नमाज़ के अज़कार

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أَدْعِيَةُ اسْتِفْتَاحِ الصَّلَاةِ

اللَّهُمَّ بَاعِدْ بَيْنِي وَبَيْنَ خَطَايَايَ كَمَا بَاعَدْتَ بَيْنَ الْمَشْرِقِ وَالْمَغْرِبِ، اللَّهُمَّ نَقِّنِي مِنْ خَطَايَايَ كَمَا يُنَقَّى الثَّوْبُ الْأَبْيَضُ مِنَ الدَّنَسِ، اللَّهُمَّ اغْسِلْنِي مِنْ خَطَايَايَ، بِالثَّلْجِ وَالْمَاءِ وَالْبَرَدِ.

سُبْحَانَكَ اللَّهُمَّ وَبِحَمْدِكَ، وَتَبَارَكَ اسْمُكَ، وَتَعَالَى جَدُّكَ، وَلَا إِلَهَ غَيْرُكَ.

الْحَمْدُ لِلَّهِ حَمْداً كَثِيراً طَيِّباً مُبَارَكاً فِيهِ.

اللَّهُ أَكْبَرُ كَبِيرًا، وَالْحَمْدُ لِلَّهِ كَثِيرًا، وَسُبْحَانَ اللَّهِ بُكْرَةً وَأَصِيلًا. أَعُوذُ بِاللَّهِ مِنَ الشَّيْطَانِ: مِنْ نَفْخِهِ، وَنَفْثِهِ، وَهَمْزِهِ.

اللَّهُمَّ رَبَّ جَبْرَائِيلَ، وَمِيكَائِيلَ، وَإِسْرَافِيلَ، فَاطِرَ السَّمَوَاتِ وَالْأَرْضِ، عَالِمَ الْغَيْبِ وَالشَّهَادَةِ أَنْتَ تَحْكُمُ بَيْنَ عِبَادِكَ فِيمَا كَانُوا فِيهِ يَخْتَلِفُونَ، اِهْدِنِي لِمَا اخْتُلِفَ فِيهِ مِنَ الْحَقِّ بِإِذْنِكَ إِنَّكَ تَهْدِي مَنْ تَشَاءُ إِلَى صِرَاطٍ مُّسْتَقِيمٍ.

وَجَّهْتُ وَجْهِيَ لِلَّذِي فَطَرَ السَّمَوَاتِ وَالْأَرْضَ حَنِيفًا وَّمَا أَنَا مِنَ الْمُشْرِكِينَ، إِنَّ صَلَاتِي، وَنُسُكِي، وَمَحْيَايَ، وَمَمَاتِي لِلَّهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ، لَا شَرِيكَ لَهُ وَبِذَلِكَ أُمِرْتُ وَأَنَا مِنَ الْمُسْلِمِينَ، اللَّهُمَّ أَنْتَ الْمَلِكُ لَا إِلَهَ إِلَّا أَنْتَ، أَنْتَ رَبِّي وَأَنَا عَبْدُكَ، ظَلَمْتُ نَفْسِي وَاعْتَرَفْتُ بِذَنْبِي فَاغْفِرْ لِي ذُنُوبِي جَمِيعًا إِنَّهُ لَا يَغْفِرُ الذُّنُوبَ إِلَّا أَنْتَ. وَاهْدِنِي لِأَحْسَنِ الْأَخْلَاقِ لَا يَهْدِي لِأَحْسَنِهَا إِلَّا أَنْتَ، وَاصْرِفْ عَنِّي سَيِّئَهَا، لَا يَصْرِفُ عَنِّي سَيِّئَهَا إِلَّا أَنْتَ، لَبَّيْكَ وَسَعْدَيْكَ، وَالْخَيْرُ كُلُّهُ بِيَدَيْكَ، وَالشَّرُّ لَيْسَ إِلَيْكَ، أَنَا بِكَ وَإِلَيْكَ، تَبَارَكْتَ وَتَعَالَيْتَ، أَسْتَغْفِرُكَ وَأَتُوبُ إِلَيْكَ.

नमाज़ शुरू करने की दुआएँ

ऐ अल्लाह, मेरे और मेरे पापों के बीच उतनी दूरी कर दे जितनी पूर्व और पश्चिम के बीच की है। ऐ अल्लाह, मुझे मेरे पापों से ऐसे साफ़ कर जैसे सफ़ेद कपड़े को मैल से साफ़ किया जाता है। ऐ अल्लाह, मुझे मेरे पापों से बर्फ़, पानी और ओलों से धो।

तू पवित्र है, ऐ अल्लाह, और सारी प्रशंसा तेरे लिए है। तेरा नाम बरकत वाला है, तेरी महिमा सर्वोच्च है और तेरे सिवा कोई इबादत के योग्य नहीं।

अल्लाह की बहुत प्रशंसा है, पवित्र और बरकत वाली प्रशंसा।

अल्लाह बहुत महान है, अल्लाह की बहुत प्रशंसा है और सुबह तथा शाम अल्लाह पवित्र है। मैं शैतान से, उसकी फूँक, उसके बहकावे और उसके उकसावे से अल्लाह की शरण माँगता हूँ।

ऐ अल्लाह, जिब्रील, मीकाईल और इस्राफ़ील के रब, आकाशों और धरती के पैदा करने वाले, गुप्त और प्रत्यक्ष के जानने वाले, तू अपने बंदों के बीच उनके मतभेदों का फैसला करता है। अपने आदेश से मुझे उस सत्य का मार्ग दिखा जिसमें मतभेद किया गया है। निश्चय ही तू जिसे चाहता है सीधे मार्ग की ओर ले जाता है।

मैंने अपना चेहरा एकनिष्ठ होकर उसकी ओर किया जिसने आकाशों और धरती को पैदा किया और मैं बहुदेववादियों में से नहीं हूँ। निश्चय ही मेरी नमाज़, मेरी क़ुर्बानी, मेरा जीवन और मेरी मृत्यु संसारों के रब अल्लाह के लिए हैं। उसका कोई साझी नहीं; मुझे यही आदेश दिया गया और मैं मुसलमानों में से हूँ। ऐ अल्लाह, तू बादशाह है, तेरे सिवा कोई इबादत के योग्य नहीं। तू मेरा रब है और मैं तेरा बंदा हूँ। मैंने अपने ऊपर अत्याचार किया और अपना पाप स्वीकार किया, इसलिए मेरे सारे पाप क्षमा कर; तेरे सिवा पापों को कोई क्षमा नहीं करता। मुझे सबसे अच्छे आचरण का मार्ग दिखा, उसके सबसे अच्छे रूप की ओर तेरे सिवा कोई मार्ग नहीं दिखाता। मेरे बुरे आचरण को दूर कर, उसे तेरे सिवा कोई दूर नहीं करता। मैं हाज़िर हूँ और तेरी प्रसन्नता चाहता हूँ। सारी भलाई तेरे हाथों में है और बुराई तेरी ओर नहीं है। मैं तेरे सहारे और तेरी ओर हूँ। तू बरकत वाला और सर्वोच्च है। मैं तुझसे क्षमा माँगता हूँ और तेरी ओर तौबा करता हूँ।

أَدْعِيَةُ الرُّكُوعِ

سُبْحَانَ رَبِّيَ الْعَظِيمِ. ثَلَاثَ مَرَّاتٍ أَوْ أَكْثَرَ.

سُبْحَانَ رَبِّيَ الْعَظِيمِ وَبِحَمْدِهِ. ثَلَاثَ مَرَّاتٍ.

سُبْحَانَكَ اللَّهُمَّ رَبَّنَا وَبِحَمْدِكَ، اللَّهُمَّ اغْفِرْ لِي.

سُبُّوحٌ، قُدُّوسٌ، رَبُّ الْمَلَائِكَةِ وَالرُّوحِ.

سُبْحَانَ ذِي الْجَبَرُوتِ، وَالْمَلَكُوتِ، وَالْكِبْرِيَاءِ، وَالْعَظَمَةِ.

اللَّهُمَّ لَكَ رَكَعْتُ، وَبِكَ آمَنْتُ، وَلَكَ أَسْلَمْتُ، خَشَعَ لَكَ سَمْعِي وَبَصَرِي، وَمُخِّي وَعَظْمِي وَعَصَبِي.

रुकू की दुआएँ

पवित्र है मेरा महान रब। तीन बार या अधिक।

पवित्र है मेरा महान रब अपनी प्रशंसा के साथ। तीन बार।

तू पवित्र है, ऐ अल्लाह हमारे रब, और सारी प्रशंसा तेरे लिए है। ऐ अल्लाह, मुझे क्षमा कर।

अत्यंत पवित्र, परम पवित्र, फ़रिश्तों और रूह का रब।

पवित्र है सर्वशक्ति, राज्य, बड़ाई और महानता वाला।

ऐ अल्लाह, तेरे लिए मैंने रुकू किया, तुझ पर ईमान लाया और तेरे सामने समर्पण किया। मेरा सुनना, देखना, मस्तिष्क, हड्डियाँ और नसें तेरे सामने विनम्र हैं।

أَدْعِيَةُ الرَّفْعِ مِنَ الرُّكُوعِ

سَمِعَ اللَّهُ لِمَنْ حَمِدَهُ.

رَبَّنَا وَلَكَ الْحَمْدُ، حَمْدًا كَثِيرًا طَيِّبًا مُبَارَكًا فِيهِ.

اللَّهُمَّ لَكَ رَكَعْتُ، وَبِكَ آمَنْتُ، وَلَكَ أَسْلَمْتُ، خَشَعَ لَكَ سَمْعِي، و بَصَرِي، وَمُخِّي، وَعَظْمِي، وَعَصَبِي، وَمَا اسْتَقَلَّتْ بِهِ قَدَمِي لِلَّهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ.

اللَّهُمَّ رَبَّنَا لَكَ الْحَمْدُ مِلْءَ السَّمَاوَاتِ وَمِلْءَ الْأَرْضِ، وَمَا بَيْنَهُمَا، وَمِلْءَ مَا شِئْتَ مِنْ شَيْءٍ بَعْدُ، أَهْلَ الثَّنَاءِ وَالْمَجْدِ، أَحَقُّ مَا قَالَ الْعَبْدُ، وَكُلُّنَا لَكَ عَبْدٌ، اللَّهُمَّ لَا مَانِعَ لِمَا أَعْطَيْتَ، وَلَا مُعْطِيَ لِمَا مَنَعْتَ، وَلَا يَنْفَعُ ذَا الْجَدِّ مِنْكَ الْجَدُّ.

اللَّهُمَّ لَكَ الْحَمْدُ مِلْءَ السَّمَاءِ، وَمِلْءَ الْأَرْضِ، وَمِلْءَ مَا شِئْتَ مِنْ شَيْءٍ بَعْدُ، اللَّهُمَّ طَهِّرْنِي بِالثَّلْجِ وَالْبَرَدِ، وَالْمَاءِ الْبَارِدِ، اللَّهُمَّ طَهِّرْنِي مِنَ الذُّنُوبِ وَالْخَطَايَا، كَمَا يُنَقَّى الثَّوْبُ الْأَبْيَضُ مِنَ الْوَسَخِ.

रुकू से उठते समय की दुआएँ

अल्लाह उसकी सुनता है जो उसकी प्रशंसा करता है।

ऐ हमारे रब, सारी प्रशंसा तेरे लिए है, बहुत-सी, अच्छी और बरकत वाली प्रशंसा।

ऐ अल्लाह, मैंने तेरे लिए रुकू किया, तुझ पर ईमान लाया और तेरे आगे समर्पण किया। मेरी सुनने और देखने की शक्ति, मेरा मस्तिष्क, मेरी हड्डियाँ, मेरी नसें और जो कुछ मेरे पैर उठाए हुए हैं, सब तेरे लिए, सारे संसारों के रब अल्लाह के लिए विनम्र हैं।

ऐ अल्लाह, हमारे रब! तेरे लिए ऐसी प्रशंसा है जो आकाशों, धरती, उनके बीच की चीज़ों और उनके बाद जो कुछ तू चाहे उसे भर दे। तू प्रशंसा और महानता का अधिकारी है। बंदे की सबसे सच्ची बात यह है – और हम सब तेरे बंदे हैं –: ऐ अल्लाह, जो तू दे उसे कोई रोकने वाला नहीं और जो तू रोक ले उसे कोई देने वाला नहीं। तेरे सामने धनवान को उसका धन लाभ नहीं देता।

ऐ अल्लाह, तेरे लिए ऐसी प्रशंसा है जो आकाश, धरती और उनके बाद जो कुछ तू चाहे उसे भर दे। ऐ अल्लाह, मुझे बर्फ़, ओलों और ठंडे पानी से पवित्र कर। ऐ अल्लाह, मुझे पापों और भूलों से ऐसे साफ़ कर जैसे सफ़ेद कपड़ा मैल से साफ़ किया जाता है।

أَدْعِيَةُ السُّجُودِ

سُبْحَانَ رَبِّيَ الْأَعْلَى. ثَلَاثَ مَرَّاتٍ أَوْ أَكْثَرَ.

سُبْحَانَ رَبِّيَ الْأَعْلَى وَبِحَمْدِهِ. ثَلَاثَ مَرَّاتٍ.

سُبُّوحٌ قُدُّوسٌ رَبُّ الْمَلَائِكَةِ وَالرُّوحِ.

سُبْحَانَكَ اللَّهُمَّ رَبَّنَا وَبِحَمْدِكَ، اللَّهُمَّ اغْفِرْ لِي.

سُبْحَانَ ذِي الْجَبْرُوتِ وَالْمَلَكُوتِ وَالْكِبْرِيَاءِ وَالْعَظَمَةِ.

اللَّهُمَّ اغْفِرْ لِي ذَنْبِي كُلَّهُ دِقَّهُ وَجِلَّهُ، وَأَوَّلَهُ وَآخِرَهُ، وَعَلَانِيَتَهُ وَسِرَّهُ.

اللَّهُمَّ لَكَ سَجَدْتُ وَبِكَ آمَنْتُ، وَلَكَ أَسْلَمْتُ، سَجَدَ وَجْهِي لِلَّذِي خَلَقَهُ، وَصَوَّرَهُ، وَشَقَّ سَمْعَهُ وَبَصَرَهُ، تَبَارَكَ اللَّهُ أَحْسَنُ الْخَالِقِينَ.

اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِرِضَاكَ مِنْ سَخَطِكَ، وَبِمُعَافَاتِكَ مِنْ عُقُوبَتِكَ، وَأَعُوذُ بِكَ مِنْكَ، لَا أُحْصِي ثَنَاءً عَلَيْكَ، أَنْتَ كَمَا أَثْنَيْتَ عَلَى نَفْسِكَ.

رَبِّ أَعْطِ نَفْسِي تَقْوَاهَا زَكِّهَا أَنْتَ خَيْرُ مَنْ زَكَّاهَا أَنْتَ وَلِيُّهَا وَمَوْلَاهَا.

اللَّهُمَّ اجْعَلْ فِي قَلْبِي نُورًا وَاجْعَلْ فِي سَمْعِي نُورًا وَاجْعَلْ فِي بَصَرِي نُورًا وَاجْعَلْ مِنْ تَحْتِي نُورًا وَاجْعَلْ مِنْ فَوْقِي نُورًا وَعَنْ يَمِينِي نُورًا وَعَنْ يَسَارِي نُورًا وَاجْعَلْ أَمَامِي نُورًا وَاجْعَلْ خَلْفِي نُورًا وَأَعْظِمْ لِي نُورًا.

सज्दे की दुआएँ

पवित्र है मेरा सर्वोच्च रब। तीन बार या अधिक।

पवित्र है मेरा सर्वोच्च रब अपनी प्रशंसा के साथ। तीन बार।

अत्यंत पवित्र, परम पवित्र, फ़रिश्तों और रूह का रब।

तू पवित्र है, ऐ अल्लाह हमारे रब, और सारी प्रशंसा तेरे लिए है। ऐ अल्लाह, मुझे क्षमा कर।

पवित्र है सर्वशक्ति, राज्य, बड़ाई और महानता वाला।

ऐ अल्लाह, मेरे सारे पाप क्षमा कर: छोटे और बड़े, पहले और आख़िरी, खुले और छिपे।

ऐ अल्लाह, मैंने तेरे लिए सज्दा किया, तुझ पर ईमान लाया और तेरे सामने समर्पण किया। मेरे चेहरे ने उस हस्ती को सज्दा किया जिसने इसे पैदा किया, इसका रूप बनाया और इसके सुनने और देखने की शक्ति बनाई। सबसे अच्छा पैदा करने वाला अल्लाह बरकत वाला है।

ऐ अल्लाह, मैं तेरी प्रसन्नता के द्वारा तेरी नाराज़गी से, तेरी दी हुई कुशलता के द्वारा तेरी सज़ा से और तेरे द्वारा तुझसे शरण माँगता हूँ। मैं तेरी प्रशंसा की गणना नहीं कर सकता; तू वैसा ही है जैसी तूने अपनी प्रशंसा की है।

मेरे रब, मेरे मन को तक़वा दे और उसे पवित्र कर; तू सबसे अच्छा पवित्र करने वाला है, तू उसका संरक्षक और स्वामी है।

ऐ अल्लाह, मेरे दिल, सुनने और देखने में नूर रख; मेरे नीचे, ऊपर, दाएँ, बाएँ, सामने और पीछे नूर रख और मेरा नूर महान कर।

بَعْدَ أَنْ يَخْتَارَ أَحَدَ أَدْعِيَةِ السُّجُودِ ، يُسَنُّ لَهُ أَنْ يَدْعُوَ بِمَا شَاءَ ،لِأَنَّ "أَقْرَبُ مَا يَكُونُ الْعَبْدُ مِنْ رَبِّهِ وَهُوَ سَاجِدٌ، فَأَكْثِرُوا الدُّعَاءَ".
सज्दे की एक दुआ चुनने के बाद जो चाहे दुआ करना सुन्नत है, क्योंकि “बंदा अपने रब के सबसे अधिक निकट सज्दे में होता है, इसलिए बहुत दुआ करो।”
أَدْعِيَةُ الْجُلُوسِ بَيْنَ السَّجْدَتَيْنِ

رَبِّ اغْفِرْ لِي، رَبِّ اغْفِرْ لِي.

اللَّهُمَّ اغْفِرْ لِي، وَارْحَمْنِي، وَاهْدِنِي، وَاجْبُرْنِي، وَعَافِنِي، وَارْزُقْنِي، وَارْفَعْنِي.

दो सज्दों के बीच बैठने की दुआएँ

मेरे रब, मुझे क्षमा कर; मेरे रब, मुझे क्षमा कर।

ऐ अल्लाह, मुझे क्षमा कर, मुझ पर दया कर, मुझे मार्गदर्शन दे, मेरी कमी पूरी कर, मुझे कुशलता दे, मुझे रोज़ी दे और मेरा दर्जा ऊँचा कर।

كَانَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُطِيلُ هَذَا الرُّكْنَ بِقَدْرِ السُّجُودِ.
नबी, उन पर अल्लाह की दया और सलामती हो, इस अवस्था को सज्दे के बराबर लंबा करते थे।
دُعَاءُ سُجُودِ التِّلَاوَةِ

سَجَدَ وَجْهِيَ لِلَّذِي خَلَقَهُ، وَشَقَّ سَمْعَهُ وَبَصَرَهُ، بِحَوْلِهِ وَقُوَّتِهِ، فَتَبَارَكَ اللَّهُ أَحْسَنُ الْخَالِقِينَ.

اللَّهُمَّ اكْتُبْ لِي بِهَا عِنْدَكَ أَجْرًا، وَضَعْ عَنِّي بِهَا وِزْرًا، وَاجْعَلْهَا لِي عِنْدِكَ ذُخْراً، وَتَقَبَّلْهَا مِنِّي كَمَا تَقَبَّلْتَهَا مِنْ عَبْدِكَ دَاوُدَ.

तिलावत के सज्दे की दुआ

मेरे चेहरे ने उस हस्ती को सज्दा किया जिसने इसे पैदा किया और अपनी शक्ति और सामर्थ्य से इसके सुनने और देखने की शक्ति बनाई। सो अल्लाह, सबसे अच्छा पैदा करने वाला, बड़ी बरकत वाला है।

ऐ अल्लाह, इसके द्वारा अपने पास मेरे लिए प्रतिफल लिख दे, मेरा पाप दूर कर, इसे मेरे लिए अपने पास पूँजी बना और इसे मुझसे स्वीकार कर जैसे तूने इसे अपने बंदे दाऊद से स्वीकार किया था।

التَّشَهُّدُ الْأَوَّلُ

التَّحِيَّاتُ لِلَّهِ وَالصَّلَوَاتُ وَالطَّيِّبَاتُ السَّلَامُ عَلَيْكَ أَيُّهَا النَّبِيُّ وَرَحْمَةُ اللَّهِ وَبَرَكَاتُهُ السَّلَامُ عَلَيْنَا وَعَلَى عِبَادِ اللَّهِ الصَّالِحِينَ ، أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَأَشْهَدُ أَنَّ مُحَمَّدًا عَبْدُهُ وَرَسُولُهُ.

पहला तशह्हुद

सारे अभिवादन, इबादतें और पवित्र बातें अल्लाह के लिए हैं। ऐ नबी, आप पर सलामती हो और अल्लाह की दया और बरकतें हों। हम पर और अल्लाह के नेक बंदों पर सलामती हो। मैं गवाही देता हूँ कि अल्लाह के सिवा कोई इबादत के योग्य नहीं और गवाही देता हूँ कि मुहम्मद उसके बंदे और रसूल हैं।

وَرَدَتْ صِيَغٌ أُخْرَى لِلتَّشَهُّدِ قَرِيبَةٌ مِنْ هَذَا.
इसके निकट अर्थ वाले तशह्हुद के अन्य शब्द भी वर्णित हैं।
التَّشَهُّدُ الْأَخِيرُ

التَّحِيَّاتُ لِلَّهِ وَالصَّلَوَاتُ وَالطَّيِّبَاتُ السَّلَامُ عَلَيْكَ أَيُّهَا النَّبِيُّ وَرَحْمَةُ اللَّهِ وَبَرَكَاتُهُ السَّلَامُ عَلَيْنَا وَعَلَى عِبَادِ اللَّهِ الصَّالِحِينَ ، أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَأَشْهَدُ أَنَّ مُحَمَّدًا عَبْدُهُ وَرَسُولُهُ. اللَّهُمَّ صَلِّ عَلَى مُحَمَّدٍ وَعَلَى آلِ مُحَمَّدٍ كَمَا صَلَّيْتَ عَلَى إِبْرَاهِيمَ وَعَلَى آلِ إِبْرَاهِيمَ إِنَّكَ حَمِيدٌ مَجِيدٌ ، اللَّهُمَّ بَارِكْ عَلَى مُحَمَّدٍ وَعَلَى آلِ مُحَمَّدٍ كَمَا بَارَكْتَ عَلَى إِبْرَاهِيمَ وَعَلَى آلِ إِبْرَاهِيمَ إِنَّكَ حَمِيدٌ مَجِيدٌ.

अंतिम तशह्हुद

सारे अभिवादन, इबादतें और पवित्र बातें अल्लाह के लिए हैं। ऐ नबी, आप पर सलामती हो और अल्लाह की दया और बरकतें हों। हम पर और अल्लाह के नेक बंदों पर सलामती हो। मैं गवाही देता हूँ कि अल्लाह के सिवा कोई इबादत के योग्य नहीं और गवाही देता हूँ कि मुहम्मद उसके बंदे और रसूल हैं। ऐ अल्लाह, मुहम्मद और मुहम्मद के परिवार पर अपनी दया भेज जैसे तूने इब्राहीम और इब्राहीम के परिवार पर भेजी; निश्चय ही तू प्रशंसनीय, महिमावान है। ऐ अल्लाह, मुहम्मद और मुहम्मद के परिवार पर बरकत दे जैसे तूने इब्राहीम और इब्राहीम के परिवार पर बरकत दी; निश्चय ही तू प्रशंसनीय, महिमावान है।

أَدْعِيَةٌ بَعْدَ التَّشَهُّدِ الْأَخِيرِ وَقَبْلَ السَّلَامِ

اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنْ عَذَابِ الْقَبْرِ، وَمِنْ عَذَابِ جَهَنَّمَ، وَمِنْ فِتْنَةِ الْمَحْيَا وَالْمَمَاتِ، وَمِنْ شَرِّ فِتْنَةِ الْمَسِيحِ الدَّجَّالِ.

اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنْ عَذَابِ الْقَبْرِ. وَأَعُوذُ بِكَ مِنْ فِتْنَةِ الْمَسِيحِ الدَّجَّالِ. وَأَعُوذُ بِكَ مِنْ فِتْنَةِ الْمَحْيَا وَالْمَمَاتِ. اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْمَأْثَمِ وَالْمَغْرَمِ.

اللَّهُمَّ إِنِّي ظَلَمْتُ نَفْسِي ظُلْماً كَثِيراً ، وَلَا يَغْفِرُ الذُّنُوبَ إِلَّا أَنْتَ. فَاغْفِرْ لِي مَغْفِرَةً مِنْ عِنْدِكَ وَارْحَمْنِي، إِنَّكَ أَنْتَ الْغَفُورُ الرَّحِيمُ.

اللَّهُمَّ اغْفِرْ لِي مَا قَدَّمْتُ وَمَا أَخَّرْتُ. وَمَا أَسْرَرْتُ وَمَا أَعْلَنْتُ. وَمَا أَسْرَفْتُ. وَمَا أَنْتَ أَعْلَمُ بِهِ مِنِّي. أَنْتَ الْمُقَدِّمُ وَأَنْتَ الْمُؤَخِّرُ. لَا إِلَهَ إِلَّا أَنْتَ.

رَبَّنَا آتِنَا فِي الدُّنْيَا حَسَنَةً وَفِي الْآخِرَةِ حَسَنَةً وَقِنَا عَذَابَ النَّارِ.

اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ الْجَنَّةَ وَأَعُوذُ بِكَ مِنَ النَّارِ.

اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ يَا اللَّهُ بِأَنَّكَ الْوَاحِدُ الْأَحَدُ الصَّمَدُ الَّذِي لَمْ يَلِدْ وَلَمْ يُولَدْ، وَلَمْ يَكُنْ لَهُ كُفُوًا أَحَدٌ، أَنْ تَغْفِرَ لِي ذُنُوبِي إِنَّكَ أَنْتَ الْغَفُورُ الرَّحِيمُ.

اللَّهُمَّ حَاسِبْنِي حِسَابًا يَسِيراً.

اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ بِأَنَّ لَكَ الْحَمْدَ لَا إِلَهَ إِلَّا أَنْتَ وَحْدَكَ لَا شَرِيكَ لَكَ، الْمَنَّانُ، يَا بَدِيعَ السَّمَوَاتِ وَالْأَرْضِ يَا ذَا الْجَلَالِ وَالْإِكْرَامِ، يَا حَيُّ يَا قَيُّومُ إِنِّي أَسْأَلُكَ الْجَنَّةَ وَأَعُوذُ بِكَ مِنَ النَّارِ.

اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ بِأَنِّي أَشْهَدُ أَنَّكَ أَنْتَ اللَّهُ لَا إِلَهَ إِلَّا أَنْتَ الْأَحَدُ الصَّمَدُ الَّذِي لَمْ يَلِدْ وَلَمْ يُولَدْ وَلَمْ يَكُنْ لَهُ كُفُوًا أَحَدٌ.

اللَّهُمَّ بِعِلْمِكَ الْغَيْبَ وَقُدْرَتِكَ عَلَى الْخَلْقِ أَحْيِنِي مَا عَلِمْتَ الْحَيَاةَ خَيْرًا لِي، وَتَوَفَّنِي إِذَا عَلِمْتَ الْوَفَاةَ خَيْرًا لِي، اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ خَشْيَتَكَ فِي الْغَيْبِ وَالشَّهَادَةِ، وَأَسْأَلُكَ كَلِمَةَ الْحَقِّ فِي الرِّضَا وَالْغَضَبِ، وَأَسْأَلُكَ الْقَصْدَ فِي الْغِنَى وَالْفَقْرِ، وَأَسْأَلُكَ نَعِيمًا لَا يَنْفَدُ، وَأَسْأَلُكَ قُرَّةَ عَيْنٍ لَا تَنْقَطِعُ، وَأَسْأَلُكَ الرِّضَا بَعْدَ الْقَضَاءِ، وَأَسْأَلُكَ بَرْدَ الْعَيْشِ بَعْدَ الْمَوْتِ، وَأَسْأَلُكَ لَذَّةَ النَّظَرِ إِلَى وَجْهِكَ، وَالشَّوْقَ إِلَى لِقَائِكَ فِي غَيْرِ ضَرَّاءَ مُضِرَّةٍ، وَلَا فِتْنَةٍ مُضِلَّةٍ، اللَّهُمَّ زَيِّنَّا بِزِينَةِ الْإِيمَانِ، وَاجْعَلْنَا هُدَاةً مُهْتَدِينَ.

अंतिम तशह्हुद के बाद और सलाम फेरने से पहले की दुआएँ

ऐ अल्लाह, मैं क़ब्र की यातना, जहन्नम की यातना, जीवन और मृत्यु की परीक्षा तथा मसीह दज्जाल की परीक्षा की बुराई से तेरी पनाह माँगता हूँ।

ऐ अल्लाह, मैं क़ब्र की यातना से तेरी पनाह माँगता हूँ। मैं मसीह दज्जाल की परीक्षा से तेरी पनाह माँगता हूँ। मैं जीवन और मृत्यु की परीक्षा से तेरी पनाह माँगता हूँ। ऐ अल्लाह, मैं पाप और क़र्ज़ के बोझ से तेरी पनाह माँगता हूँ।

ऐ अल्लाह, मैंने अपने ऊपर बहुत अत्याचार किया है और तेरे सिवा कोई पाप क्षमा नहीं करता। इसलिए अपने पास से मुझे क्षमा कर और मुझ पर दया कर। निःसंदेह तू बहुत क्षमाशील, अत्यंत दयावान है।

ऐ अल्लाह, मेरे पहले और बाद के काम, जो मैंने छिपाए और प्रकट किए, जिनमें मैंने सीमा लाँघी और जिन्हें तू मुझसे बेहतर जानता है, सब क्षमा कर। आगे करने वाला भी तू है और पीछे करने वाला भी तू है। तेरे सिवा कोई उपासना के योग्य ईश्वर नहीं।

ऐ हमारे रब, हमें दुनिया में भलाई दे, आख़िरत में भी भलाई दे और हमें आग की यातना से बचा।

ऐ अल्लाह, मैं तुझसे जन्नत माँगता हूँ और आग से तेरी पनाह माँगता हूँ।

ऐ अल्लाह, ऐ अल्लाह, मैं तुझसे माँगता हूँ क्योंकि तू एक है, अद्वितीय है, सब तेरे मुहताज हैं; न उसने किसी को जन्म दिया, न वह जन्मा और न कोई उसके बराबर है। मेरे पाप क्षमा कर। निःसंदेह तू बहुत क्षमाशील, अत्यंत दयावान है।

ऐ अल्लाह, मेरा हिसाब आसान कर।

ऐ अल्लाह, मैं तुझसे माँगता हूँ क्योंकि सारी प्रशंसा तेरे लिए है। तेरे सिवा कोई उपासना के योग्य ईश्वर नहीं, तू अकेला है, तेरा कोई साझी नहीं; तू बहुत अनुग्रह करने वाला है। ऐ आकाशों और धरती के अनूठे सृष्टिकर्ता, ऐ महिमा और सम्मान के स्वामी, ऐ सदैव जीवित और सबको संभालने वाले! मैं तुझसे जन्नत माँगता हूँ और आग से तेरी पनाह माँगता हूँ।

ऐ अल्लाह, मैं तुझसे इस गवाही के साथ माँगता हूँ कि तू ही अल्लाह है; तेरे सिवा कोई उपासना के योग्य ईश्वर नहीं। तू एक है, सब तेरे मुहताज हैं; न उसने किसी को जन्म दिया, न वह जन्मा और न कोई उसके बराबर है।

ऐ अल्लाह, ग़ैब के तेरे ज्ञान और सृष्टि पर तेरी शक्ति के द्वारा, मुझे तब तक जीवित रख जब तक तेरे ज्ञान में जीवन मेरे लिए बेहतर हो और जब तेरे ज्ञान में मृत्यु मेरे लिए बेहतर हो तो मुझे मृत्यु दे। ऐ अल्लाह, मैं तुझसे अकेले और लोगों के सामने तेरा भय, प्रसन्नता और क्रोध में सच्ची बात तथा धन और निर्धनता में संयम माँगता हूँ। मैं तुझसे कभी न समाप्त होने वाला सुख, निरंतर आँखों की ठंडक, तेरे निर्णय के बाद संतोष और मृत्यु के बाद सुखद जीवन माँगता हूँ। मैं हानिकारक कष्ट और भटका देने वाली परीक्षा के बिना तेरे मुख को देखने का आनंद और तुझसे मिलने की चाह माँगता हूँ। ऐ अल्लाह, हमें ईमान की शोभा से सजा और हमें स्वयं मार्ग पाए हुए तथा दूसरों को मार्ग दिखाने वाला बना।

دُعَاءُ الْقُنُوتِ

اللَّهُمَّ اهْدِنِي فِيمَنْ هَدَيْتَ، وَعَافِنِي فِيمَنْ عَافَيْتَ، وَتَوَلَّنِي فِيمَنْ تَوَلَّيْتَ، وَبَارِكْ لِي فِيمَا أَعْطَيْتَ، وَقِنِي شَرَّ مَا قَضَيْتَ، فَإِنَّكَ تَقْضِي وَلَا يُقْضَى عَلَيْكَ، إِنَّهُ لَا يَذِلُّ مَنْ وَالَيْتَ، تَبَارَكْتَ رَبَّنَا وَتَعَالَيْتَ.

اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِرِضَاكَ مِنْ سَخَطِكَ وَأَعُوذُ بِمُعَافَاتِكَ مِنْ عُقُوبَتِكَ، وَأَعُوذُ بِكَ مِنْكَ لَا أُحْصِي ثَنَاءً عَلَيْكَ، أَنْتَ كَمَا أَثْنَيْتَ عَلَى نَفْسِكَ.

اللَّهُمَّ إِيَّاكَ نَعْبُدُ، وَلَكَ نُصَلِّي وَنَسْجُدُ، وَإِلَيْكَ نَسْعَى وَنَحْفِدُ، نَرْجُو رَحْمَتَكَ، وَنَخْشَى عَذَابَكَ، إِنَّ عَذَابَكَ بِالْكَافِرِينَ مُلْحِقٌ، اللَّهُمَّ إِنَّا نَسْتَعِينُكَ، وَنَسْتَغْفِرُكَ، وَنُثْنِي عَلَيْكَ الْخَيْرَ، وَلَا نَكْفُرُكَ، وَنُؤْمِنُ بِكَ وَنَخْضَعُ لَكَ، وَنَخْلَعُ مَنْ يَكْفُرُكَ.

اللَّهُمَّ تَقَبَّلْ مِنَّا إِنَّكَ أَنْتَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ وَتُبْ عَلَيْنَا إِنَّكَ أَنْتَ التَّوَّابُ الرَّحِيمُ. وَصَلَّى اللَّهُ عَلَى سَيِّدِنَا مُحَمَّدٍ وَعَلَى آلِهِ وَصَحْبِهِ وَسَلَّمَ.

दुआ-ए-क़ुनूत

ऐ अल्लाह, मुझे उन लोगों में हिदायत दे जिन्हें तूने हिदायत दी, मुझे उन लोगों के साथ आफ़ियत दे जिन्हें तूने आफ़ियत दी, और मुझे उन लोगों में अपनी सरपरस्ती दे जिन्हें तूने अपनी सरपरस्ती दी। जो कुछ तूने मुझे दिया उसमें बरकत दे और अपने फ़ैसले की बुराई से मेरी रक्षा कर। निश्चय ही तू फ़ैसला करता है और तेरे ख़िलाफ़ फ़ैसला नहीं किया जाता। जिसे तू अपनी सरपरस्ती दे वह अपमानित नहीं होता। ऐ हमारे रब, तू बरकत वाला और सर्वोच्च है।

ऐ अल्लाह, मैं तेरे क्रोध से तेरी प्रसन्नता की पनाह माँगता हूँ और तेरी सज़ा से तेरी दी हुई आफ़ियत की पनाह माँगता हूँ। मैं तुझसे तेरी ही पनाह माँगता हूँ। मैं तेरी प्रशंसा पूरी तरह गिन नहीं सकता; तू वैसा ही है जैसी प्रशंसा तूने स्वयं अपनी की है।

ऐ अल्लाह, हम केवल तेरी इबादत करते हैं, तेरे लिए नमाज़ पढ़ते और सजदा करते हैं, और तेरी ओर प्रयास करते व दौड़ते हैं। हम तेरी दया की आशा रखते और तेरी यातना से डरते हैं। निश्चय ही तेरी यातना इनकार करने वालों तक पहुँचने वाली है। ऐ अल्लाह, हम तुझसे सहायता और क्षमा माँगते हैं, अच्छे शब्दों से तेरी प्रशंसा करते हैं और तेरे प्रति कृतघ्न नहीं होते। हम तुझ पर ईमान लाते हैं, तेरे सामने झुकते हैं और तेरा इनकार करने वालों से अलग होते हैं।

ऐ अल्लाह, हमसे स्वीकार कर; निश्चय ही तू सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है। हमारी तौबा स्वीकार कर; निश्चय ही तू तौबा स्वीकार करने वाला, दयावान है। अल्लाह हमारे सरदार मुहम्मद, उनके परिवार और उनके साथियों पर दया और सलामती भेजे।

دُعَاءُ الْقُنُوتِ يَكُونُ فِي الرَّكْعَةِ الْأَخِيرَةِ مِنْ صَلَاةِ الْوِتْرِ بَعْدَ الرُّكُوعِ ، وَإِذَا جَعَلَهُ قَبْلَ الرُّكُوعِ فَلَا بَأْسَ ، إِلَّا أَنَّهُ بَعْدَ الرُّكُوعِ أَفْضَلُ ، وَيَرْفَعُ يَدَيْهِ إِلَى صَدْرِهِ وَلَا يَرْفَعُهَا كَثِيرًا . الْقُنُوتُ عِنْدَ النَّوَازِلِ سُنَّةٌ فِي جَمِيعِ الصَّلَوَاتِ الْخَمْسِ وَهُوَ فِي صَلَاةِ الْمَغْرِبِ وَالْفَجْرِ آكَدُ.
Qunut is recited in the last unit of Witr after bowing. Reciting it before bowing is also permissible, though after bowing is preferable. Raise the hands to chest level without lifting them excessively. Qunut in times of calamity is recommended in all five prayers, especially Maghrib and Fajr.
دُعَاءُ خُطْبَةِ الْجُمُعَةِ

رَبَّنَا لَا تُزِغْ قُلُوبَنَا بَعْدَ إِذْ هَدَيْتَنَا وَهَبْ لَنَا مِنْ لَدُنْكَ رَحْمَةً إِنَّكَ أَنْتَ الْوَهَّابُ وَأَصْلِحِ اللَّهُمَّ أَحْوَالَنَا فِي الْأُمُورِ كُلِّهَا وَبَلِّغْنَا بِمَا يُرْضِيكَ آمَالَنَا وَاخْتِمِ اللَّهُمَّ بِالصَّالِحَاتِ أَعْمَالَنَا وَبِالسَّعَادَةِ آجَالَنَا وَتَوَفَّنَا يَا رَبِّ وَأَنْتَ رَاضٍ عَنَّا.

اللَّهُمَّ اجْعَلْ جَمْعَنَا هَذَا جَمْعًا مُبَارَكًا مَرْحُومًا وَتَفَرُّقَنَا مِنْ كُلِّ شَرٍّ مَعْصُومًا.

رَبَّنَا لَا تَدَعْ لَنَا ذَنْبًا إِلَّا غَفَرْتَهُ وَلَا هَمًّا إِلَّا فَرَّجْتَهُ وَلَا مَرِيضًا إِلَّا شَفَيْتَهُ وَلَا مَيِّتًا إِلَّا رَحِمْتَهُ وَلَا طَالِبًا أَمْرًا مِنْ أُمُورِ الْخَيْرِ إِلَّا سَهَّلْتَهُ لَهُ وَيَسَّرْتَهُ.

اللَّهُمَّ وَحِّدْ كَلِمَةَ الْمُسْلِمِينَ وَاجْمَعْ شَمْلَهُمْ وَاجْعَلْهُمْ يَدًا وَاحِدَةً عَلَى مَنْ سِوَاهُمْ وَانْصُرِ اللَّهُمَّ الْمُسْلِمِينَ وَاخْذُلِ الْكَفَرَةَ الْمُشْرِكِينَ أَعْدَاءَكَ أَعْدَاءَ الدِّينِ.

اللَّهُمَّ إِنَّا نَسْأَلُكَ لِوُلَاةِ أُمُورِنَا الصَّلَاحَ وَالسَّدَادَ.

اللَّهُمَّ كُنْ لَهُمْ عَوْنًا وَخُذْ بِأَيْدِيهِمْ إِلَى الْحَقِّ وَالصَّوَابِ وَالسَّدَادِ وَالرَّشَادِ وَوَفِّقْهُمْ لِلْعَمَلِ لِمَا فِيهِ رِضَاكَ وَمَا فِيهِ صَالِحُ الْعِبَادِ وَالْبِلَادِ.

اللَّهُمَّ إِنَّا نَسْأَلُكَ لِبَلَدِنَا هَذَا اللَّهُمَّ اجْعَلْهُ بَلَدًا آمِنًا وَارْزُقْهُ مِنْ كُلِّ الْخَيْرَاتِ وَجَنِّبْهُ الْفِتَنَ مَا ظَهَرَ مِنْهَا وَمَا بَطَنَ وَأَلِّفِ اللَّهُمَّ مَا بَيْنَ قُلُوبِنَا وَبَيْنَ قُلُوبِ أَبْنَاءِ هَذَا الْوَطَنِ وَاجْعَلْهُمُ اللَّهُمَّ يَا رَبَّنَا بِاسْمِكَ مُتَحَابِّينَ وَعَلَى نُصْرَةِ دِينِكَ مُتَعَاوِنِينَ.

اللَّهُمَّ إِنَّا نَسْتَعِيذُ بِكَ مِنْ شَرِّ مَا خَلَقْتَ وَمِنْ كُلِّ عَيْنِ حَاسِدٍ و نَسْأَلُكَ اللَّهُمَّ التَّوْفِيقَ وَالسَّدَادَ وَالْهِدَايَةَ وَالرَّشَادَ وَحُسْنَ الْعُقْبَى وَحُسْنَ الْمِيعَادِ.

اللَّهُمَّ أَسْبِغْ عَلَيْنَا نِعْمَتَكَ وَعَلَى جَمِيعِ الْمُسْلِمِينَ وَامْلَأِ اللَّهُمَّ قُلُوبَنَا بِالْإِيمَانِ وَالْقَنَاعَةِ وَأَلْزِمْ جَوَارِحَنَا الْعِبَادَةَ وَالطَّاعَةَ وَاغْفِرِ اللَّهُمَّ لَنَا وَلِوَالِدَيْنَا وَلِإِخْوَانِنَا وَأَشْيَاخِنَا وَلِجَمِيعِ مَنْ سَبَقَنَا بِالْإِيمَانِ وَآتِنَا مِنْ لَدُنْكَ رَحْمَةً وَهَيِّئْ لَنَا مِنْ أَمْرِنَا رَشَدًا وَآتِنَا رَبَّنَا فِي الدُّنْيَا حَسَنَةً وَفِي الْآخِرَةِ حَسَنَةً وَقِنَا عَذَابَ النَّارِ.

سُبْحَانَ رَبِّكَ رَبِّ الْعِزَّةِ عَمَّا يَصِفُونَ وَسَلَامٌ عَلَى الْمُرْسَلِينَ وَالْحَمْدُ لِلَّهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ.

जुमे के ख़ुत्बे की दुआ

हमारे रब, हमें मार्गदर्शन देने के बाद हमारे दिलों को टेढ़ा न कर और अपनी ओर से हमें दया प्रदान कर; निश्चय ही तू बहुत देने वाला है। ऐ अल्लाह, हमारे सभी मामलों में हमारी दशा ठीक कर, हमें वे आशाएँ पूरी करने दे जिनसे तू प्रसन्न हो, हमारे कर्मों का अंत अच्छे कर्मों से और हमारे जीवन का अंत सौभाग्य से कर; ऐ रब, हमें उस अवस्था में मृत्यु दे जब तू हमसे प्रसन्न हो।

ऐ अल्लाह, हमारी इस सभा को बरकत और दया वाली बना और हमारे अलग होने को हर बुराई से सुरक्षित बना।

हमारे रब, हमारा कोई पाप ऐसा न छोड़ जिसे तू क्षमा न करे, कोई चिंता ऐसी न छोड़ जिसे दूर न करे, कोई बीमार ऐसा न छोड़ जिसे शिफ़ा न दे, कोई मृतक ऐसा न छोड़ जिस पर दया न करे और भलाई का कोई इच्छुक ऐसा न छोड़ जिसके लिए तू उसे सहज और आसान न कर दे।

ऐ अल्लाह, मुसलमानों की बात एक कर, उन्हें एकजुट कर और उन्हें दूसरों के मुक़ाबले एक हाथ बना। ऐ अल्लाह, मुसलमानों की सहायता कर और इनकार करने वाले बहुदेववादियों को पराजित कर जो तेरे और दीन के शत्रु हैं।

ऐ अल्लाह, हम तुझसे अपने शासकों के लिए सुधार और सही मार्ग माँगते हैं।

ऐ अल्लाह, उनका सहायक बन और सत्य, शुद्धता, सही निर्णय और मार्गदर्शन की ओर उनका हाथ पकड़। उन्हें उन कामों की तौफ़ीक़ दे जिनमें तेरी प्रसन्नता और लोगों तथा देशों की भलाई है।

ऐ अल्लाह, हम तुझसे अपने इस देश के लिए माँगते हैं: इसे सुरक्षित देश बना, इसे हर प्रकार की भलाई प्रदान कर और प्रकट तथा छिपी परीक्षाओं से दूर रख। ऐ अल्लाह, हमारे दिलों और इस वतन के लोगों के दिलों में मेल पैदा कर; उन्हें तेरे नाम पर एक-दूसरे से प्रेम करने वाला और तेरे दीन की सहायता में सहयोग करने वाला बना।

ऐ अल्लाह, हम तेरी सृष्टि की बुराई और हर ईर्ष्यालु की नज़र से तेरी शरण माँगते हैं। ऐ अल्लाह, हम तुझसे तौफ़ीक़, सही निर्णय, मार्गदर्शन, सही राह, अच्छा परिणाम और अच्छी वापसी माँगते हैं।

ऐ अल्लाह, हम पर और सभी मुसलमानों पर अपनी नेमत पूरी कर। हमारे दिलों को ईमान और संतोष से भर दे और हमारे अंगों को इबादत और आज्ञाकारिता से जोड़े रख। ऐ अल्लाह, हमें, हमारे माता-पिता, भाइयों, विद्वानों और ईमान में हमसे पहले जाने वालों को क्षमा कर। हमें अपनी ओर से दया दे, हमारे मामले में सही मार्ग तैयार कर, हमारे रब, हमें दुनिया में भलाई दे और आख़िरत में भलाई दे तथा आग की यातना से बचा।

पवित्र है तेरा रब, सम्मान का रब, उन बातों से जो वे बताते हैं। रसूलों पर सलामती हो और सारी प्रशंसा अल्लाह के लिए है जो सारे संसारों का रब है।

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हदीस पुस्तकालय से

हदीस
It was narrated that Malik bin Aws bin Hadathan said: "I came saying. 'Who will exchange Dirham?' Talhah bin 'Ubaidullah, who was with 'Umar bin Khattab, said: 'Show us your gold, then come to us; when our treasure comes, we will give you your silver.' 'Umar said: 'No, by Allah, you will give him silver (now), or give him back his gold, for the Messenger of Allah (ﷺ) said: "Silver for gold is usury, unless it is exchanged on the spot."'