फ़र्ज़ नमाज़ के सलाम के बाद के अज़कार

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أَسْتَغْفِرُ اللَّهَ، أَسْتَغْفِرُ اللَّهَ، أَسْتَغْفِرُ اللَّهَ.
اللَّهُمَّ أَنْتَ السَّلَامُ ، وَمِنْكَ السَّلَامُ ، تَبَارَكْتَ يَا ذَا الْجَلَالِ وَالْإِكْرَامِ .
मैं अल्लाह से क्षमा माँगता हूँ, मैं अल्लाह से क्षमा माँगता हूँ, मैं अल्लाह से क्षमा माँगता हूँ।
ऐ अल्लाह, तू सलामती है और सलामती तुझसे ही है। ऐ महानता और सम्मान के स्वामी, तू बरकत वाला है।
لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ، لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ، وَهُوَ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ، اللَّهُمَّ لَا مَانِعَ لِمَا أَعْطَيْتَ، وَلَا مُعْطِيَ لِمَا مَنَعْتَ، وَلَا يَنْفَعُ ذَا الْجَدِّ مِنْكَ الْجَدُّ.
अल्लाह के सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं, वह अकेला है, उसका कोई साझी नहीं। राज्य और प्रशंसा उसी के लिए हैं और वह हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है। ऐ अल्लाह, जो तू दे उसे कोई रोक नहीं सकता और जो तू रोके उसे कोई दे नहीं सकता; धनवान को उसका धन तेरे सामने लाभ नहीं देता।
لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ، وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ، لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ، وَهُوَ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ، لَا حَوْلَ وَلَا قُوَّةَ إِلَّا بِاللَّهِ، لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ، وَلَا نَعْبُدُ إِلَّا إِيَّاهُ، لَهُ النِّعْمَةُ وَلَهُ الْفَضْلُ وَلَهُ الثَّنَاءُ الْحَسَنُ، لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ مُخْلِصِينَ لَهُ الدِّينَ وَلَوْ كَرِهَ الْكَافِرُونَ.
अल्लाह के सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं, वह अकेला है, उसका कोई साझी नहीं। राज्य और प्रशंसा उसी के लिए हैं और वह हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है। अल्लाह की सहायता के बिना न कोई शक्ति है और न कोई सामर्थ्य। अल्लाह के सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं और हम केवल उसी की इबादत करते हैं। नेमत, अनुग्रह और सुंदर प्रशंसा उसी के लिए हैं। अल्लाह के सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं; हम धर्म को उसके लिए निष्कपट रखते हैं, भले ही इनकार करने वालों को अप्रिय लगे।
سُبْحَانَ اللَّهِ، وَالْحَمْدُ لِلَّهِ ، وَاللَّهُ أَكْبَرُ.
अल्लाह पवित्र है, सारी प्रशंसा अल्लाह के लिए है और अल्लाह सबसे महान है।
لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ، لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ، وَهُوَ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ.
अल्लाह के सिवा कोई सच्चा उपास्य नहीं। वह अकेला है, उसका कोई साझी नहीं। उसी का राज्य है और उसी के लिए सारी प्रशंसा है, और वह हर चीज़ पर सामर्थ्य रखता है।
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَنِ الرَّحِيمِ
قُلْ هُوَ اللَّهُ أَحَدٌ، اللَّهُ الصَّمَدُ، لَمْ يَلِدْ وَلَمْ يُولَدْ، وَلَمْ يَكُن لَّهُ كُفُوًا أَحَدٌ.
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَنِ الرَّحِيمِ
قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ الْفَلَقِ، مِن شَرِّ مَا خَلَقَ، وَمِن شَرِّ غَاسِقٍ إِذَا وَقَبَ، وَمِن شَرِّ النَّفَّاثَاتِ فِي الْعُقَدِ، وَمِن شَرِّ حَاسِدٍ إِذَا حَسَدَ.
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَنِ الرَّحِيمِ
قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ النَّاسِ، مَلِكِ النَّاسِ، إِلَٰهِ النَّاسِ، مِن شَرِّ الْوَسْوَاسِ الْخَنَّاسِ، الَّذِي يُوَسْوِسُ فِي صُدُورِ النَّاسِ، مِنَ الْجِنَّةِ وَالنَّاسِ.
अल्लाह के नाम से जो अत्यंत दयावान, परम दयालु है
कहो: वह अल्लाह एक है; अल्लाह सबकी आवश्यकताओं का आश्रय है। न उसने जन्म दिया और न वह जन्मा; और कोई उसका समकक्ष नहीं।
अल्लाह के नाम से जो अत्यंत दयावान, परम दयालु है
कहो: मैं सुबह के रब की शरण माँगता हूँ, उसकी पैदा की हुई चीज़ों की बुराई से, अँधेरी रात की बुराई से जब वह छा जाए, गाँठों में फूँकने वालों की बुराई से और ईर्ष्या करने वाले की बुराई से जब वह ईर्ष्या करे।
अल्लाह के नाम से जो अत्यंत दयावान, परम दयालु है
कहो: मैं लोगों के रब, लोगों के बादशाह और लोगों के उपास्य की शरण माँगता हूँ, पीछे हट जाने वाले वसवसा डालने वाले की बुराई से, जो लोगों के दिलों में वसवसा डालता है, चाहे वह जिन्नों में से हो या मनुष्यों में से।
ثَلَاثَ مَرَّاتٍ بَعْدَ صَلَاتَيِ الْفَجْرِ وَالْمَغْرِبِ. وَمَرَّةً بَعْدَ الصَّلَوَاتِ الْأُخْرَى.
फ़ज्र और मग़रिब की नमाज़ के बाद तीन बार और अन्य नमाज़ों के बाद एक बार।
أَعُوذُ بِاللَّهِ مِنَ الشَّيْطَانِ الرَّجِيمِ
اللَّهُ لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ الْحَيُّ الْقَيُّومُ ۚ لَا تَأْخُذُهُ سِنَةٌ وَلَا نَوْمٌ ۚ لَّهُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ ۗ مَن ذَا الَّذِي يَشْفَعُ عِندَهُ إِلَّا بِإِذْنِهِ ۚ يَعْلَمُ مَا بَيْنَ أَيْدِيهِمْ وَمَا خَلْفَهُمْ ۖ وَلَا يُحِيطُونَ بِشَيْءٍ مِّنْ عِلْمِهِ إِلَّا بِمَا شَاءَ ۚ وَسِعَ كُرْسِيُّهُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ ۖ وَلَا يَئُودُهُ حِفْظُهُمَا ۚ وَهُوَ الْعَلِيُّ الْعَظِيمُ. [آيَةُ الْكُرْسِيِّ - الْبَقَرَةُ 255]
मैं धिक्कारे हुए शैतान से अल्लाह की शरण माँगता हूँ
अल्लाह, उसके सिवा कोई इबादत के योग्य नहीं; वह सदा जीवित है, सबको संभालने वाला है। उसे न ऊँघ आती है न नींद। आकाशों और धरती में जो कुछ है सब उसी का है। कौन है जो उसकी अनुमति के बिना उसके पास सिफ़ारिश करे? वह जानता है जो उनके सामने है और जो उनके पीछे है; वे उसके ज्ञान में से किसी चीज़ को नहीं घेर सकते सिवाय उसके जो वह चाहे। उसकी कुर्सी आकाशों और धरती पर विस्तृत है और उन दोनों की रक्षा उसे नहीं थकाती। वह सर्वोच्च, महान है। [आयतुल कुर्सी, अल-बक़रा 2:255]
لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ، لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ، يُحْيِي وَيُمِيتُ وَهُوَ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ.
अल्लाह के सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं, वह अकेला है, उसका कोई साझी नहीं। राज्य और प्रशंसा उसी के लिए हैं। वही जीवन देता है और मृत्यु देता है और वह हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है।
عَشْرَ مَرَّاتٍ بَعْدَ الْمَغْرِبِ وَالصُّـبْحِ.
मग़रिब और सुबह की नमाज़ के बाद दस बार।
اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ عِلْمًا نَافِعًا وَرِزْقًا طَيِّبًا ، وَعَمَلًا مُتَقَبَّلًا.
ऐ अल्लाह, मैं तुझसे लाभदायक ज्ञान, उत्तम आजीविका और स्वीकार किया गया कर्म माँगता हूँ।
بَعْدَ السَّلَامِ مِنْ صَلَاةِ الْفَجْرِ.
फ़ज्र की नमाज़ का सलाम फेरने के बाद।
اللَّهُمَّ أَجِرْنِي مِنَ النَّارِ.
ऐ अल्लाह, मुझे आग से बचा।
بَعْدَ صَلَاةِ الصُّبْحِ وَالْمَغْرِبِ.
सुबह और मग़रिब की नमाज़ के बाद।
اللَّهُمَّ أَعِنِّي عَلَى ذِكْرِكَ وَشُكْرِكَ وَحُسْنِ عِبَادَتِكَ.
ऐ अल्लाह! अपने स्मरण, अपने प्रति कृतज्ञता और सुंदर ढंग से अपनी इबादत करने में मेरी सहायता कर।
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हदीस पुस्तकालय से

हदीस
Narrated 'Alqamah bin Al-Muzani: From his father, who said that the Prophet (ﷺ) said: "When one of you buys meat, then let him increase its broth. For, if he does not find any meat you'll have broth; and it is one of the two meats." And there are narrations on this topic from Abu Dharr. [Abu 'Eisa said:] This Hadith is Gharib, we do not know of it except through this route, as a narration of Muhammad bin Fada', who is Muhammad bin Fada' Al-Mu'abbar, and he has been criticized by Sulaiman bin Harb. 'Alqamah bin 'Abdullah is the brother of Bakr bin 'Abdullah Al-Muzani.