शाम के अज़कार

لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ، لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ وَهُوَ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ.
अल्लाह के सिवा कोई उपास्य नहीं, वह अकेला है, उसका कोई साझी नहीं। राज्य और प्रशंसा उसी के लिए हैं और वह हर चीज़ पर समर्थ है।
كَانَتْ لَهُ عَدْلَ عَشْرِ رِقَابٍ، وَكُتِبَتْ لَهُ مِئَةُ حَسَنَةٍ، وَمُحِيَتْ عَنْهُ مِئَةُ سَيِّئَةٍ، وَكَانَتْ لَهُ حِرْزًا مِنَ الشَّيْطَانِ.
उसे दस दासों को आज़ाद करने के बराबर सवाब मिलता है, उसके लिए सौ नेकियाँ लिखी जाती हैं, उससे सौ बुराइयाँ मिटा दी जाती हैं और यह शैतान से उसकी रक्षा बनता है।

व्याख्या और स्रोत

الْحَمْدُ لِلَّهِ وَالصَّلَاةُ وَالسَّلَامُ عَلَى رَسُولِ اللَّهِ وَعَلَى آلِهِ وَصَحْبِهِ، أَمَّا بَعْدُ:
فَإِنَّ قَوْلَ: لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ ... قَدْ ثَبَتَ فِيهِ قَوْلُهُ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: مَنْ قَالَ إِذَا أَصْبَحَ: لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ وَهُوَ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ كَانَ لَهُ عَدْلُ رَقَبَةٍ مِنْ وَلَدِ إِسْمَاعِيلَ، وَكُتِبَ لَهُ عَشْرُ حَسَنَاتٍ وَحُطَّ عَنْهُ عَشْرُ سَيِّئَاتٍ، وَرُفِعَ لَهُ عَشْرُ دَرَجَاتٍ وَكَانَ فِي حِرْزٍ مِنَ الشَّيْطَانِ حَتَّى يُمْسِيَ، وَإِنْ قَالَهَا إِذَا أَمْسَى كَانَ لَهُ مِثْلُ ذَلِكَ حَتَّى يُصْبِحَ. رَوَاهُ أَبُو دَاوُدَ وَصَحَّحَهُ الْأَلْبَانِيُّ.

وَهَذَا الْحَدِيثُ لَمْ يُخَصِّصِ الذِّكْرَ الْمَذْكُورَ بِعَدَدٍ مُعَيَّنٍ وَلَكِنَّهُ ثَبَتَ التَّرْغِيبُ فِي الْإِتْيَانِ بِهَذَا الذِّكْرِ عَشْرَ مَرَّاتٍ بَعْدَ صَلَاةِ الْفَجْرِ وَالْمَغْرِبِ مُبَاشَرَةً، وَثَبَتَ التَّرْغِيبُ فِي الْإِتْيَانِ بِهِ عَشْرَ مَرَّاتٍ بَعْدَ صَلَاةِ الْفَجْرِ فَقَطْ، كَمَا ثَبَتَ التَّرْغِيبُ فِي الْإِتْيَانِ بِهِ مِائَةَ مَرَّةٍ فِي الْيَوْمِ غَيْرَ مُقَيَّدٍ بِوَقْتٍ، فَفِي الصَّحِيحَيْنِ مِنْ حَدِيثِ أَبِي هُرَيْرَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ: مَنْ قَالَ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ وَهُوَ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ فِي يَوْمٍ مِائَةَ مَرَّةٍ كَانَتْ لَهُ عَدْلَ عَشْرِ رِقَابٍ، وَكُتِبَتْ لَهُ مِائَةُ حَسَنَةٍ، وَمُحِيَتْ عَنْهُ مِائَةُ سَيِّئَةٍ، وَكَانَتْ لَهُ حِرْزًا مِنَ الشَّيْطَانِ يَوْمَهُ ذَلِكَ حَتَّى يُمْسِيَ، وَلَمْ يَأْتِ أَحَدٌ بِأَفْضَلَ مِمَّا جَاءَ بِهِ إِلَّا أَحَدٌ عَمِلَ أَكْثَرَ مِنْ ذَلِكَ.

وَفِي الْحَدِيثِ: مَنْ قَالَ : لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ وَهُوَ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ بَعْدَ مَا يُصَلِّي الْغَدَاةَ عَشْرَ مَرَّاتٍ كَتَبَ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ لَهُ عَشْرَ حَسَنَاتٍ وَمَحَا عَنْهُ عَشْرَ سَيِّئَاتٍ وَرَفَعَ لَهُ عَشْرَ دَرَجَاتٍ وَكُنَّ لَهُ بِعَدْلِ عِتْقِ رَقَبَتَيْنِ مِنْ وَلَدِ إِسْمَاعِيلَ، فَإِنْ قَالَهَا حِينَ يُمْسِي كَانَ لَهُ مِثْلُ ذَلِكَ وَكُنَّ لَهُ حِجَابًا مِنَ الشَّيْطَانِ حَتَّى يُصْبِحَ. أَخْرَجَهُ الْخَطِيبُ، وَصَحَّحَهُ الْأَلْبَانِيُّ فِي السِّلْسِلَةِ الصَّحِيحَةِ.

وَفِي الْحَدِيثِ: مَنْ قَالَ قَبْلَ أَنْ يَنْصَرِفَ وَيَثْنِيَ رِجْلَيْهِ مِنْ صَلَاةِ الْمَغْرِبِ وَالصُّبْحِ: لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ يُحْيِي وَيُمِيتُ وَهُوَ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ عَشْرَ مَرَّاتٍ كَتَبَ اللَّهُ لَهُ بِكُلِّ وَاحِدَةٍ عَشْرَ حَسَنَاتٍ وَمَحَا عَنْهُ عَشْرَ سَيِّئَاتٍ وَرَفَعَ لَهُ عَشْرَ دَرَجَاتٍ، وَكَانَتْ لَهُ حِرْزًا مِنْ كُلِّ مَكْرُوهٍ وَحِرْزًا مِنَ الشَّيْطَانِ الرَّجِيمِ، وَلَمْ يَحِلَّ لِذَنْبٍ أَنْ يُدْرِكَهُ إِلَّا الشِّرْكَ، وَكَانَ مِنْ أَفْضَلِ النَّاسِ عَمَلًا؛ إِلَّا رَجُلًا يَفْضُلُهُ بِقَوْلِهِ أَفْضَلَ مِمَّا قَالَ. رَوَاهُ أَحْمَدُ وَقَالَ الْهَيْثَمِيُّ وَالْمُنْذِرِيُّ: رِجَالُهُ رِجَالُ الصَّحِيحِ غَيْرَ شَهْرِ بْنِ حَوْشَبٍ. وَقَالَ الْأَلْبَانِيُّ: حَسَنٌ لِغَيْرِهِ.

وَقَدْ بَوَّبَ ابْنُ السُّنِّيِّ وَالْمُنْذِرِيُّ وَالْهَيْثَمِيُّ عَلَى الْإِتْيَانِ بِهَذَا الذِّكْرِ بَعْدَ الصَّلَاةِ وَذَكَرُوا هَذَا الْحَدِيثَ فِي ذَلِكَ. فَظَاهِرُ الْأَحَادِيثِ هُوَ حُصُولُ هَذَا الْفَضْلِ لِمَنْ عَمِلَ بِأَيِّ وَاحِدٍ مِنَ الْأَحَادِيثِ الْمَذْكُورَةِ، وَالْأَوْلَى هُوَ الْمُوَاظَبَةُ عَلَى إِكْمَالِ الْمِائَةِ، سَوَاءٌ فَرَّقَهَا أَوْ جَمَعَهَا، وَالْأَوْلَى أَنْ تَكُونَ أَوَّلَ النَّهَارِ مَعَ الْمُوَاظَبَةِ عَلَى الْعَشْرِ الَّتِي تُقَالُ بَعْدَ الْفَجْرِ وَالْمَغْرِبِ.

قَالَ النَّوَوِيُّ فِي شَرْحِهِ عَلَى قَوْلِهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: مَنْ قَالَ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ، وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ، لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ، وَهُوَ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ. فِي يَوْمٍ مِائَةَ مَرَّةٍ كَانَتْ لَهُ عَدْلَ عَشْرِ رِقَابٍ، وَكُتِبَتْ لَهُ مِائَةُ حَسَنَةٍ، وَمُحِيَتْ عَنْهُ مِائَةُ سَيِّئَةٍ، وَكَانَتْ لَهُ حِرْزًا مِنَ الشَّيْطَانِ يَوْمَهُ ذَلِكَ حَتَّى يُمْسِيَ، وَلَمْ يَأْتِ أَحَدٌ أَفْضَلَ مِمَّا جَاءَ بِهِ إِلَّا أَحَدٌ عَمِلَ أَكْثَرَ مِنْ ذَلِكَ، وَمَنْ قَالَ سُبْحَانَ اللَّهِ وَبِحَمْدِهِ فِي يَوْمٍ مِائَةَ مَرَّةٍ حُطَّتْ خَطَايَاهُ وَلَوْ كَانَتْ مِثْلَ زَبَدِ الْبَحْرِ.

قَالَ رَحِمَهُ اللَّهُ: وَظَاهِرُ إِطْلَاقِ الْحَدِيثِ أَنَّهُ يُحَصِّلُ هَذَا الْأَجْرَ الْمَذْكُورَ فِي هَذَا الْحَدِيثِ مَنْ قَالَ هَذَا التَّهْلِيلَ مِائَةَ مَرَّةٍ فِي يَوْمِهِ، سَوَاءٌ قَالَهُ مُتَوَالِيَةً أَوْ مُتَفَرِّقَةً، فِي مَجَالِسَ، أَوْ بَعْضَهَا أَوَّلَ النَّهَارِ، وَبَعْضَهَا آخِرَهُ، لَكِنَّ الْأَفْضَلَ أَنْ يَأْتِيَ بِهَا مُتَوَالِيَةً فِي أَوَّلِ النَّهَارِ لِيَكُونَ حِرْزًا لَهُ فِي جَمِيعِ نَهَارِهِ.
सारी प्रशंसा अल्लाह के लिए है और अल्लाह के रसूल, उनके परिवार तथा सहाबा पर शांति और आशीर्वाद हो। इसके बाद:
“अल्लाह के सिवा कोई उपास्य नहीं, वह अकेला है, उसका कोई साझी नहीं…” के विषय में नबी ﷺ का यह कथन प्रमाणित है: “जो सुबह कहे: अल्लाह के सिवा कोई उपास्य नहीं, वह अकेला है, उसका कोई साझी नहीं, राज्य और प्रशंसा उसी के लिए हैं और वह हर चीज़ पर समर्थ है — उसे इस्माईल की संतान में से एक दास को आज़ाद करने के बराबर सवाब मिलेगा, उसके लिए दस नेकियाँ लिखी जाएँगी, उससे दस बुराइयाँ मिटाई जाएँगी, उसके दस दर्जे ऊँचे किए जाएँगे और वह शाम तक शैतान से सुरक्षित रहेगा। यदि शाम को कहे तो सुबह तक उसे वही मिलेगा।” इसे अबू दाऊद ने रिवायत किया और अल-अल्बानी ने सहीह कहा।

इस हदीस में इस ज़िक्र की कोई विशेष संख्या निर्धारित नहीं की गई है। फिर भी फ़ज्र और मग़रिब की नमाज़ के तुरंत बाद इसे दस बार कहने की प्रेरणा मिलती है; केवल फ़ज्र के बाद दस बार कहने की प्रेरणा भी मिलती है। इसे दिन में बिना किसी निश्चित समय के सौ बार कहने की प्रेरणा भी प्रमाणित है। दोनों सहीह संग्रहों में अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से है कि नबी ﷺ ने फ़रमाया: “जो एक दिन में सौ बार कहे: अल्लाह के सिवा कोई उपास्य नहीं, वह अकेला है, उसका कोई साझी नहीं, राज्य और प्रशंसा उसी के लिए हैं और वह हर चीज़ पर समर्थ है — उसे दस दासों को आज़ाद करने के बराबर सवाब मिलेगा, सौ नेकियाँ लिखी जाएँगी और सौ बुराइयाँ मिटेंगी। वह दिन भर शाम तक शैतान से सुरक्षित रहेगा और कोई उससे बेहतर काम नहीं लाएगा, सिवाय उसके जिसने इससे अधिक किया हो।”

एक हदीस में है: “जो फ़ज्र पढ़ने के बाद दस बार कहे: अल्लाह के सिवा कोई उपास्य नहीं, वह अकेला है, उसका कोई साझी नहीं, राज्य और प्रशंसा उसी के लिए हैं और वह हर चीज़ पर समर्थ है — अल्लाह उसके लिए दस नेकियाँ लिखेगा, दस बुराइयाँ मिटाएगा, दस दर्जे ऊँचे करेगा और यह इस्माईल की संतान के दो दासों को आज़ाद करने के बराबर होगा। यदि शाम को कहे तो वही मिलेगा और सुबह तक शैतान से रक्षा होगी।” इसे ख़तीब ने रिवायत किया और अल-अल्बानी ने अस-सिलसिला अस-सहीहा में सहीह कहा।

एक हदीस में है: “जो मग़रिब और सुबह की नमाज़ से हटने और अपने पैर मोड़ने से पहले दस बार कहे: अल्लाह के सिवा कोई उपास्य नहीं, वह अकेला है, उसका कोई साझी नहीं, राज्य और प्रशंसा उसी के लिए हैं, वह जीवन देता और मृत्यु देता है और वह हर चीज़ पर समर्थ है — अल्लाह हर बार के बदले दस नेकियाँ लिखेगा, दस बुराइयाँ मिटाएगा, दस दर्जे ऊँचे करेगा। यह उसके लिए हर अप्रिय चीज़ और धिक्कारे हुए शैतान से रक्षा होगा; शिर्क के अतिरिक्त कोई गुनाह उसे नहीं पकड़ेगा, और वह कर्म में श्रेष्ठ लोगों में होगा, सिवाय उसके जो इससे बेहतर कहे।” इसे अहमद ने रिवायत किया। हैसमी और मुनज़िरी ने कहा कि शहर बिन हौशब को छोड़कर इसके रावी सहीह के रावी हैं। अल-अल्बानी ने इसे अन्य प्रमाणों से हसन कहा।

इब्न अस-सुन्नी, मुनज़िरी और हैसमी ने इसे नमाज़ के बाद पढ़ने के अध्याय में रखा और यह हदीस वहाँ उल्लेख की। हदीसों से स्पष्ट होता है कि उल्लिखित हदीसों में से किसी पर अमल करने वाले को यह फ़ज़ीलत मिलती है। सौ की संख्या पूरी करने की पाबंदी बेहतर है, चाहे उन्हें साथ कहे या अलग-अलग; बेहतर यह है कि दिन की शुरुआत में कहे और साथ ही फ़ज्र तथा मग़रिब के बाद दस बार कहने की पाबंदी भी करे।

नववी ने इस नबवी कथन की व्याख्या में उल्लेख किया: “जो एक दिन में सौ बार कहे: अल्लाह के सिवा कोई उपास्य नहीं, वह अकेला है, उसका कोई साझी नहीं, राज्य और प्रशंसा उसी के लिए हैं और वह हर चीज़ पर समर्थ है — उसे दस दासों के बराबर सवाब मिलेगा, उसके लिए सौ नेकियाँ लिखी जाएँगी, सौ बुराइयाँ मिटाई जाएँगी और वह शाम तक शैतान से सुरक्षित रहेगा; कोई उससे बेहतर नहीं होगा सिवाय उसके जिसने इससे अधिक किया। और जो दिन में सौ बार कहे: सुब्हानल्लाहि व बिहम्दिहि, उसके गुनाह मिटा दिए जाएँगे, चाहे समुद्र के झाग के बराबर हों।”

उन्होंने, अल्लाह उन पर रहमत करे, कहा: “हदीस के सामान्य शब्दों से प्रतीत होता है कि दिन में यह तहलील सौ बार कहने वाला उक्त सवाब प्राप्त करेगा, चाहे लगातार कहे या अलग-अलग बैठकों में, या कुछ दिन की शुरुआत में और कुछ अंत में। लेकिन बेहतर यह है कि दिन की शुरुआत में लगातार कहे ताकि पूरे दिन उसकी रक्षा हो।”