शाम के अज़कार

पढ़ने की सेटिंग
أَعُوذُ بِاللَّهِ مِنَ الشَّيْطَانِ الرَّجِيمِ
اللَّهُ لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ الْحَيُّ الْقَيُّومُ ۚ لَا تَأْخُذُهُ سِنَةٌ وَلَا نَوْمٌ ۚ لَّهُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ ۗ مَن ذَا الَّذِي يَشْفَعُ عِندَهُ إِلَّا بِإِذْنِهِ ۚ يَعْلَمُ مَا بَيْنَ أَيْدِيهِمْ وَمَا خَلْفَهُمْ ۖ وَلَا يُحِيطُونَ بِشَيْءٍ مِّنْ عِلْمِهِ إِلَّا بِمَا شَاءَ ۚ وَسِعَ كُرْسِيُّهُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ ۖ وَلَا يَئُودُهُ حِفْظُهُمَا ۚ وَهُوَ الْعَلِيُّ الْعَظِيمُ. [آيَةُ الْكُرْسِيِّ - الْبَقَرَةُ 255].
मैं धिक्कारे हुए शैतान से अल्लाह की पनाह माँगता हूँ
अल्लाह, उसके सिवा कोई उपास्य नहीं, वह जीवित और सबको संभालने वाला है। न उसे ऊँघ आती है और न नींद। जो कुछ आकाशों और धरती में है, सब उसी का है। कौन है जो उसकी अनुमति के बिना उसके पास सिफ़ारिश करे? वह जानता है जो उनके आगे है और जो उनके पीछे है, और वे उसके ज्ञान में से उतना ही जान सकते हैं जितना वह चाहे। उसकी कुर्सी आकाशों और धरती पर फैली हुई है और उनकी रक्षा उसे नहीं थकाती। वही सर्वोच्च, महान है। [आयतुल कुर्सी — अल-बक़रा 255]।
مَنْ قَالَهَا حِينَ يُصْبِحُ أُجِيرَ مِنَ الْجِنِّ حَتَّى يُمْسِيَ وَمَنْ قَالَهَا حِينَ يُمْسِي أُجِيرَ مِنَ الْجِنِّ حَتَّى يُصْبِحَ.
जो इसे सुबह पढ़ता है वह शाम तक जिन्नों से सुरक्षित रहता है और जो इसे शाम को पढ़ता है वह सुबह तक जिन्नों से सुरक्षित रहता है।
أَعُوذُ بِاللَّهِ مِنَ الشَّيْطَانِ الرَّجِيمِ
آمَنَ الرَّسُولُ بِمَا أُنزِلَ إِلَيْهِ مِن رَّبِّهِ وَالْمُؤْمِنُونَ ۚ كُلٌّ آمَنَ بِاللَّهِ وَمَلَائِكَتِهِ وَكُتُبِهِ وَرُسُلِهِ لَا نُفَرِّقُ بَيْنَ أَحَدٍ مِّن رُّسُلِهِ ۚ وَقَالُوا سَمِعْنَا وَأَطَعْنَا ۖ غُفْرَانَكَ رَبَّنَا وَإِلَيْكَ الْمَصِيرُ. لَا يُكَلِّفُ اللَّهُ نَفْسًا إِلَّا وُسْعَهَا ۚ لَهَا مَا كَسَبَتْ وَعَلَيْهَا مَا اكْتَسَبَتْ ۗ رَبَّنَا لَا تُؤَاخِذْنَا إِن نَّسِينَا أَوْ أَخْطَأْنَا ۚ رَبَّنَا وَلَا تَحْمِلْ عَلَيْنَا إِصْرًا كَمَا حَمَلْتَهُ عَلَى الَّذِينَ مِن قَبْلِنَا ۚ رَبَّنَا وَلَا تُحَمِّلْنَا مَا لَا طَاقَةَ لَنَا بِهِ ۖ وَاعْفُ عَنَّا وَاغْفِرْ لَنَا وَارْحَمْنَا ۚ أَنتَ مَوْلَانَا فَانصُرْنَا عَلَى الْقَوْمِ الْكَافِرِينَ. [الْبَقَرَةُ 285 - 286].
मैं धिक्कारे हुए शैतान से अल्लाह की शरण माँगता हूँ
रसूल उस पर ईमान लाए जो उनके रब की ओर से उन पर उतारा गया और ईमान वाले भी। सब अल्लाह, उसके फ़रिश्तों, उसकी किताबों और उसके रसूलों पर ईमान लाए। हम उसके रसूलों में किसी के बीच भेद नहीं करते। उन्होंने कहा: हमने सुना और आज्ञा मानी। हमारे रब, हम तेरी क्षमा चाहते हैं और तेरी ही ओर लौटना है। अल्लाह किसी प्राण पर उसकी सामर्थ्य से अधिक बोझ नहीं डालता। उसने जो भलाई कमाई वह उसके लिए है और जो बुराई कमाई उसका भार उसी पर है। हमारे रब, यदि हम भूल जाएँ या गलती करें तो हमें न पकड़। हमारे रब, हम पर वैसा बोझ न डाल जैसा तूने हमसे पहले लोगों पर डाला था। हमारे रब, हम पर वह बोझ न डाल जिसकी हमें शक्ति नहीं। हमें माफ़ कर, हमें क्षमा कर और हम पर दया कर। तू ही हमारा संरक्षक है, इसलिए इनकार करने वाले लोगों के विरुद्ध हमारी सहायता कर। [अल-बक़रा 2:285–286]
مَنْ قَرَأَ آيَتَيْنِ مِنْ آخِرِ سُورَةِ الْبَقَرَةِ فِي لَيْلَةٍ كَفَتَاهُ.
जो रात में सुरह अल-बक़रा की अंतिम दो आयतें पढ़े, वे उसके लिए पर्याप्त होंगी।
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَنِ الرَّحِيمِ
قُلْ هُوَ اللَّهُ أَحَدٌ، اللَّهُ الصَّمَدُ، لَمْ يَلِدْ وَلَمْ يُولَدْ، وَلَمْ يَكُن لَّهُ كُفُوًا أَحَدٌ.
अल्लाह के नाम से, जो अत्यंत कृपाशील और दयावान है
कह दो: वह अल्लाह एक है। अल्लाह सबकी आवश्यकता पूरी करने वाला और स्वयं निरपेक्ष है। न उसने किसी को जना और न वह जना गया, और कोई उसका समकक्ष नहीं है।
مَنْ قَالَهَا حِينَ يُصْبِحُ وَحِينَ يُمْسِي كَفَتْهُ مِنْ كُلِّ شَيْءٍ (الْإِخْلَاصِ وَالْمُعَوِّذَتَيْنِ).
जो इन्हें सुबह और शाम पढ़े, उसके लिए ये हर चीज़ से पर्याप्त हैं: सूरा अल-इख़लास और दोनों सुरक्षा की सूराएँ।
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَنِ الرَّحِيمِ
قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ الْفَلَقِ، مِن شَرِّ مَا خَلَقَ، وَمِن شَرِّ غَاسِقٍ إِذَا وَقَبَ، وَمِن شَرِّ النَّفَّاثَاتِ فِي الْعُقَدِ، وَمِن شَرِّ حَاسِدٍ إِذَا حَسَدَ.
अल्लाह के नाम से जो अत्यंत दयावान, परम दयालु है
कहो: मैं सुबह के रब की शरण माँगता हूँ, उसकी पैदा की हुई चीज़ों की बुराई से, अँधेरी रात की बुराई से जब वह छा जाए, गाँठों में फूँकने वालों की बुराई से और ईर्ष्या करने वाले की बुराई से जब वह ईर्ष्या करे।
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَنِ الرَّحِيمِ
قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ النَّاسِ، مَلِكِ النَّاسِ، إِلَٰهِ النَّاسِ، مِن شَرِّ الْوَسْوَاسِ الْخَنَّاسِ، الَّذِي يُوَسْوِسُ فِي صُدُورِ النَّاسِ، مِنَ الْجِنَّةِ وَالنَّاسِ.
अल्लाह के नाम से जो अत्यंत दयावान, परम दयालु है
कहो: मैं लोगों के रब, लोगों के बादशाह और लोगों के उपास्य की शरण माँगता हूँ, पीछे हट जाने वाले वसवसा डालने वाले की बुराई से, जो लोगों के दिलों में वसवसा डालता है, चाहे वह जिन्नों में से हो या मनुष्यों में से।
أَمْسَيْنَا وَأَمْسَى الْمُلْكُ لِلَّهِ وَالْحَمْدُ لِلَّهِ ، لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ، لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ، وَهُوَ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ ، رَبِّ أَسْأَلُكَ خَيْرَ مَا فِي هَذِهِ اللَّيْلَةِ وَخَيْرَ مَا بَعْدَهَا ، وَأَعُوذُ بِكَ مِنْ شَرِّ مَا فِي هَذِهِ اللَّيْلَةِ وَشَرِّ مَا بَعْدَهَا ، رَبِّ أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْكَسَلِ وَسُوءِ الْكِبَرِ ، رَبِّ أَعُوذُ بِكَ مِنْ عَذَابٍ فِي النَّارِ وَعَذَابٍ فِي الْقَبْرِ.
हमने शाम की और राज्य अल्लाह का है, सारी प्रशंसा अल्लाह के लिए है। अल्लाह के सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं, वह अकेला है, उसका कोई साझी नहीं। राज्य और प्रशंसा उसी के लिए हैं और वह हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है। ऐ मेरे पालनहार, मैं तुझसे इस रात और इसके बाद की भलाई माँगता हूँ और इस रात तथा इसके बाद की बुराई से तेरी शरण माँगता हूँ। ऐ मेरे पालनहार, मैं आलस्य और बुढ़ापे की कठिनाई से तेरी शरण माँगता हूँ। ऐ मेरे पालनहार, मैं आग की यातना और क़ब्र की यातना से तेरी शरण माँगता हूँ।
اللَّهُمَّ أَنْتَ رَبِّي لَا إِلَهَ إِلَّا أَنْتَ ، خَلَقْتَنِي وَأَنَا عَبْدُكَ ، وَأَنَا عَلَى عَهْدِكَ وَوَعْدِكَ مَا اسْتَطَعْتُ ، أَعُوذُ بِكَ مِنْ شَرِّ مَا صَنَعْتُ ، أَبُوءُ لَكَ بِنِعْمَتِكَ عَلَيَّ وَأَبُوءُ بِذَنْبِي فَاغْفِرْ لِي فَإِنَّهُ لَا يَغْفِرُ الذُّنُوبَ إِلَّا أَنْتَ .
ऐ अल्लाह! तू मेरा रब है, तेरे सिवा कोई सच्चा उपास्य नहीं। तूने मुझे पैदा किया और मैं तेरा बंदा हूँ। मैं अपनी क्षमता भर तेरे वचन और प्रतिज्ञा पर क़ायम हूँ। मैंने जो कुछ किया उसकी बुराई से तेरी पनाह माँगता हूँ। मैं अपने ऊपर तेरी नेमत स्वीकार करता हूँ और अपना गुनाह स्वीकार करता हूँ। मुझे क्षमा कर दे, क्योंकि तेरे सिवा गुनाहों को कोई क्षमा नहीं करता।
مَنْ قَالَهَا مُوقِنًا بِهَا حِينَ يُمْسِي وَمَاتَ مِنْ لَيْلَتِهِ دَخَلَ الْجَنَّةَ وَكَذَلِكَ حِينَ يُصْبِحُ.
जो इसे शाम को विश्वास के साथ कहे और उसी रात मर जाए, वह जन्नत में दाख़िल होगा; इसी प्रकार सुबह कहने पर भी।
رَضِيتُ بِاللَّهِ رَبًّا وَبِالْإِسْلَامِ دِينًا وَبِمُحَمَّدٍ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَبِيًّا.
मैं अल्लाह के रब होने, इस्लाम के धर्म होने और मुहम्मद (अल्लाह की रहमत और सलाम उन पर हो) के नबी होने पर राज़ी हूँ।
مَنْ قَالَهَا حِينَ يُصْبِحُ وَحِينَ يُمْسِي كَانَ حَقًّا عَلَى اللَّهِ أَنْ يُرْضِيَهُ يَوْمَ الْقِيَامَةِ.
जो इसे सुबह और शाम कहे, क़यामत के दिन अल्लाह उसे प्रसन्न करेगा।
اللَّهُمَّ إِنِّي أَمْسَيْتُ أُشْهِدُكَ ، وَأُشْهِدُ حَمَلَةَ عَرْشِكَ ، وَمَلَائِكَتَكَ ، وَجَمِيعَ خَلْقِكَ ، أَنَّكَ أَنْتَ اللَّهُ لَا إِلَهَ إِلَّا أَنْتَ وَحْدَكَ لَا شَرِيكَ لَكَ ، وَأَنَّ مُحَمَّدًا عَبْدُكَ وَرَسُولُكَ.
ऐ अल्लाह, मैंने शाम को तुझे, तेरे अर्श को उठाने वालों, तेरे फ़रिश्तों और तेरी समस्त सृष्टि को गवाह बनाया कि तू ही अल्लाह है; तेरे सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं, तू अकेला है, तेरा कोई साझी नहीं, और मुहम्मद तेरे बंदे और रसूल हैं।
مَنْ قَالَهَا أَعْتَقَهُ اللَّهُ مِنَ النَّارِ.
जो इसे कहता है, अल्लाह उसे आग से मुक्त करता है।
اللَّهُمَّ مَا أَمْسَى بِي مِنْ نِعْمَةٍ أَوْ بِأَحَدٍ مِنْ خَلْقِكَ ، فَمِنْكَ وَحْدَكَ لَا شَرِيكَ لَكَ ، فَلَكَ الْحَمْدُ وَلَكَ الشُّكْرُ.
ऐ अल्लाह, शाम के समय मुझे या तेरी किसी भी सृष्टि को जो नेमत मिली है, वह केवल तेरी ओर से है, तेरा कोई साझी नहीं। अतः सारी प्रशंसा और कृतज्ञता तेरे लिए है।
مَنْ قَالَهَا حِينَ يُمْسِي أَدَّى شُكْرَ يَوْمِهِ.
जो इसे शाम को कहता है, उसने अपने दिन का शुक्र अदा किया।
حَسْبِيَ اللَّهُ لَا إِلَهَ إِلَّا هُوَ عَلَيْهِ تَوَكَّلْتُ وَهُوَ رَبُّ الْعَرْشِ الْعَظِيمِ.
मेरे लिए अल्लाह काफ़ी है। उसके सिवा कोई सच्चा उपास्य नहीं। मैंने उसी पर भरोसा किया और वही महान अर्श का रब है।
مَنْ قَالَهَا كَفَاهُ اللَّهُ مَا أَهَمَّهُ مِنْ أَمْرِ الدُّنْيَا وَالْآخِرَةِ.
जो इसे कहे, दुनिया और आख़िरत की जिन बातों की उसे चिंता है उनके लिए अल्लाह उसे पर्याप्त होगा।
بِسْمِ اللَّهِ الَّذِي لَا يَضُرُّ مَعَ اسْمِهِ شَيْءٌ فِي الْأَرْضِ وَلَا فِي السَّمَاءِ وَهُوَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ.
अल्लाह के नाम से, जिसके नाम के साथ धरती और आकाश में कोई चीज़ नुकसान नहीं पहुँचा सकती। वही सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है।
لَمْ يَضُرَّهُ مِنَ اللَّهِ شَيْءٌ.
Nothing will harm him, by Allah’s protection.
اللَّهُمَّ بِكَ أَمْسَيْنَا وَبِكَ أَصْبَحْنَا، وَبِكَ نَحْيَا وَبِكَ نَمُوتُ وَإِلَيْكَ الْمَصِيرُ.
ऐ अल्लाह! तेरी ही मदद से हमने शाम की और तेरी ही मदद से सुबह की। तेरी ही मदद से हम जीते हैं और मरते हैं, और तेरी ही ओर लौटना है।
أَمْسَيْنَا عَلَى فِطْرَةِ الْإِسْلَامِ، وَعَلَى كَلِمَةِ الْإِخْلَاصِ، وَعَلَى دِينِ نَبِيِّنَا مُحَمَّدٍ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ، وَعَلَى مِلَّةِ أَبِينَا إِبْرَاهِيمَ حَنِيفًا مُسْلِمًا وَمَا كَانَ مِنَ الْمُشْرِكِينَ.
हमने इस्लाम की फ़ितरत, इख़लास के कलिमे, अपने नबी मुहम्मद (अल्लाह की रहमत और सलाम उन पर हो) के धर्म और अपने पिता इब्राहीम के मार्ग पर शाम की। वे एकनिष्ठ मुस्लिम थे और बहुदेववादियों में से न थे।
سُبْحَانَ اللَّهِ وَبِحَمْدِهِ عَدَدَ خَلْقِهِ ، وَرِضَا نَفْسِهِ ، وَزِنَةَ عَرْشِهِ ، وَمِدَادَ كَلِمَاتِهِ.
अल्लाह अपनी प्रशंसा के साथ पवित्र है: उसकी सृष्टि की संख्या के बराबर, उसकी प्रसन्नता के बराबर, उसके अर्श के वज़न के बराबर और उसके शब्दों की स्याही के बराबर।
اللَّهُمَّ عَافِنِي فِي بَدَنِي ، اللَّهُمَّ عَافِنِي فِي سَمْعِي ، اللَّهُمَّ عَافِنِي فِي بَصَرِي ، لَا إِلَهَ إِلَّا أَنْتَ.
ऐ अल्लाह! मेरे शरीर को स्वास्थ्य दे। ऐ अल्लाह! मेरी सुनने की शक्ति को स्वास्थ्य दे। ऐ अल्लाह! मेरी देखने की शक्ति को स्वास्थ्य दे। तेरे सिवा कोई सच्चा उपास्य नहीं।
اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْكُفْرِ ، وَالْفَقْرِ ، وَأَعُوذُ بِكَ مِنْ عَذَابِ الْقَبْرِ ، لَا إِلَهَ إِلَّا أَنْتَ.
ऐ अल्लाह! मैं कुफ़्र और निर्धनता से तेरी पनाह माँगता हूँ और क़ब्र की यातना से तेरी पनाह माँगता हूँ। तेरे सिवा कोई सच्चा उपास्य नहीं।
اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ الْعَفْوَ وَالْعَافِيَةَ فِي الدُّنْيَا وَالْآخِرَةِ ، اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ الْعَفْوَ وَالْعَافِيَةَ فِي دِينِي وَدُنْيَايَ وَأَهْلِي وَمَالِي ، اللَّهُمَّ اسْتُرْ عَوْرَاتِي وَآمِنْ رَوْعَاتِي ، اللَّهُمَّ احْفَظْنِي مِنْ بَيْنِ يَدَيَّ وَمِنْ خَلْفِي وَعَنْ يَمِينِي وَعَنْ شِمَالِي ، وَمِنْ فَوْقِي ، وَأَعُوذُ بِعَظَمَتِكَ أَنْ أُغْتَالَ مِنْ تَحْتِي.
ऐ अल्लाह, मैं तुझसे दुनिया और आख़िरत में क्षमा और कल्याण माँगता हूँ। ऐ अल्लाह, मैं तुझसे अपने धर्म, संसार, परिवार और धन में क्षमा और कल्याण माँगता हूँ। ऐ अल्लाह, मेरे दोषों को ढँक दे और मेरे भय को शांति दे। ऐ अल्लाह, मेरे आगे, पीछे, दाएँ, बाएँ और ऊपर से मेरी रक्षा कर। मैं तेरी महानता की शरण माँगता हूँ कि मुझे नीचे से अचानक नष्ट न किया जाए।
يَا حَيُّ يَا قَيُّومُ بِرَحْمَتِكَ أَسْتَغِيثُ أَصْلِحْ لِي شَأْنِي كُلَّهُ وَلَا تَكِلْنِي إِلَى نَفْسِي طَرْفَةَ عَيْنٍ.
ऐ सदैव जीवित रहने वाले, ऐ सबको थामने और सँभालने वाले! मैं तेरी दया से सहायता चाहता हूँ। मेरे सारे काम ठीक कर दे और मुझे पलक झपकने भर के लिए भी मेरे अपने हवाले न कर।
أَمْسَيْنَا وَأَمْسَى الْمُلْكُ لِلَّهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ، اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ خَيْرَ هَذِهِ اللَّيْلَةِ فَتْحَهَا وَنَصْرَهَا، وَنُورَهَا وَبَرَكَتَهَا، وَهُدَاهَا، وَأَعُوذُ بِكَ مِنْ شَرِّ مَا فِيهَا وَشَرِّ مَا بَعْدَهَا.
हमने शाम की और राज्य समस्त संसारों के पालनहार अल्लाह का है। ऐ अल्लाह, मैं तुझसे इस रात की भलाई, इसकी शुरुआत, सहायता, प्रकाश, बरकत और मार्गदर्शन माँगता हूँ और इसकी बुराई तथा इसके बाद की बुराई से तेरी शरण माँगता हूँ।
اللَّهُمَّ عَالِمَ الْغَيْبِ وَالشَّهَادَةِ فَاطِرَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ رَبَّ كُلِّ شَيْءٍ وَمَلِيكَهُ ، أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا أَنْتَ ، أَعُوذُ بِكَ مِنْ شَرِّ نَفْسِي وَمِنْ شَرِّ الشَّيْطَانِ وَشِرْكِهِ ، وَأَنْ أَقْتَرِفَ عَلَى نَفْسِي سُوءًا أَوْ أَجُرَّهُ إِلَى مُسْلِمٍ.
ऐ अल्लाह, छिपे और प्रकट को जानने वाले, आकाशों और धरती के रचयिता, हर चीज़ के पालनहार और स्वामी, मैं गवाही देता हूँ कि तेरे सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं। मैं अपने मन की बुराई, शैतान की बुराई और उसके शिर्क से, तथा स्वयं अपने ऊपर कोई बुराई करने या उसे किसी मुसलमान तक पहुँचाने से तेरी शरण माँगता हूँ।
أَعُوذُ بِكَلِمَاتِ اللَّهِ التَّامَّاتِ مِنْ شَرِّ مَا خَلَقَ.
मैं अल्लाह के संपूर्ण वचनों की पनाह लेता हूँ, उसकी रची हुई चीज़ों की बुराई से।
اللَّهُمَّ إِنَّا نَعُوذُ بِكَ مِنْ أَنْ نُشْرِكَ بِكَ شَيْئًا نَعْلَمُهُ ، وَنَسْتَغْفِرُكَ لِمَا لَا نَعْلَمُهُ.
ऐ अल्लाह! हम तेरी पनाह माँगते हैं कि जानते हुए किसी चीज़ को तेरा साझी ठहराएँ, और जो हम नहीं जानते उसके लिए तुझसे क्षमा माँगते हैं।
اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْهَمِّ وَالْحَزَنِ، وَأَعُوذُ بِكَ مِنَ الْعَجْزِ وَالْكَسَلِ، وَأَعُوذُ بِكَ مِنَ الْجُبْنِ وَالْبُخْلِ، وَأَعُوذُ بِكَ مِنْ غَلَبَةِ الدَّيْنِ، وَقَهْرِ الرِّجَالِ.
ऐ अल्लाह! मैं चिंता और दुख से तेरी पनाह माँगता हूँ, बेबसी और आलस्य से तेरी पनाह माँगता हूँ, कायरता और कंजूसी से तेरी पनाह माँगता हूँ, और क़र्ज़ के बोझ तथा लोगों के दबाव से तेरी पनाह माँगता हूँ।
أَسْتَغْفِرُ اللَّهَ الْعَظِيمَ الَّذِي لَا إِلَهَ إِلَّا هُوَ، الْحَيَّ الْقَيُّومَ، وَأَتُوبُ إِلَيْهِ.
मैं महान अल्लाह से क्षमा माँगता हूँ, जिसके सिवा कोई सच्चा उपास्य नहीं, जो सदैव जीवित है और सबको थामने वाला है, और मैं उसी की ओर तौबा करता हूँ।
يَا رَبِّ , لَكَ الْحَمْدُ كَمَا يَنْبَغِي لِجَلَالِ وَجْهِكَ , وَلِعَظِيمِ سُلْطَانِكَ.
ऐ मेरे रब! सारी प्रशंसा तेरे लिए है, जैसी तेरे चेहरे की महानता और तेरे बड़े साम्राज्य के योग्य है।
اللَّهُمَّ أَنْتَ رَبِّي لَا إِلَهَ إِلَّا أَنْتَ ، عَلَيْكَ تَوَكَّلْتُ ، وَأَنْتَ رَبُّ الْعَرْشِ الْعَظِيمِ , مَا شَاءَ اللَّهُ كَانَ ، وَمَا لَمْ يَشَأْ لَمْ يَكُنْ ، وَلَا حَوْلَ وَلَا قُوَّةَ إِلَّا بِاللَّهِ الْعَلِيِّ الْعَظِيمِ , أَعْلَمُ أَنَّ اللَّهَ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ ، وَأَنَّ اللَّهَ قَدْ أَحَاطَ بِكُلِّ شَيْءٍ عِلْمًا , اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنْ شَرِّ نَفْسِي ، وَمِنْ شَرِّ كُلِّ دَابَّةٍ أَنْتَ آخِذٌ بِنَاصِيَتِهَا ، إِنَّ رَبِّي عَلَى صِرَاطٍ مُسْتَقِيمٍ.
ऐ अल्लाह, तू मेरा पालनहार है, तेरे सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं। मैंने तुझ पर भरोसा किया और तू महान अर्श का पालनहार है। जो अल्लाह चाहे वह होता है और जो वह न चाहे वह नहीं होता। उच्च और महान अल्लाह की सहायता के बिना न कोई शक्ति है और न कोई सामर्थ्य। मैं जानता हूँ कि अल्लाह हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है और अल्लाह ने अपने ज्ञान से हर चीज़ को घेर रखा है। ऐ अल्लाह, मैं अपने मन की बुराई और हर उस प्राणी की बुराई से तेरी शरण माँगता हूँ जिसकी चोटी तेरे अधिकार में है। निश्चय ही मेरा पालनहार सीधे मार्ग पर है।
ذِكْرٌ طَيِّبٌ.
अच्छा ज़िक्र।
سُبْحَانَ اللَّهِ وَبِحَمْدِهِ.
अल्लाह पवित्र है और उसी की प्रशंसा है।
حُطَّتْ خَطَايَاهُ وَإِنْ كَانَتْ مِثْلَ زَبَدِ الْبَحْرِ. لَمْ يَأْتِ أَحَدٌ يَوْمَ الْقِيَامَةِ بِأَفْضَلَ مِمَّا جَاءَ بِهِ إِلَّا أَحَدٌ قَالَ مِثْلَ مَا قَالَ أَوْ زَادَ عَلَيْهِ.
उसकी ग़लतियाँ मिटा दी जाती हैं, भले ही वे समुद्र के झाग के बराबर हों। क़ियामत के दिन उससे बेहतर अमल कोई नहीं लाएगा, सिवाय उसके जिसने उतना ही या उससे अधिक कहा हो।
اللَّهُمَّ صَلِّ وَسَلِّمْ وَبَارِكْ عَلَى نَبِيِّنَا مُحَمَّدٍ.
ऐ अल्लाह, हमारे नबी मुहम्मद पर सलावत, सलाम और बरकत नाज़िल फ़रमा।
مَنْ صَلَّى عَلَيَّ حِينَ يُصْبِحُ وَحِينَ يُمْسِي أَدْرَكَتْهُ شَفَاعَتِي يَوْمَ الْقِيَامَةِ.
जो व्यक्ति सुबह और शाम मुझ पर सलावत भेजता है, उसे क़ियामत के दिन मेरी शफ़ाअत प्राप्त होगी।
لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ، لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ وَهُوَ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ.
अल्लाह के सिवा कोई उपास्य नहीं, वह अकेला है, उसका कोई साझी नहीं। राज्य और प्रशंसा उसी के लिए हैं और वह हर चीज़ पर समर्थ है।
كَانَتْ لَهُ عَدْلَ عَشْرِ رِقَابٍ، وَكُتِبَتْ لَهُ مِئَةُ حَسَنَةٍ، وَمُحِيَتْ عَنْهُ مِئَةُ سَيِّئَةٍ، وَكَانَتْ لَهُ حِرْزًا مِنَ الشَّيْطَانِ.
उसे दस दासों को आज़ाद करने के बराबर सवाब मिलता है, उसके लिए सौ नेकियाँ लिखी जाती हैं, उससे सौ बुराइयाँ मिटा दी जाती हैं और यह शैतान से उसकी रक्षा बनता है।
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हदीस पुस्तकालय से

हदीस
It was narrated from Ibn 'Umar that the Messenger of Allah (ﷺ) said: "Sheep are among the animals of Paradise."'
It was narrated that Abu Hurairah said: "The Messenger of Allah [SAW] said: 'Allah, the Mighty and Sublime, has guaranteed to the one who goes out in His cause, 'and he does not go out for any other purpose except Jihad in My cause and faith in Me, believing in My Messengers, but he is guaranteed that I will admit him to Paradise or I will send him back to his dwelling from which he set out, having acquired whatever he acquired of reward or spoils of war.'"