विभिन्न अज़कार

पढ़ने की सेटिंग
دُعَاءُ لُبْسِ الثَّوْبِ
الْحَمْدُ لِلَّهِ الَّذِي كَسَانِي هَذَا (الثَّوْبَ) وَرَزَقَنِيهِ مِنْ غَيْرِ حَوْلٍ مِنِّي وَلَا قُوَّةٍ.
कपड़ा पहनने की दुआ
सारी प्रशंसा अल्लाह के लिए है जिसने मुझे यह कपड़ा पहनाया और मेरी अपनी किसी शक्ति या सामर्थ्य के बिना मुझे यह प्रदान किया।
دُعَاءُ لُبْسِ الثَّوْبِ الْجَدِيدِ
اللَّهُمَّ لَكَ الْحَمْدُ أَنْتَ كَسَوْتَنِيهِ، أَسْأَلُكَ مِنْ خَيْرِهِ
नया कपड़ा पहनते समय की दुआ
ऐ अल्लाह, सारी प्रशंसा तेरे लिए है। तूने मुझे यह कपड़ा पहनाया; मैं तुझसे इसकी भलाई माँगता हूँ।
دُعَاءُ الْكَرْبِ
لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ الْعَظِيمُ الْحَلِيمُ، لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ رَبُّ الْعَرْشِ الْعَظِيمِ، لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ رَبُّ السَّمَاوَاتِ، وَرَبُّ الْأَرْضِ وَرَبُّ الْعَرْشِ الْكَرِيمِ
اللَّهُمَّ رَحْمَتَكَ أَرْجُو فَلَا تَكِلْنِي إِلَى نَفْسِي طَرْفَةَ عَيْنٍ وَأَصْلِحْ لِي شَأْنِي كُلَّهُ ، لَا إِلَهَ إِلَّا أَنْتَ
لَا إِلَهَ إِلَّا أَنْتَ سُبْحَانَكَ إِنِّي كُنْتُ مِنَ الظَّالِمِينَ
اللَّهُ اللَّهُ رَبِّي لَا أُشْرِكُ بِهِ شَيْئًا
कठिन संकट की दुआ
महान, सहनशील अल्लाह के सिवा कोई इबादत के योग्य नहीं; महान अर्श के रब अल्लाह के सिवा कोई इबादत के योग्य नहीं; आकाशों, धरती और प्रतिष्ठित अर्श के रब अल्लाह के सिवा कोई इबादत के योग्य नहीं।
ऐ अल्लाह, मैं तेरी रहमत की आशा करता हूँ, इसलिए मुझे पलक झपकने भर के लिए भी मेरे हाल पर न छोड़ और मेरे सभी काम ठीक कर दे। तेरे सिवा कोई इबादत के योग्य नहीं।
तेरे सिवा कोई इबादत के योग्य नहीं, तू पवित्र है। निश्चय ही मैं अत्याचार करने वालों में से था।
अल्लाह, अल्लाह मेरा रब है; मैं उसके साथ किसी को साझी नहीं ठहराता।
دُعَاءُ الْهَمِّ وَالْحَزَنِ
اللَّهُمَّ إِنِّي عَبْدُكَ ابْنُ عَبْدِكَ ابْنُ أَمَتِكَ نَاصِيَتِي بِيَدِكَ مَاضٍ فِيَّ حُكْمُكَ ، عَدْلٌ فِيَّ قَضَاؤُكَ أَسْأَلُكَ بِكُلِّ اسْمٍ هُوَ لَكَ سَمَّيْتَ بِهِ نَفْسَكَ أَوْ أَنْزَلْتَهُ فِي كِتَابِكَ ، أَوْ عَلَّمْتَهُ أَحَدًا مِنْ خَلْقِكَ أَوِ اسْتَأْثَرْتَ بِهِ فِي عِلْمِ الْغَيْبِ عِنْدَكَ أَنْ تَجْعَلَ الْقُرْآنَ رَبِيعَ قَلْبِي ، وَنُورَ صَدْرِي وَجَلَاءَ حُزْنِي وَذَهَابَ هَمِّي.
اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْهَمِّ وَالْحَزَنِ وَالْعَجْزِ وَالْكَسَلِ وَالْبُخْلِ وَالْجُبْنِ ، وَضَلَعِ الدَّيْنِ وَغَلَبَةِ الرِّجَالِ.
चिंता और दुख की दुआ
ऐ अल्लाह, मैं तेरा बंदा, तेरे बंदे का पुत्र और तेरी बंदी का पुत्र हूँ। मेरी पेशानी तेरे हाथ में है, मुझ पर तेरा आदेश लागू है और मेरा निर्णय करने में तू न्यायी है। मैं तेरे हर उस नाम के द्वारा माँगता हूँ जिससे तूने अपना नाम रखा, या अपनी किताब में उतारा, या अपनी सृष्टि में से किसी को सिखाया, या अपने पास परोक्ष के ज्ञान में रखा, कि तू कुरआन को मेरे दिल की बहार, मेरे सीने का नूर, मेरे दुख को दूर करने और मेरी चिंता मिटाने का कारण बना।
ऐ अल्लाह, मैं चिंता और दुख, असमर्थता और आलस्य, कंजूसी और कायरता, कर्ज़ के बोझ और लोगों के दबाव से तेरी शरण माँगता हूँ।
دُعَاءُ قَضَاءِ الدَّيْنِ
اللَّهُمَّ اكْفِنِي بِحَلَالِكَ عَنْ حَرَامِكَ وَأَغْنِنِي بِفَضْلِكَ عَمَّنْ سِوَاكَ
क़र्ज़ अदा करने की दुआ
ऐ अल्लाह, अपने हलाल के द्वारा मुझे अपने हराम से पर्याप्त कर दे और अपने अनुग्रह से मुझे अपने सिवा सब से बेनियाज़ कर दे।
دُعَاءُ الرِّيحِ
اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ خَيْرَهَا، وَخَيْرَ مَا فِيهَا، وَخَيْرَ مَا أُرْسِلَتْ بِهِ، وَأَعُوذُ بِكَ مِنْ شَرِّهَا، وَشَرِّ مَا فِيهَا وَشَرِّ مَا أُرْسِلَتْ بِهِ.
हवा चलने पर दुआ
ऐ अल्लाह, मैं तुझसे इसका भला, इसमें जो भलाई है और जिस भलाई के साथ इसे भेजा गया है वह माँगता हूँ; और इसकी बुराई, इसमें जो बुराई है और जिस बुराई के साथ इसे भेजा गया है उससे तेरी शरण माँगता हूँ।
دُعَاءُ الرَّعْدِ
سُبْحَانَ اللَّهِ الَّذِي يُسَبِّحُ الرَّعْدُ بِحَمْدِهِ وَالْمَلَائِكَةُ مِنْ خِيفَتِهِ
बादल गरजने पर दुआ
पवित्र है वह अल्लाह जिसकी प्रशंसा के साथ बादल की गरज और जिसके डर से फ़रिश्ते उसका गुणगान करते हैं।
دُعَاءُ زِيَارَةِ الْقُبُورِ
السَّلَامُ عَلَيْكُمْ أَهْلَ الدِّيَارِ مِنَ الْمُؤْمِنِينَ وَالْمُسْلِمِينَ، وَإِنَّا إِنْ شَاءَ اللَّهُ بِكُمْ لَاحِقُونَ وَيَرْحَمُ اللَّهُ الْمُسْتَقْدِمِينَ مِنَّا وَالْمُسْتَأْخِرِينَ، أَسْأَلُ اللَّهَ لَنَا وَلَكُمُ الْعَافِيَةَ.
क़ब्रों की ज़ियारत की दुआ
ऐ इन घरों में रहने वाले ईमान वालो और मुसलमानो, तुम पर सलामती हो। अल्लाह ने चाहा तो हम भी तुमसे आ मिलने वाले हैं। अल्लाह हममें से पहले जाने वालों और बाद में आने वालों पर दया करे। मैं अल्लाह से हमारे और तुम्हारे लिए कुशलता माँगता हूँ।
دُعَاءُ نُزُولِ الْمَطَرِ
اللَّهُمَّ صَيِّبًا نَافِعًا
बारिश के समय की दुआ
ऐ अल्लाह, लाभकारी वर्षा बरसा।
دُعَاءُ رُكُوبِ الدَّابَّةِ أَوْ مَا يَقُومُ مَقَامَهَا ( السَّيَّارَةِ أَوِ الْقِطَارِ أَوِ الطَّائِرَةِ أَوِ السَّفِينَةِ)
بِسْمِ اللَّهِ ، الْحَمْدُ لِلَّهِ ، سُبْحَانَ الَّذِي سَخَّرَ لَنَا هَذَا وَمَا كُنَّا لَهُ مُقْرِنِينَ وَإِنَّا إِلَى رَبِّنَا لَمُنْقَلِبُونَ، الْحَمْدُ لِلَّهِ ، الْحَمْدُ لِلَّهِ ، الْحَمْدُ لِلَّهِ ، اللَّهُ أَكْبَرُ ، اللَّهُ أَكْبَرُ ، اللَّهُ أَكْبَرُ ، سُبْحَانَكَ اللَّهُمَّ إِنِّي ظَلَمْتُ نَفْسِي فَاغْفِرْ لِي ، فَإِنَّهُ لَا يَغْفِرُ الذُّنُوبَ إِلَّا أَنْتَ.
सवारी या उसके स्थान पर वाहन, रेल, विमान अथवा जहाज़ पर सवार होने की दुआ
अल्लाह के नाम से, सारी प्रशंसा अल्लाह के लिए है। पवित्र है वह जिसने इसे हमारे वश में कर दिया, जबकि हम इसे वश में करने में सक्षम नहीं थे। निश्चय ही हमें अपने रब की ओर लौटना है। सारी प्रशंसा अल्लाह के लिए है, सारी प्रशंसा अल्लाह के लिए है, सारी प्रशंसा अल्लाह के लिए है। अल्लाह सबसे महान है, अल्लाह सबसे महान है, अल्लाह सबसे महान है। ऐ अल्लाह, तू पवित्र है; मैंने अपने ऊपर अत्याचार किया, इसलिए मुझे क्षमा कर, क्योंकि तेरे सिवा पापों को कोई क्षमा नहीं करता।
دُعَاءُ السَّفَرِ
اللَّهُمَّ إِنَّا نَسْأَلُكَ فِي سَفَرِنَا هَذَا الْبِرَّ وَالتَّقْوَى، وَمِنَ الْعَمَلِ مَا تَرْضَى ، اللَّهُمَّ هَوِّنْ عَلَيْنَا سَفَرَنَا هَذَا وَاطْوِ عَنَّا بُعْدَهُ، اللَّهُمَّ أَنْتَ الصَّاحِبُ فِي السَّفَرِ، وَالْخَلِيفَةُ فِي الْأَهْلِ، اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنْ وَعْثَاءِ السَّفَرِ وَكَآبَةِ الْمَنْظَرِ وَسُوءِ الْمُنْقَلَبِ فِي الْمَالِ وَالْأَهْلِ.
وَإِذَا رَجَعَ قَالَهُنَّ وَزَادَ فِيهِنَّ ـ" آيِبُونَ ،تَائِبُونَ، عَابِدُونَ ، لِرَبِّنَا حَامِدُونَ"
यात्रा की दुआ
ऐ अल्लाह, हम अपनी इस यात्रा में तुझसे नेकी और तक़वा तथा वह कर्म माँगते हैं जिससे तू प्रसन्न हो। ऐ अल्लाह, हमारी इस यात्रा को आसान कर और इसकी दूरी हमारे लिए समेट दे। ऐ अल्लाह, यात्रा में तू ही साथी और परिवार का देखभाल करने वाला है। ऐ अल्लाह, मैं यात्रा की कठिनाई, दुखद दृश्य और धन व परिवार के संबंध में बुरी वापसी से तेरी शरण माँगता हूँ।
लौटते समय यही कहे और इसमें जोड़े: हम लौटने वाले, तौबा करने वाले, इबादत करने वाले और अपने रब की प्रशंसा करने वाले हैं।
دُعَاءُ الْمُسَافِرِ لِلْمُقِيمِ
أَسْتَوْدِعُكُمُ اللَّهَ الَّذِي لَا تَضِيعُ وَدَائِعُهُ
मुसाफ़िर की पीछे रहने वाले के लिए दुआ
मैं तुम्हें उस अल्लाह के सुपुर्द करता हूँ जिसकी अमानतें नष्ट नहीं होतीं।
دُعَاءُ الْمُقِيمِ لِلْمُسَافِرِ
أَسْتَوْدِعُ اللَّهَ دِينَكَ وَأَمَانَتَكَ ، وَخَوَاتِيمَ عَمَلِكَ زَوَّدَكَ اللَّهُ التَّقْوَى، وَغَفَرَ ذَنْبَكَ، وَيَسَّرَ لَكَ الْخَيْرَ حَيْثُ مَا كُنْتَ
निवासी की यात्री के लिए दुआ
मैं तुम्हारे धर्म, तुम्हारी अमानत और तुम्हारे अंतिम कर्मों को अल्लाह की सुरक्षा में सौंपता हूँ। अल्लाह तुम्हें तक़वा की पूँजी दे, तुम्हारा पाप क्षमा करे और तुम जहाँ भी रहो तुम्हारे लिए भलाई आसान करे।
دُعَاءُ النُّزُولِ فِي مَكَانٍ
أَعُوذُ بِكَلِمَاتِ اللَّهِ التَّامَّاتِ مِنْ شَرِّ مَا خَلَقَ
किसी स्थान पर ठहरते समय की दुआ
अल्लाह की बनाई चीज़ों की बुराई से मैं उसके संपूर्ण शब्दों की पनाह माँगता हूँ।
الدُّعَاءُ بَيْنَ السَّجْدَتَيْنِ
رَبِّ اغْفِرْ لِي رَبِّ اغْفِرْ لِي اللَّهُمَّ اغْفِرْ لِي ، وَارْحَمْنِي وَاهْدِنِي وَاجْبُرْنِي وَعَافِنِي وَارْزُقْنِي وَارْفَعْنِي
दो सज्दों के बीच की दुआ
मेरे रब, मुझे क्षमा कर; मेरे रब, मुझे क्षमा कर। ऐ अल्लाह, मुझे क्षमा कर, मुझ पर दया कर, मुझे मार्गदर्शन दे, मेरी कमी पूरी कर, मुझे कुशलता दे, मुझे रोज़ी दे और मेरा दर्जा ऊँचा कर।
دُعَاءُ مَنِ اسْتَصْعَبَ عَلَيْهِ أَمْرٌ
اللَّهُمَّ لَا سَهْلَ إِلَّا مَا جَعَلْتَهُ سَهْلًا وَأَنْتَ تَجْعَلُ الْحَزْنَ إِذَا شِئْتَ سَهْلًا
कठिन काम के समय की दुआ
ऐ अल्लाह, कोई चीज़ आसान नहीं सिवाय उसके जिसे तू आसान कर दे, और तू चाहे तो कठिनाई को आसान कर देता है।
دُعَاءُ الْخَوْفِ مِنَ الشِّرْكِ
اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ أَنْ أُشْرِكَ بِكَ وَأَنَا أَعْلَمُ ، وَأَسْتَغْفِرُكَ لِمَا لَا أَعْلَمُ
शिर्क के डर की दुआ
ऐ अल्लाह, मैं तेरी शरण माँगता हूँ कि जानबूझकर किसी को तेरा साझी बनाऊँ, और जो मैं नहीं जानता उसके लिए तुझसे क्षमा माँगता हूँ।
مَا يُقَالُ فِي الْمَجْلِسِ
رَبِّ اغْفِرْ لِي وَتُبْ عَلَيَّ إِنَّكَ أَنْتَ التَّوَّابُ الْغَفُورُ (100 مَرَّةٍ قَبْلَ أَنْ يَقُومَ)
मजलिस में कही जाने वाली दुआ
ऐ मेरे रब, मुझे क्षमा कर और मेरी तौबा स्वीकार कर। निःसंदेह तू बहुत तौबा स्वीकार करने वाला, बहुत क्षमाशील है। (उठने से पहले 100 बार।)
كَفَّارَةُ الْمَجْلِسِ
سُبْحَانَكَ اللَّهُمَّ وَبِحَمْدِكَ ، أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا أَنْتَ أَسْتَغْفِرُكَ وَأَتُوبُ إِلَيْكَ
मजलिस के अंत की क्षमा-प्रार्थना
ऐ अल्लाह, तू पवित्र है और सारी प्रशंसा तेरे लिए है। मैं गवाही देता हूँ कि तेरे सिवा कोई इबादत के योग्य नहीं। मैं तुझसे क्षमा माँगता हूँ और तेरी ओर तौबा करता हूँ।
دُعَاءُ مَنْ رَأَى مُبْتَلًى
الْحَمْدُ لِلَّهِ الَّذِي عَافَانِي مِمَّا ابْتَلَاهُ بِهِ وَفَضَّلَنِي عَلَى كَثِيرٍ مِمَّنْ خَلَقَ تَفْضِيلًا
किसी विपत्ति में पड़े व्यक्ति को देखकर दुआ
सारी प्रशंसा अल्लाह के लिए है जिसने मुझे उस विपत्ति से सुरक्षित रखा जिसमें उसे डाला और अपनी बहुत-सी सृष्टि पर मुझे श्रेष्ठता दी।
دُعَاءُ الْغَضَبِ
أَعُوذُ بِاللَّهِ مِنَ الشَّيْطَانِ الرَّجِيمِ
ग़ुस्से के समय की दुआ
मैं धिक्कारे हुए शैतान से अल्लाह की पनाह माँगता हूँ।
الدُّعَاءُ لِلْمُتَزَوِّجِ
بَارَكَ اللَّهُ لَكَ ، وَبَارَكَ عَلَيْكَ ، وَجَمَعَ بَيْنَكُمَا فِي خَيْرٍ
शादी करने वाले के लिए दुआ
अल्लाह तुम्हारे लिए बरकत दे, तुम पर बरकत उतारे और तुम दोनों को भलाई में एक करे।
دُعَاءُ الْمُتَزَوِّجِ لِنَفْسِهِ
اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ خَيْرَهَا وَخَيْرَ مَا جَبَلْتَهَا عَلَيْهِ وَأَعُوذُ بِكَ مِنْ شَرِّهَا وَشَرِّ مَا جَبَلْتَهَا عَلَيْهِ ، وَإِذَا اشْتَرَى بَعِيرًا فَلْيَأْخُذْ بِذُرْوَةِ سَنَامِهِ وَلْيَقُلْ مِثْلَ ذَلِكَ
विवाह करने वाले की अपने लिए दुआ
ऐ अल्लाह, मैं तुझसे उसकी भलाई और उस स्वभाव की भलाई माँगता हूँ जिस पर तूने उसे बनाया है, और उसकी बुराई और उस स्वभाव की बुराई से तेरी शरण माँगता हूँ जिस पर तूने उसे बनाया है। और जब ऊँट खरीदे तो उसके कूबड़ का ऊपरी भाग पकड़कर यही कहे।
الدُّعَاءُ قَبْلَ الْجِمَاعِ
بِسْمِ اللَّهِ ـ اللَّهُمَّ جَنِّبْنَا الشَّيْطَانَ، وَجَنِّبِ الشَّيْطَانَ مَا رَزَقْتَنَا
वैवाहिक संबंध से पहले की दुआ
अल्लाह के नाम से। ऐ अल्लाह, शैतान को हमसे दूर रख और जो तू हमें प्रदान करे उससे भी शैतान को दूर रख।
دُعَاءُ الْعُطَاسِ
إِذَا عَطَسَ أَحَدُكُمْ فَلْيَقُلْ : الْحَمْدُ لِلَّهِ ، وَلْيَقُلْ لَهُ أَخُوهُ ، أَوْ صَاحِبُهُ : يَرْحَمُكَ اللَّهُ فَإِذَا قَالَ لَهُ : يَرْحَمُكَ اللَّهُ ، فَلْيَقُلْ : يَهْدِيكُمُ اللَّهُ وَيُصْلِحُ بَالَكُمْ.
छींक आने पर दुआ
जब तुममें से किसी को छींक आए तो वह कहे: सारी प्रशंसा अल्लाह के लिए है। उसका भाई या साथी उससे कहे: अल्लाह तुम पर दया करे। जब वह ऐसा कहे तो जवाब दे: अल्लाह तुम्हें मार्गदर्शन दे और तुम्हारी दशा ठीक करे।
الدُّعَاءُ عِنْدَ إِفْطَارِ الصَّائِمِ
ذَهَبَ الظَّمَأُ ، وَابْتَلَّتِ الْعُرُوقُ ، وَثَبَتَ الْأَجْرُ إِنْ شَاءَ اللَّهُ
रोज़ेदार के इफ़्तार के समय की दुआ
प्यास चली गई, नसें तर हो गईं और यदि अल्लाह ने चाहा तो पुण्य निश्चित हो गया।
الدُّعَاءُ إِذَا أَفْطَرَ عِنْدَ أَهْلِ بَيْتٍ
أَفْطَرَ عِنْدَكُمُ الصَّائِمُونَ ، وَأَكَلَ طَعَامَكُمُ الْأَبْرَارُ ، وَصَلَّتْ عَلَيْكُمُ الْمَلَائِكَةُ
किसी के घर इफ़्तार करने के बाद दुआ
तुम्हारे यहाँ रोज़ेदारों ने इफ़्तार किया, तुम्हारा भोजन नेक लोगों ने खाया और फ़रिश्तों ने तुम्हारे लिए दुआ की।
دُعَاءُ رُؤْيَةِ الْهِلَالِ
اللَّهُ أَكْبَرُ ، اللَّهُمَّ أَهِلَّهُ عَلَيْنَا بِالْأَمْنِ ، وَالْإِيمَانِ وَالسَّلَامَةِ ، وَالْإِسْلَامِ ، وَالتَّوْفِيقِ لِمَا تُحِبُّ وَتَرْضَى رَبُّنَا وَرَبُّكَ اللَّهُ.
नया चाँद देखने की दुआ
अल्लाह सबसे महान है। ऐ अल्लाह, इसे हमारे लिए सुरक्षा, ईमान, सलामती, इस्लाम और जो तुझे प्रिय और पसंद है उसे करने की तौफ़ीक़ के साथ उगा। हमारा रब और तेरा रब अल्लाह है।
دُعَاءُ مَنْ أُصِيبَ بِمُصِيبَةٍ
إِنَّا لِلَّهِ وَإِنَّا إِلَيْهِ رَاجِعُونَ اللَّهُمَّ أْجُرْنِي فِي مُصِيبَتِي وَأَخْلِفْ لِي خَيْرًا مِنْهَا
विपत्ति आने पर दुआ
निश्चय ही हम अल्लाह के हैं और उसी की ओर लौटने वाले हैं। ऐ अल्लाह, मेरी विपत्ति में मुझे प्रतिफल दे और इसके बदले मुझे इससे बेहतर प्रदान कर।
الدُّعَاءُ لِلْمَرِيضِ فِي عِيَادَتِهِ
لَا بَأْسَ طَهُورٌ إِنْ شَاءَ اللَّهُ مَا مِنْ عَبْدٍ مُسْلِمٍ يَعُودُ مَرِيضًا لَمْ يَحْضُرْ أَجَلُهُ فَيَقُولُ سَبْعَ مَرَّاتٍ : أَسْأَلُ اللَّهَ الْعَظِيمَ رَبَّ الْعَرْشِ الْعَظِيمِ أَنْ يَشْفِيَكَ إِلَّا عُوفِيَ.
बीमार से मिलने पर उसके लिए दुआ
कोई हर्ज नहीं, अल्लाह ने चाहा तो यह पवित्रता का कारण है। कोई मुसलमान बंदा ऐसे बीमार से मिलने जाए जिसकी मृत्यु का समय नहीं आया है और सात बार कहे: मैं महान अल्लाह, महान अर्श के रब से माँगता हूँ कि वह तुम्हें शिफ़ा दे, तो उसे स्वास्थ्य प्रदान किया जाता है।
دُعَاءُ الْمَرِيضِ الَّذِي يَئِسَ مِنْ حَيَاتِهِ
اللَّهُمَّ اغْفِرْ لِي وَارْحَمْنِي وَأَلْحِقْنِي بِالرَّفِيقِ الْأَعْلَى
जीवन की आशा खो चुके रोगी की दुआ
ऐ अल्लाह, मुझे क्षमा कर, मुझ पर दया कर और मुझे उच्चतम संगति से मिला दे।
مَا يُعَوَّذُ بِهِ الْأَوْلَادُ
أُعِيذُكُمَا بِكَلِمَاتِ اللَّهِ التَّامَّةِ مِنْ كُلِّ شَيْطَانٍ وَهَامَّةٍ ، وَمِنْ كُلِّ عَيْنٍ لَامَّةٍ
बच्चों के लिए सुरक्षा की दुआ
मैं तुम दोनों को अल्लाह के संपूर्ण वचनों की शरण में देता हूँ, हर शैतान और हानिकारक जीव से तथा हर नुकसान पहुँचाने वाली नज़र से।
دُعَاءُ لِقَاءِ الْعَدُوِّ وَذِي السُّلْطَانِ
حَسْبُنَا اللَّهُ وَنِعْمَ الْوَكِيلُ
اللَّهُمَّ إِنَّا نَجْعَلُكَ فِي نُحُورِهِمْ وَنَعُوذُ بِكَ مِنْ شُرُورِهِمْ
اللَّهُمَّ أَنْتَ عَضُدِي ، وَأَنْتَ نَصِيرِي ، بِكَ أَجُولُ وَبِكَ أَصُولُ وَبِكَ أُقَاتِلُ
शत्रु या सत्ता वाले से सामना होने पर दुआ
अल्लाह हमारे लिए पर्याप्त है और वह सबसे अच्छा कार्यसाधक है।
ऐ अल्लाह, हम तुझे उनके सामने रखते हैं और उनकी बुराइयों से तेरी शरण माँगते हैं।
ऐ अल्लाह, तू मेरा सहारा है और तू मेरा सहायक है; तेरी सहायता से मैं चलता-फिरता हूँ, आक्रमण करता हूँ और युद्ध करता हूँ।
دُعَاءُ صَلَاةِ الِاسْتِخَارَةِ
قَالَ جَابِرُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا : كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُعَلِّمُنَا الِاسْتِخَارَةَ فِي الْأُمُورِ كُلِّهَا كَمَا يُعَلِّمُنَا السُّورَةَ مِنَ الْقُرْآنِ ، يَقُولُ : ( إِذَا هَمَّ أَحَدُكُمْ بِالْأَمْرِ فَلْيَرْكَعْ رَكْعَتَيْنِ مِنْ غَيْرِ الْفَرِيضَةِ ثُمَّ لْيَقُلْ : اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْتَخِيرُكَ بِعِلْمِكَ ، وَأَسْتَقْدِرُكَ بِقُدْرَتِكَ وَأَسْأَلُكَ مِنْ فَضْلِكَ الْعَظِيمِ فَإِنَّكَ تَقْدِرُ وَلَا أَقْدِرُ وَتَعْلَمُ وَلَا أَعْلَمُ وَأَنْتَ عَلَّامُ الْغُيُوبِ ، اللَّهُمَّ إِنْ كُنْتَ تَعْلَمُ أَنَّ هَذَا الْأَمْرَ ـ وَيُسَمِّي حَاجَتَهُ ـ خَيْرٌ لِي فِي دِينِي وَمَعَاشِي وَعَاقِبَةِ أَمْرِي ـ أَوْ قَالَ عَاجِلِهِ وَآجِلِهِ ـ فَاقْدُرْهُ لِي وَيَسِّرْهُ لِي ثُمَّ بَارِكْ لِي فِيهِ ، وَإِنْ كُنْتَ تَعْلَمُ أَنَّ هَذَا الْأَمْرَ شَرٌّ لِي فِي دِينِي وَمَعَاشِي وَعَاقِبَةِ أَمْرِي ـ أَوْ قَالَ عَاجِلِهِ وَآجِلِهِ ـ فَاصْرِفْهُ عَنِّي وَاصْرِفْنِي عَنْهُ وَاقْدُرْ لِي الْخَيْرَ حَيْثُ كَانَ ثُمَّ أَرْضِنِي بِهِ).
इस्तिख़ारा की नमाज़ की दुआ
जाबिर बिन अब्दुल्लाह रज़ियल्लाहु अन्हुमा ने कहा: अल्लाह के रसूल, उन पर दया और सलामती हो, हमें सभी मामलों में इस्तिख़ारा इस तरह सिखाते थे जैसे कुरआन की कोई सुरह सिखाते हों। वे कहते थे: जब तुममें से कोई किसी काम का इरादा करे तो फ़र्ज़ के अलावा दो रकअत पढ़े, फिर कहे: ऐ अल्लाह, मैं तेरे ज्ञान के द्वारा तुझसे भलाई चुनने को कहता हूँ, तेरी शक्ति के द्वारा शक्ति माँगता हूँ और तेरा महान अनुग्रह माँगता हूँ। तू सक्षम है और मैं सक्षम नहीं; तू जानता है और मैं नहीं जानता; तू परोक्ष का पूर्ण जानने वाला है। ऐ अल्लाह, यदि तू जानता है कि यह काम — और अपनी आवश्यकता का नाम ले — मेरे दीन, आजीविका और मेरे काम के परिणाम, या कहा उसके तत्काल और बाद के परिणाम में मेरे लिए भला है तो इसे मेरे लिए निर्धारित कर, मेरे लिए आसान कर और इसमें मेरे लिए बरकत दे। और यदि तू जानता है कि यह काम मेरे दीन, आजीविका और मेरे काम के परिणाम, या कहा उसके तत्काल और बाद के परिणाम में मेरे लिए बुरा है तो इसे मुझसे दूर कर, मुझे इससे दूर कर और जहाँ कहीं भलाई हो उसे मेरे लिए निर्धारित कर, फिर मुझे उससे संतुष्ट कर।
دُعَاءُ سُجُودِ التِّلَاوَةِ
سَجَدَ وَجْهِي لِلَّذِي خَلَقَهُ ،وَشَقَّ سَمْعَهُ وَبَصَرَهُ بِحَوْلِهِ وَقُوَّتِهِ ( فَتَبَارَكَ اللَّهُ أَحْسَنُ الْخَالِقِينَ )
तिलावत के सज्दे की दुआ
मेरे चेहरे ने उस हस्ती को सज्दा किया जिसने इसे पैदा किया और अपनी शक्ति और सामर्थ्य से इसके सुनने और देखने की शक्ति बनाई। सो अल्लाह, सबसे अच्छा पैदा करने वाला, बड़ी बरकत वाला है।
دُعَاءُ الِاسْتِفْتَاحِ
اللَّهُمَّ بَاعِدْ بَيْنِي وَبَيْنَ خَطَايَايَ كَمَا بَاعَدْتَ بَيْنَ الْمَشْرِقِ وَالْغَرْبِ ، اللَّهُمَّ نَقِّنِي مِنْ خَطَايَايَ كَمَا يُنَقَّى الثَّوْبُ الْأَبْيَضُ مِنَ الدَّنَسِ، اللَّهُمَّ اغْسِلْنِي مِنْ خَطَايَايَ بِالثَّلْجِ وَالْمَاءِ وَالْبَرَدِ.
سُبْحَانَكَ اللَّهُمَّ وَبِحَمْدِكَ وَتَبَارَكَ اسْمُكَ وَتَعَالَى جَدُّكَ وَلَا إِلَهَ غَيْرُكَ.
اللَّهُ أَكْبَرُ كَبِيرًا ، اللَّهُ أَكْبَرُ كَبِيرًا ، اللَّهُ أَكْبَرُ كَبِيرًا ، وَالْحَمْدُ لِلَّهِ كَثِيرًا ، وَالْحَمْدُ لِلَّهِ كَثِيرًا ، وَالْحَمْدُ لِلَّهِ كَثِيرًا ، وَسُبْحَانَ اللَّهِ بُكْرَةً وَأَصِيلًا(ثَلَاثًا) ـ "أَعُوذُ بِاللَّهِ مِنَ الشَّيْطَانِ مِنْ نَفْخِهِ وَنَفْثِهِ وَهَمْزِهِ ".
नमाज़ की शुरुआती दुआ
ऐ अल्लाह, मेरे और मेरे पापों के बीच उतनी दूरी कर दे जितनी पूर्व और पश्चिम के बीच की है। ऐ अल्लाह, मुझे मेरे पापों से ऐसे साफ़ कर जैसे सफ़ेद कपड़े को मैल से साफ़ किया जाता है। ऐ अल्लाह, मुझे मेरे पापों से बर्फ़, पानी और ओलों से धो।
ऐ अल्लाह, तू पवित्र है और सारी प्रशंसा तेरे लिए है; तेरा नाम बरकत वाला है, तेरी महिमा सर्वोच्च है और तेरे सिवा कोई इबादत के योग्य नहीं।
अल्लाह बहुत महान है, अल्लाह बहुत महान है, अल्लाह बहुत महान है। अल्लाह की बहुत प्रशंसा है, अल्लाह की बहुत प्रशंसा है, अल्लाह की बहुत प्रशंसा है। सुबह और शाम अल्लाह पवित्र है (तीन बार)। मैं शैतान से, उसकी फूँक, उसके बहकावे और उसके उकसावे से अल्लाह की शरण माँगता हूँ।
دُعَاءُ دُخُولِ السُّوقِ
لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ، لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ يُحْيِي وَيُمِيتُ وَهُوَ حَيٌّ لَا يَمُوتُ بِيَدِهِ الْخَيْرُ وَهُوَ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ (كَتَبَ اللَّهُ لَهُ أَلْفَ أَلْفِ حَسَنَةٍ وَمَحَا عَنْهُ أَلْفَ أَلْفِ سَيِّئَةٍ وَرَفَعَ لَهُ أَلْفَ أَلْفِ دَرَجَةٍ وَفِي رِوَايَةٍ: وَبَنَى لَهُ بَيْتًا فِي الْجَنَّةِ).
بِسْمِ اللَّهِ، اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ خَيْرَ هَذِهِ السُّوقِ، وَخَيْرَ مَا فِيهَا، وَأَعُوذُ بِكَ مِنْ شَرِّهَا وَشَرِّ مَا فِيهَا، اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ أَنْ أُصِيبَ بِهَا يَمِينًا فَاجِرَةً، أَوْ صَفْقَةً خَاسِرَةً.
बाज़ार में प्रवेश की दुआ
एक अल्लाह के सिवा कोई इबादत के योग्य नहीं; उसका कोई साझी नहीं। उसी का राज्य है और उसी के लिए सारी प्रशंसा है। वह जीवन देता और मृत्यु देता है, वह सदा जीवित है, नहीं मरता। भलाई उसके हाथ में है और वह हर चीज़ पर सक्षम है। (अल्लाह उसके लिए दस लाख नेकियाँ लिखता है, दस लाख बुराइयाँ मिटाता है और उसके दस लाख दर्जे ऊँचे करता है; एक रिवायत में है कि उसके लिए जन्नत में एक घर बनाता है।)
अल्लाह के नाम से। ऐ अल्लाह, मैं तुझसे इस बाज़ार की भलाई और इसमें जो भलाई है वह माँगता हूँ; इसकी बुराई और इसमें जो बुराई है उससे तेरी शरण माँगता हूँ। ऐ अल्लाह, मैं इससे तेरी शरण माँगता हूँ कि यहाँ झूठी क़सम खाऊँ या घाटे का सौदा करूँ।
عِنْدَ فِعْلِ الذَّنْبِ أَوِ ارْتِكَابِ الْمَعْصِيَةِ
كَمَا أَخْبَرَنَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ((مَا مِنْ عَبْدٍ يُذْنِبُ ذَنْبًا فَيَتَوَضَّأُ فَيُحْسِنُ الطُّهُورَ،ثُمَّ يَقُومُ فَيُصَلِّي رَكْعَتَيْنِ ، ثُمَّ يَسْتَغْفِرُ اللَّهَ لِذَلِكَ الذَّنْبِ إِلَّا غُفِرَ لَهُ )).
पाप या अवज्ञा करने पर
जैसा कि अल्लाह के रसूल, उन पर दया और सलामती हो, ने बताया: कोई बंदा पाप करे, फिर वुज़ू करे और अच्छी तरह पवित्रता प्राप्त करे, फिर खड़े होकर दो रकअत नमाज़ पढ़े और उस पाप के लिए अल्लाह से क्षमा माँगे, तो उसे क्षमा कर दिया जाता है।
الدُّعَاءُ عِنْدَ سَمَاعِ أَصْوَاتِ الْحَيَوَانَاتِ
الدُّعَاءُ عِنْدَ صِيَاحِ الدِّيكِ : (( اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ مِنْ فَضْلِكَ )). ((إِذَا سَمِعْتُمْ صِيَاحَ الدِّيكِ[مِنَ اللَّيْلِ]،فَاسْأَلُوا اللَّهَ مِنْ فَضْلِهِ فَإِنَّهَا رَأَتْ مَلَكًا وَإِذَا سَمِعْتُمْ نَهِيقَ الْحِمَارِ،فَتَعَوَّذُوا بِاللَّهِ مِنَ الشَّيْطَانِ فَإِنَّهَا رَأَتْ شَيْطَانًا)). مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ.
الدُّعَاءُ عِنْدَ صِيَاحِ الدِّيكِ وَنَهِيقِ الْحِمَارِ وَنُبَاحِ الْكِلَابِ: (( أَعُوذُ بِاللَّهِ مِنَ الشَّيْطَانِ الرَّجِيمِ )).
((إِذَا سَمِعْتُمْ نُبَاحَ الْكِلَابِ وَنَهِيقَ الْحَمِيرِ بِاللَّيْلِ فَتَعَوَّذُوا بِاللَّهِ فَإِنَّهُنَّ يَرَيْنَ مَا لَا تَرَوْنَ)). صَحِيحٌ(صَحِيحُ سُنَنِ أَبِي دَاوُدَ3/961)
जानवरों की आवाज़ सुनने पर दुआ
मुर्गे की बाँग सुनने पर: “ऐ अल्लाह, मैं तुझसे तेरे अनुग्रह की माँग करता हूँ।” “जब तुम रात में मुर्गे की बाँग सुनो तो अल्लाह से उसका अनुग्रह माँगो, क्योंकि उसने फ़रिश्ते को देखा है। और जब गधे के रेंकने की आवाज़ सुनो तो शैतान से अल्लाह की पनाह माँगो, क्योंकि उसने शैतान को देखा है।” इसे बुख़ारी और मुस्लिम ने रिवायत किया है।
मुर्गे की बाँग, गधे के रेंकने और कुत्तों के भौंकने पर: “मैं धिक्कारे हुए शैतान से अल्लाह की पनाह माँगता हूँ।”
“जब तुम रात में कुत्तों के भौंकने और गधों के रेंकने की आवाज़ सुनो तो अल्लाह की पनाह माँगो, क्योंकि वे वह देखते हैं जो तुम नहीं देखते।” सहीह (सहीह सुनन अबी दाऊद, 3/961)।
سَيِّدُ الِاسْتِغْفَارِ
اللَّهُمَّ أَنْتَ رَبِّي لَا إِلَهَ إِلَّا أَنْتَ ، خَلَقْتَنِي وَأَنَا عَبْدُكَ وَأَنَا عَلَى عَهْدِكَ وَوَعْدِكَ مَا اسْتَطَعْتُ أَعُوذُ بِكَ مِنْ شَرِّ مَا صَنَعْتُ، أَبُوءُ لَكَ بِنِعْمَتِكَ عَلَيَّ وَأَبُوءُ بِذَنْبِي ، فَاغْفِرْ لِي فَإِنَّهُ لَا يَغْفِرُ الذُّنُوبَ إِلَّا أَنْتَ.
عَنْ شَدَّادِ بْنِ أَوْسٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ عَنِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ ( سَيِّدُ الِاسْتِغْفَارِ أَنْ يَقُولَ الْعَبْدُ اللَّهُمَّ أَنْتَ رَبِّي لَا إِلَهَ إِلَّا أَنْتَ ، خَلَقْتَنِي وَأَنَا عَبْدُكَ وَأَنَا عَلَى عَهْدِكَ وَوَعْدِكَ مَا اسْتَطَعْتُ أَعُوذُ بِكَ مِنْ شَرِّ مَا صَنَعْتُ، أَبُوءُ لَكَ بِنِعْمَتِكَ عَلَيَّ وَأَبُوءُ بِذَنْبِي ، فَاغْفِرْ لِي فَإِنَّهُ لَا يَغْفِرُ الذُّنُوبَ إِلَّا أَنْتَ ) مَنْ قَالَهَا فِي النَّهَارِ مُوقِنًا بِهَا فَمَاتَ مِنْ يَوْمِهِ قَبْلَ أَنْ يُمْسِيَ فَهُوَ مِنْ أَهْلِ الْجَنَّةِ وَمَنْ قَالَهَا مِنَ اللَّيْلِ وَهُوَ مُوقِنٌ بِهَا فَمَاتَ قَبْلَ أَنْ يُصْبِحَ فَهُوَ مِنْ أَهْلِ الْجَنَّةِ . أَخْرَجَهُ الْبُخَارِيُّ.
क्षमा माँगने की सर्वोत्तम दुआ
ऐ अल्लाह, तू मेरा रब है, तेरे सिवा कोई इबादत के योग्य नहीं। तूने मुझे पैदा किया और मैं तेरा बंदा हूँ। मैं अपनी सामर्थ्य भर तेरे साथ अपने वचन और प्रतिज्ञा पर कायम हूँ। मैंने जो किया उसकी बुराई से तेरी शरण माँगता हूँ। मैं अपने ऊपर तेरी नेमत स्वीकार करता हूँ और अपना पाप स्वीकार करता हूँ, इसलिए मुझे क्षमा कर, क्योंकि तेरे सिवा पापों को कोई क्षमा नहीं करता।
शद्दाद बिन औस रज़ियल्लाहु अन्हु से नबी, उन पर अल्लाह की दया और सलामती हो, से वर्णित है कि आपने कहा: क्षमा माँगने की सर्वोत्तम दुआ यह है कि बंदा कहे: ऐ अल्लाह, तू मेरा रब है, तेरे सिवा कोई इबादत के योग्य नहीं। तूने मुझे पैदा किया और मैं तेरा बंदा हूँ। मैं अपनी सामर्थ्य भर तेरे साथ अपने वचन और प्रतिज्ञा पर कायम हूँ। मैंने जो किया उसकी बुराई से तेरी शरण माँगता हूँ। मैं अपने ऊपर तेरी नेमत स्वीकार करता हूँ और अपना पाप स्वीकार करता हूँ, इसलिए मुझे क्षमा कर, क्योंकि तेरे सिवा पापों को कोई क्षमा नहीं करता। जो इसे दिन में विश्वास के साथ कहे और उसी दिन शाम होने से पहले मृत्यु पा जाए, वह जन्नत वालों में है। और जो इसे रात में विश्वास के साथ कहे और सुबह होने से पहले मृत्यु पा जाए, वह जन्नत वालों में है। इसे बुख़ारी ने दर्ज किया है।
الدُّعَاءُ إِذَا أَحْسَسْتَ بِوَجَعٍ فِي جَسَدِكَ
ضَعْ يَدَكَ عَلَى الَّذِي تَأَلَّمَ مِنْ جَسَدِكَ وَقُلْ: بِسْمِ اللَّهِ ،ثَلَاثًا ،وَقُلْ سَبْعَ مَرَّاتٍ: أَعُوذُ بِاللَّهِ وَقُدْرَتِهِ مِنْ شَرِّ مَا أَجِدُ وَأُحَاذِرُ.
शरीर में दर्द महसूस होने पर दुआ
अपने शरीर के दर्द वाले स्थान पर हाथ रखकर तीन बार कहो: अल्लाह के नाम से। फिर सात बार कहो: मैं जो दर्द महसूस करता हूँ और जिससे डरता हूँ उसकी बुराई से अल्लाह और उसकी शक्ति की शरण माँगता हूँ।
مَا يَقُولُ وَيَفْعَلُ مَنْ أَذْنَبَ ذَنْبًا
مَا مِنْ عَبْدٍ يُذْنِبُ ذَنْبًا فَيُحْسِنُ الطُّهُورَ ثُمَّ يَقُومُ فَيُصَلِّي رَكْعَتَيْنِ ، ثُمَّ يَسْتَغْفِرُ اللَّهَ إِلَّا غُفِرَ لَهُ
पाप करने वाले को क्या कहना और करना चाहिए
जो भी बंदा पाप करे, फिर अच्छी तरह पवित्रता प्राप्त करे, दो रकअत नमाज़ पढ़े और फिर अल्लाह से क्षमा माँगे, उसे क्षमा कर दिया जाता है।
पढ़ने का समयपढ़ने के लिए तैयार
0 / 0

पूरे किए गए पाठ यहाँ दिखेंगे।

पढ़ना रुका है

व्याख्या और स्रोत

ज़िक्र साझा करें

WhatsApp Telegram Facebook X
साझा करने का पाठ

फिर से शुरू करें?

इससे इस श्रेणी की वर्तमान गिनती और सहेजा स्थान हट जाएगा। पूरा किए गए पाठ का इतिहास सहेजा रहेगा।

हदीस पुस्तकालय से

हदीस
Narrated `Urwa: When the wall fell on them (i.e. graves) during the caliphate of Al-Walid bin `Abdul Malik, the people started repairing it, and a foot appeared to them. The people got scared and thought that it was the foot of the Prophet. No one could be found who could tell them about it till I (`Urwa) said to them, "By Allah, this is not the foot of the Prophet (ﷺ) but it is the foot of `Umar."