظَهِيرًا لِّلْمُجْرِمِينَ". [الْقَصَصِ - 17].

"رَبِّ إِنِّي لِمَا أَنزَلْتَ إِلَيَّ مِنْ خَيْرٍ فَقِيرٌ". [الْقَصَصِ - 24].

"رَبِّ اشْرَحْ لِي صَدْرِي (25) وَيَسِّرْ لِي أَمْرِي (26) وَاحْلُلْ عُقْدَةً مِّن لِّسَانِي (27) يَفْقَهُوا قَوْلِي (28)". [طه - 25-28].

“मेरे रब, मैंने अपने ऊपर अत्याचार किया, इसलिए मुझे क्षमा कर।” [अल-क़सस 28:16]

“मेरे रब, जो नेमत तूने मुझ पर की है उसके कारण मैं अपराधियों का सहायक कभी नहीं बनूँगा।” [अल-क़सस 28:17]

“मेरे रब, तू जो भी भलाई मेरी ओर उतारे मैं उसका मुहताज हूँ।” [अल-क़सस 28:24]

“मेरे रब, मेरा सीना खोल दे (25), मेरा काम आसान कर दे (26), मेरी ज़बान की गाँठ खोल दे (27) ताकि वे मेरी बात समझें (28)।” [ता-हा 20:25–28]

مُوسَى عَلَيْهِ السَّلَامُ.
मूसा, उन पर सलामती हो।

"أَنِّي مَسَّنِيَ الضُّرُّ وَأَنتَ أَرْحَمُ الرَّاحِمِينَ". [الْأَنْبِيَاءِ - 83].

"मुझे तकलीफ़ पहुँची है और तू सब दया करने वालों से बढ़कर दयालु है।". [अल-अंबिया - 83].

أَيُّوبُ عَلَيْهِ السَّلَامُ.
अय्यूब अलैहिस्सलाम।

"رَبِّ أَوْزِعْنِي أَنْ أَشْكُرَ نِعْمَتَكَ الَّتِي أَنْعَمْتَ عَلَيَّ وَعَلَىٰ وَالِدَيَّ وَأَنْ أَعْمَلَ صَالِحًا تَرْضَاهُ وَأَدْخِلْنِي بِرَحْمَتِكَ فِي عِبَادِكَ الصَّالِحِينَ". [النَّمْلِ - 19].

“मेरे रब, मुझे प्रेरणा दे कि मैं तेरी उस नेमत का शुक्र अदा करूँ जो तूने मुझ पर और मेरे माता-पिता पर की है और ऐसे नेक काम करूँ जिनसे तू प्रसन्न हो। अपनी दया से मुझे अपने नेक बंदों में शामिल कर।” [अन-नम्ल 27:19]

سُلَيْمَانُ عَلَيْهِ السَّلَامُ.
सुलैमान, उन पर सलामती हो।

" لَا إِلَٰهَ إِلَّا أَنتَ سُبْحَانَكَ إِنِّي كُنتُ مِنَ الظَّالِمِينَ". [الْأَنْبِيَاءِ - 87].

"तेरे सिवा कोई उपास्य नहीं। तू पवित्र है। निश्चय ही मैं अत्याचारियों में से था।". [अल-अंबिया - 87].

يُونُسُ عَلَيْهِ السَّلَامُ.
यूनुस अलैहिस्सलाम।

"رَبِّ هَبْ لِي مِن لَّدُنكَ ذُرِّيَّةً طَيِّبَةً إِنَّكَ سَمِيعُ الدُّعَاءِ". [آلِ عِمْرَانَ - 38].

"رَبِّ لَا تَذَرْنِي فَرْدًا وَأَنتَ خَيْرُ الْوَارِثِينَ". [الْأَنْبِيَاءِ - 89].

“मेरे रब, अपनी ओर से मुझे उत्तम संतान प्रदान कर; निश्चय ही तू दुआ सुनने वाला है।” [आल-इमरान 3:38]

“मेरे रब, मुझे अकेला न छोड़; तू सबसे अच्छा वारिस है।” [अल-अंबिया 21:89]

زَكَرِيَّا عَلَيْهِ السَّلَامُ.
ज़करिय्या, उन पर सलामती हो।

"إِنَّمَا أَشْكُو بَثِّي وَحُزْنِي إِلَى اللَّهِ". [يُوسُفَ - 86].

"मैं अपने दुःख और शोक की शिकायत केवल अल्लाह से करता हूँ।". [यूसुफ़ - 86].

يَعْقُوبُ عَلَيْهِ السَّلَامُ.
याक़ूब अलैहिस्सलाम।
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हदीस पुस्तकालय से

हदीस
Narrated Buraydah ibn al-Hasib: When a boy was born to one of us in the pre-Islamic period, we sacrificed a sheep and smeared his head with its blood; but when Allah brought Islam, we sacrificed a sheep, shaved his head and smeared his head with saffron.
This hadith has been narrated on the authority of Zuhri (but with this change of words) that he (Allah's Apostle) said: " Undertake journey to three mosques."