तस्बीह और महत्वपूर्ण अज़कार
سُبْحَانَ اللَّهِ ، وَالْحَمْدُ لِلَّهِ ، وَلَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ ، وَاللَّهُ أَكْبَرُ ، اللَّهُمَّ اغْفِرْ لِي ، اللَّهُمَّ ارْحَمْنِي ، اللَّهُمَّ ارْزُقْنِي.
अल्लाह पवित्र है, सारी प्रशंसा अल्लाह के लिए है, अल्लाह के सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं और अल्लाह सबसे महान है। ऐ अल्लाह, मुझे क्षमा कर; ऐ अल्लाह, मुझ पर दया कर; ऐ अल्लाह, मुझे आजीविका दे।
خَيْرُ الدُّنْيَا وَالْآخِرَةِ
दुनिया और आख़िरत की भलाई।
व्याख्या और स्रोत
جَاءَ أَعْرَابِيٌّ إِلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ، فَقَالَ : يَا رَسُولَ اللَّهِ ، عَلِّمْنِي خَيْرًا ، فَأَخَذَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِيَدِهِ ، فَقَالَ : " قُلْ سُبْحَانَ اللَّهِ ، وَالْحَمْدُ لِلَّهِ ، وَلَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ ، وَاللَّهُ أَكْبَرُ " ، قَالَ : فَعَقَدَ الْأَعْرَابِيُّ عَلَى يَدِهِ وَمَضَى فَتَفَكَّرَ ، ثُمَّ رَجَعَ فَتَبَسَّمَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ، قَالَ : تَفَكَّرَ الْبَائِسُ فَجَاءَ ، فَقَالَ : يَا رَسُولَ اللَّهِ ، سُبْحَانَ اللَّهِ ، وَالْحَمْدُ لِلَّهِ ، وَلَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ ، وَاللَّهُ أَكْبَرُ هَذَا لِلَّهِ فَمَا لِي ؟ فَقَالَ لَهُ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ : يَا أَعْرَابِيُّ ، " إِذَا قُلْتَ : سُبْحَانَ اللَّهِ ، قَالَ اللَّهُ : صَدَقْتَ ، وَإِذَا قُلْتَ : الْحَمْدُ لِلَّهِ ، قَالَ اللَّهُ : صَدَقْتَ ، وَإِذَا قُلْتَ : لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ ، قَالَ اللَّهُ : صَدَقْتَ ، وَإِذَا قُلْتَ : اللَّهُ أَكْبَرُ ، قَالَ اللَّهُ : صَدَقْتَ ، وَإِذَا قُلْتَ : اللَّهُمَّ اغْفِرْ لِي ، قَالَ اللَّهُ : قَدْ فَعَلْتُ ، وَإِذَا قُلْتَ : اللَّهُمَّ ارْحَمْنِي ، قَالَ اللَّهُ : فَعَلْتُ ، وَإِذَا قُلْتَ : اللَّهُمَّ ارْزُقْنِي ، قَالَ اللَّهُ : قَدْ فَعَلْتُ " ، قَالَ : فَعَقَدَ الْأَعْرَابِيُّ عَلَى سَبْعٍ فِي يَدِهِ ثُمَّ وَلَّى .
एक देहाती नबी, अल्लाह उन पर सलावत और सलाम नाज़िल फ़रमाए, के पास आया और कहा: ऐ अल्लाह के रसूल, मुझे कोई भलाई सिखाइए। नबी ने उसका हाथ पकड़ा और कहा: कहो, अल्लाह पवित्र है, सारी प्रशंसा अल्लाह के लिए है, अल्लाह के सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं और अल्लाह सबसे महान है। देहाती ने इन्हें अपनी उँगलियों पर गिना, चला गया और विचार किया; फिर लौट आया। नबी मुस्कुराए और कहा: बेचारे ने विचार किया और लौट आया। उसने कहा: ऐ अल्लाह के रसूल, अल्लाह पवित्र है, सारी प्रशंसा अल्लाह के लिए है, अल्लाह के सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं और अल्लाह सबसे महान है, ये तो अल्लाह के लिए हैं; मेरे लिए क्या है? नबी ने कहा: ऐ देहाती, जब तुम कहते हो अल्लाह पवित्र है, तो अल्लाह कहता है: तुमने सच कहा। जब तुम कहते हो सारी प्रशंसा अल्लाह के लिए है, तो अल्लाह कहता है: तुमने सच कहा। जब तुम कहते हो अल्लाह के सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं, तो अल्लाह कहता है: तुमने सच कहा। जब तुम कहते हो अल्लाह सबसे महान है, तो अल्लाह कहता है: तुमने सच कहा। जब तुम कहते हो ऐ अल्लाह, मुझे क्षमा कर, तो अल्लाह कहता है: मैंने कर दिया। जब तुम कहते हो ऐ अल्लाह, मुझ पर दया कर, तो अल्लाह कहता है: मैंने कर दिया। जब तुम कहते हो ऐ अल्लाह, मुझे आजीविका दे, तो अल्लाह कहता है: मैंने कर दिया। फिर देहाती ने अपनी उँगलियों पर सात गिने और चला गया।