अज़ान सुनते समय के अज़कार

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مَا يُقَالُ عِنْدَ سَمَاعِ الْأَذَانِ
يَقُولُ مِثْلَ مَا يَقُولُ الْمُؤَذِّنُ إِلَّا فِي "حَيَّ عَلَى الصَّلَاةِ وَحَيَّ عَلَى الْفَلَاحِ" فَيَقُولُ: "لَا حَوْلَ وَلَا قُوَّةَ إِلَّا بِاللَّهِ".
अज़ान सुनते समय क्या कहें
मुअज़्ज़िन जो कहे वही कहे, लेकिन “नमाज़ की ओर आओ” और “सफलता की ओर आओ” पर कहे: “अल्लाह की सहायता के बिना न कोई शक्ति है और न सामर्थ्य।”
عَنْ سَعْدِ بْنِ أَبِي وَقَّاصٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ عَنِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّهُ قَالَ: "مَنْ قَالَ حِينَ يَسْمَعُ الْمُؤَذِّنَ : أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ ، وَأَنَّ مُحَمَّدًا عَبْدُهُ وَرَسُولُهُ ، رَضِيتُ بِاللَّهِ رَبًّا ، وَبِمُحَمَّدٍ رَسُولًا ، وَبِالْإِسْلَامِ دِينًا ، غُفِرَ لَهُ ذَنْبُهُ". رَوَاهُ مُسْلِمٌ .
सअद बिन अबी वक़्क़ास, अल्लाह उनसे प्रसन्न हो, ने नबी, अल्लाह उन पर सलावत और सलाम नाज़िल फ़रमाए, से रिवायत किया कि उन्होंने कहा: जो मुअज़्ज़िन को सुनते समय कहे, मैं गवाही देता हूँ कि अल्लाह के सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं, वह अकेला है, उसका कोई साझी नहीं और मुहम्मद उसके बंदे और रसूल हैं। मैं अल्लाह को पालनहार, मुहम्मद को रसूल और इस्लाम को धर्म मानकर प्रसन्न हूँ; उसका पाप क्षमा कर दिया जाएगा। इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।
عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرِو بْنِ الْعَاصِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا أَنَّهُ سَمِعَ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ : "إِذَا سَمِعْتُمُ النِّدَاءَ فَقُولُوا مِثْلَ مَا يَقُولُ ، ثُمَّ صَلُّوا عَلَيَّ ، فَإِنَّهُ مَنْ صَلَّى عَلَيَّ صَلَاةً صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ بِهَا عَشْرًا ، ثُمَّ سَلُوا اللَّهَ لِيَ الْوَسِيلَةَ ، فَإِنَّهَا مَنْزِلَةٌ فِي الْجَنَّةِ لَا تَنْبَغِي إِلَّا لِعَبْدٍ مِنْ عِبَادِ اللَّهِ وَأَرْجُو أَنْ أَكُونَ أَنَا هُوَ ، فَمَنْ سَأَلَ لِيَ الْوَسِيلَةَ حَلَّتْ لَهُ الشَّفَاعَةُ". رَوَاهُ مُسْلِمٌ .
अब्दुल्लाह बिन अम्र बिन आस, अल्लाह उन दोनों से प्रसन्न हो, से रिवायत है कि उन्होंने अल्लाह के रसूल, अल्लाह उन पर सलावत और सलाम नाज़िल फ़रमाए, को कहते सुना: जब तुम अज़ान सुनो तो वही कहो जो मुअज़्ज़िन कहता है, फिर मुझ पर सलावत भेजो। जो मुझ पर एक बार सलावत भेजता है, अल्लाह उस पर दस बार सलावत भेजता है। फिर अल्लाह से मेरे लिए वसीला माँगो; वह जन्नत का एक स्थान है जो अल्लाह के बंदों में से केवल एक बंदे के योग्य है और मैं आशा करता हूँ कि वह मैं हूँ। जो मेरे लिए वसीला माँगता है उसके लिए शफ़ाअत आवश्यक हो जाती है। इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।
عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ : "مَنْ قَالَ حِينَ يَسْمَعُ النِّدَاءَ : اللَّهُمَّ رَبَّ هَذِهِ الدَّعْوَةِ التَّامَّةِ ، وَالصَّلَاةِ الْقَائِمَةِ، آتِ مُحَمَّدًا الْوَسِيلَةَ ، وَالْفَضِيلَةَ، وَابْعَثْهُ مَقَامًا مَحْمُودًا الَّذِي وَعَدْتَهُ ، حَلَّتْ لَهُ شَفَاعَتِي يَوْمَ الْقِيَامَةِ" .رَوَاهُ الْبُخَارِيُّ .
जाबिर बिन अब्दुल्लाह, अल्लाह उन दोनों से प्रसन्न हो, से रिवायत है कि अल्लाह के रसूल, अल्लाह उन पर सलावत और सलाम नाज़िल फ़रमाए, ने कहा: जो अज़ान सुनते समय कहे, ऐ अल्लाह, इस पूर्ण पुकार और स्थापित होने वाली नमाज़ के स्वामी, मुहम्मद को वसीला और श्रेष्ठता प्रदान कर और उन्हें उस प्रशंसित स्थान पर पहुँचा जिसका तूने उनसे वादा किया है; उसके लिए क़ियामत के दिन मेरी शफ़ाअत आवश्यक हो जाएगी। इसे अल-बुख़ारी ने रिवायत किया है।
مَا يُقَالُ بَعْدَ سَمَاعِ الْأَذَانِ
اللَّهُمَّ صَلِّ وَسَلِّمْ وَبَارِكْ عَلَى سَيِّدِنَا مُحَمَّدٍ.
اللَّهُمَّ رَبَّ هَذِهِ الدَّعْوَةِ التَّامَّةِ، وَالصَّلَاةِ الْقَائِمَةِ، آتِ مُحَمَّدًا الْوَسِيلَةَ وَالْفَضِيلَةَ، وَابْعَثْهُ مَقَامًا مَحْمُودًا الَّذِي وَعَدْتَهُ، إِنَّكَ لَا تُخْلِفُ الْمِيعَادَ.
अज़ान सुनने के बाद क्या कहें
ऐ अल्लाह, हमारे स्वामी मुहम्मद पर अपनी दया, सलामती और बरकत भेज।
ऐ अल्लाह, इस संपूर्ण पुकार और स्थापित होने वाली नमाज़ के रब, मुहम्मद को वसीला और फ़ज़ीलत प्रदान कर और उन्हें उस प्रशंसित स्थान पर पहुँचा जिसका तूने उनसे वादा किया है। निश्चय ही तू वादा नहीं तोड़ता।
مَا يُقَالُ بَيْنَ الْأَذَانِ وَالْإِقَامَةِ
مَا بَيْنَ الْأَذَانِ وَالْإِقَامَةِ فَالدُّعَاءُ عِنْدَئِذٍ مُرَغَّبٌ فِيهِ وَمُسْتَحَبٌّ.
قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: "الدُّعَاءُ لَا يُرَدُّ بَيْنَ الْأَذَانِ وَالْإِقَامَةِ".
قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: "إِنَّ الدُّعَاءَ لَا يُرَدُّ بَيْنَ الْأَذَانِ وَالْإِقَامَةِ فَادْعُوا".
अज़ान और इक़ामत के बीच क्या कहें
अज़ान और इक़ामत के बीच दुआ करना प्रोत्साहित और अनुशंसित है।
अल्लाह के रसूल, उन पर दया और सलामती हो, ने कहा: अज़ान और इक़ामत के बीच की दुआ रद्द नहीं की जाती।
अल्लाह के रसूल, उन पर दया और सलामती हो, ने कहा: अज़ान और इक़ामत के बीच की दुआ रद्द नहीं की जाती, इसलिए दुआ करो।
نَصُّ صِيغَةِ الْأَذَانِ
اللَّهُ أَكْبَرُ ، اللَّهُ أَكْبَرُ
اللَّهُ أَكْبَرُ ، اللَّهُ أَكْبَرُ
أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ
أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ
أَشْهَدُ أَنَّ مُحَمَّدًا رَسُولُ اللَّهِ
أَشْهَدُ أَنَّ مُحَمَّدًا رَسُولُ اللَّهِ
حَيَّ عَلَى الصَّلَاةِ
حَيَّ عَلَى الصَّلَاةِ
حَيَّ عَلَى الْفَلَاحِ
حَيَّ عَلَى الْفَلَاحِ
اللَّهُ أَكْبَرُ ، اللَّهُ أَكْبَرُ
لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ
अज़ान के शब्द
अल्लाह सबसे महान है, अल्लाह सबसे महान है।
अल्लाह सबसे महान है, अल्लाह सबसे महान है।
मैं गवाही देता हूँ कि अल्लाह के सिवा कोई इबादत के योग्य नहीं।
मैं गवाही देता हूँ कि अल्लाह के सिवा कोई इबादत के योग्य नहीं।
मैं गवाही देता हूँ कि मुहम्मद अल्लाह के रसूल हैं।
मैं गवाही देता हूँ कि मुहम्मद अल्लाह के रसूल हैं।
नमाज़ की ओर आओ।
नमाज़ की ओर आओ।
सफलता की ओर आओ।
सफलता की ओर आओ।
अल्लाह सबसे महान है, अल्लाह सबसे महान है।
अल्लाह के सिवा कोई इबादत के योग्य नहीं।
نَصُّ صِيغَةِ أَذَانِ الْفَجْرِ
اللَّهُ أَكْبَرُ ، اللَّهُ أَكْبَرُ
اللَّهُ أَكْبَرُ ، اللَّهُ أَكْبَرُ
أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ
أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ
أَشْهَدُ أَنَّ مُحَمَّدًا رَسُولُ اللَّهِ
أَشْهَدُ أَنَّ مُحَمَّدًا رَسُولُ اللَّهِ
حَيَّ عَلَى الصَّلَاةِ
حَيَّ عَلَى الصَّلَاةِ
حَيَّ عَلَى الْفَلَاحِ
حَيَّ عَلَى الْفَلَاحِ
الصَّلَاةُ خَيْرٌ مِنَ النَّوْمِ
الصَّلَاةُ خَيْرٌ مِنَ النَّوْمِ
اللَّهُ أَكْبَرُ ، اللَّهُ أَكْبَرُ
لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ
फ़ज्र की अज़ान के शब्द
अल्लाह सबसे महान है, अल्लाह सबसे महान है।
अल्लाह सबसे महान है, अल्लाह सबसे महान है।
मैं गवाही देता हूँ कि अल्लाह के सिवा कोई इबादत के योग्य नहीं।
मैं गवाही देता हूँ कि अल्लाह के सिवा कोई इबादत के योग्य नहीं।
मैं गवाही देता हूँ कि मुहम्मद अल्लाह के रसूल हैं।
मैं गवाही देता हूँ कि मुहम्मद अल्लाह के रसूल हैं।
नमाज़ की ओर आओ।
नमाज़ की ओर आओ।
सफलता की ओर आओ।
सफलता की ओर आओ।
नमाज़ नींद से बेहतर है।
नमाज़ नींद से बेहतर है।
अल्लाह सबसे महान है, अल्लाह सबसे महान है।
अल्लाह के सिवा कोई इबादत के योग्य नहीं।
نَصُّ صِيغَةِ الْإِقَامَةِ
اللَّهُ أَكْبَرُ ، اللَّهُ أَكْبَرُ
أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ
أَشْهَدُ أَنَّ مُحَمَّدًا رَسُولُ اللَّهِ
حَيَّ عَلَى الصَّلَاةِ
حَيَّ عَلَى الْفَلَاحِ
قَدْ قَامَتِ الصَّلَاةُ
قَدْ قَامَتِ الصَّلَاةُ
اللَّهُ أَكْبَرُ ، اللَّهُ أَكْبَرُ
لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ
इक़ामत के शब्द
अल्लाह सबसे महान है, अल्लाह सबसे महान है।
मैं गवाही देता हूँ कि अल्लाह के सिवा कोई इबादत के योग्य नहीं।
मैं गवाही देता हूँ कि मुहम्मद अल्लाह के रसूल हैं।
नमाज़ की ओर आओ।
सफलता की ओर आओ।
नमाज़ स्थापित हो गई।
नमाज़ स्थापित हो गई।
अल्लाह सबसे महान है, अल्लाह सबसे महान है।
अल्लाह के सिवा कोई इबादत के योग्य नहीं।
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हदीस पुस्तकालय से

हदीस
Narrated 'Umar bin Al-Khattab: Allah's Messenger (ﷺ) said, "The reward of deeds depends upon the intention and every person will get the reward according to what he has intended. So whoever emigrated for Allah and His Apostle, then his emigration was for Allah and His Apostle. And whoever emigrated for worldly benefits or for a woman to marry, his emigration was for what he emigrated for."
Abu Hurairah (RAA) narrated that The Messenger of Allah (ﷺ) said: "None of you should fast a day or two before the (beginning of the) mouth of Ramadan, unless it is a day on which one is in the habit of fasting (i.e. voluntary fasting that coincides with that day).” Agreed upon.