तस्बीह और महत्वपूर्ण अज़कार

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سُبْحَانَ اللَّهِ
अल्लाह पवित्र है।
يُكْتَبُ لَهُ أَلْفُ حَسَنَةٍ أَوْ يُحَطُّ عَنْهُ أَلْفُ خَطِيئَةٍ.
उसके लिए एक हज़ार नेकियाँ लिखी जाती हैं या उसकी एक हज़ार ग़लतियाँ मिटाई जाती हैं।
اللَّهُ أَكْبَرُ
अल्लाह सबसे महान है।
مَنْ قَالَ اللَّهُ أَكْبَرُ كُتِبَتْ لَهُ عِشْرُونَ حَسَنَةً وَحُطَّتْ عَنْهُ عِشْرُونَ سَيِّئَةً. اللَّهُ أَكْبَرُ مِنْ كُلِّ شَيْءٍ.
जो अल्लाह सबसे महान है कहता है उसके लिए बीस नेकियाँ लिखी जाती हैं और उसकी बीस बुराइयाँ मिटाई जाती हैं। अल्लाह हर चीज़ से महान है।
أَسْتَغْفِرُ اللَّهَ
मैं अल्लाह से क्षमा माँगता हूँ।
لِفِعْلِ الرَّسُولِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ.
रसूल की प्रथा का अनुसरण करते हुए, अल्लाह उन पर सलावत और सलाम नाज़िल फ़रमाए।
لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ
अल्लाह के सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं।
أَفْضَلُ الذِّكْرِ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ.
सबसे उत्तम ज़िक्र है: अल्लाह के सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं।
سُبْحَانَ اللَّهِ وَبِحَمْدِهِ
अल्लाह पवित्र है और उसी की प्रशंसा है।
حُطَّتْ خَطَايَاهُ وَإِنْ كَانَتْ مِثْلَ زَبَدِ الْبَحْرِ. لَمْ يَأْتِ أَحَدٌ يَوْمَ الْقِيَامَةِ بِأَفْضَلَ مِمَّا جَاءَ بِهِ إِلَّا أَحَدٌ قَالَ مِثْلَ مَا قَالَ أَوْ زَادَ عَلَيْهِ.
उसकी ग़लतियाँ मिटा दी जाती हैं, भले ही वे समुद्र के झाग के बराबर हों। क़ियामत के दिन उससे बेहतर अमल कोई नहीं लाएगा, सिवाय उसके जिसने उतना ही या उससे अधिक कहा हो।
الْحَمْدُ لِلَّهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ
सारी प्रशंसा अल्लाह के लिए है, जो समस्त संसारों का पालनहार है।
تَمْلَأُ مِيزَانَ الْعَبْدِ بِالْحَسَنَاتِ.
यह बंदे के तराज़ू को नेकियों से भर देता है।
سُبْحَانَ اللَّهِ وَالْحَمْدُ لِلَّهِ
अल्लाह पवित्र है और सारी प्रशंसा अल्लाह के लिए है।
تَمْلَآنِ مَا بَيْنَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ.
ये दोनों आकाशों और धरती के बीच की जगह भर देते हैं।
لَا حَوْلَ وَلَا قُوَّةَ إِلَّا بِاللَّهِ
अल्लाह की सहायता के बिना न कोई शक्ति है और न कोई सामर्थ्य।
كَنْزٌ مِنْ كُنُوزِ الْجَنَّةِ (أَيُّ عَدَدٍ).
जन्नत के ख़ज़ानों में से एक ख़ज़ाना (किसी भी संख्या में)।
سُبْحَانَ اللَّهِ الْعَظِيمِ وَبِحَمْدِهِ
महान अल्लाह पवित्र है और उसी की प्रशंसा है।
غُرِسَتْ لَهُ نَخْلَةٌ فِي الْجَنَّةِ (أَيُّ عَدَدٍ).
उसके लिए जन्नत में एक खजूर का पेड़ लगाया जाता है (किसी भी संख्या में)।
اللَّهُمَّ صَلِّ وَسَلِّمْ وَبَارِكْ عَلَى سَيِّدِنَا مُحَمَّدٍ
ऐ अल्लाह, हमारे सरदार मुहम्मद पर सलावत, सलाम और बरकत नाज़िल फ़रमा।
مَنْ صَلَّى عَلَيَّ حِينَ يُصْبِحُ وَحِينَ يُمْسِي أَدْرَكَتْهُ شَفَاعَتِي يَوْمَ الْقِيَامَةِ.
जो व्यक्ति सुबह और शाम मुझ पर सलावत भेजता है, उसे क़ियामत के दिन मेरी शफ़ाअत प्राप्त होगी।
سُبْحَانَ اللَّهِ وَبِحَمْدِهِ ، سُبْحَانَ اللَّهِ الْعَظِيمِ
अल्लाह पवित्र है और उसी की प्रशंसा है। महान अल्लाह पवित्र है।
ثَقِيلَتَانِ فِي الْمِيزَانِ حَبِيبَتَانِ إِلَى الرَّحْمَنِ (أَيُّ عَدَدٍ).
दो वाक्य जो तराज़ू में भारी हैं और रहमान को प्रिय हैं (किसी भी संख्या में)।
الْحَمْدُ لِلَّهِ حَمْدًا كَثِيرًا طَيِّبًا مُبَارَكًا فِيهِ.
सारी प्रशंसा अल्लाह के लिए है; बहुत अधिक, पवित्र और बरकत वाली प्रशंसा।
قَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ‏"‏لَقَدْ رَأَيْتُ اثْنَيْ عَشَرَ مَلَكًا يَبْتَدِرُونَهَا، أَيُّهُمْ يَرْفَعُهَا"‏.
नबी, अल्लाह उन पर सलावत और सलाम नाज़िल फ़रमाए, ने कहा: मैंने बारह फ़रिश्तों को इसे उठाने के लिए आगे बढ़ते देखा।
سُبْحَانَ اللَّهِ، وَالْحَمْدُ لِلَّهِ، وَلَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ، وَاللَّهُ أَكْبَرُ
अल्लाह पवित्र है, सारी प्रशंसा अल्लाह के लिए है, अल्लाह के सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं और अल्लाह सबसे महान है।
أَنَّهُنَّ أَحَبُّ الْكَلَامِ إِلَى اللَّهِ، وَمُكَفِّرَاتٌ لِلذُّنُوبِ، وَغَرْسُ الْجَنَّةِ، وَجُنَّةٌ لِقَائِلِهِنَّ مِنَ النَّارِ، وَأَحَبُّ إِلَى النَّبِيِّ عَلَيْهِ السَّلَامُ مِمَّا طَلَعَتْ عَلَيْهِ الشَّمْسُ، وَالْبَاقِيَاتُ الصَّالِحَاتُ.
ये अल्लाह को सबसे प्रिय वचन हैं, पापों को मिटाने वाले, जन्नत के पौधे और इन्हें कहने वाले के लिए आग से रक्षा हैं। ये नबी, उन पर सलाम हो, को उन सभी चीज़ों से अधिक प्रिय हैं जिन पर सूर्य उगता है और ये शेष रहने वाले नेक कर्म हैं।
اللَّهُ أَكْبَرُ كَبِيرًا ، وَالْحَمْدُ لِلَّهِ كَثِيرًا ، وَسُبْحَانَ اللَّهِ بُكْرَةً وَأَصِيلًا.
अल्लाह सबसे बड़ा है, उसकी बहुत अधिक प्रशंसा है और सुबह-शाम अल्लाह पवित्र है।
قَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ "عَجِبْتُ لَهَا ، فُتِحَتْ لَهَا أَبْوَابُ السَّمَاءِ".
नबी, अल्लाह उन पर सलावत और सलाम नाज़िल फ़रमाए, ने कहा: मैं इससे अचंभित हुआ; इसके कारण आकाश के द्वार खोले गए।
لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ، لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ وَهُوَ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ.
अल्लाह के सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं, वह अकेला है, उसका कोई साझी नहीं। राज्य और प्रशंसा उसी के लिए हैं और वह हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है।
كَانَتْ لَهُ عَدْلَ عَشْرِ رِقَابٍ، وَكُتِبَتْ لَهُ مِئَةُ حَسَنَةٍ، وَمُحِيَتْ عَنْهُ مِئَةُ سَيِّئَةٍ، وَكَانَتْ لَهُ حِرْزًا مِنَ الشَّيْطَانِ.
उसे दस दासों को मुक्त करने के बराबर प्रतिफल मिलता है, उसके लिए सौ नेकियाँ लिखी जाती हैं, सौ बुराइयाँ मिटाई जाती हैं और उसे शैतान से सुरक्षा मिलती है।
سُبْحَانَ اللَّهِ، وَالْحَمْدُ لِلَّهِ، وَلَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ، وَاللَّهُ أَكْبَرُ، وَلَا حَوْلَ وَلَا قُوَّةَ إِلَّا بِاللَّهِ.
अल्लाह पवित्र है, सारी प्रशंसा अल्लाह के लिए है, अल्लाह के सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं, अल्लाह सबसे महान है और अल्लाह की सहायता के बिना न कोई शक्ति है और न कोई सामर्थ्य।
الْبَاقِيَاتُ الصَّالِحَاتُ وَكَنْزٌ مِنْ كُنُوزِ الْجَنَّةِ.
ये शेष रहने वाले नेक कर्म और जन्नत के ख़ज़ानों में से एक ख़ज़ाना हैं।
سُبْحَانَ اللَّهِ ، وَالْحَمْدُ لِلَّهِ ، وَلَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ ، وَاللَّهُ أَكْبَرُ ، اللَّهُمَّ اغْفِرْ لِي ، اللَّهُمَّ ارْحَمْنِي ، اللَّهُمَّ ارْزُقْنِي.
अल्लाह पवित्र है, सारी प्रशंसा अल्लाह के लिए है, अल्लाह के सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं और अल्लाह सबसे महान है। ऐ अल्लाह, मुझे क्षमा कर; ऐ अल्लाह, मुझ पर दया कर; ऐ अल्लाह, मुझे आजीविका दे।
خَيْرُ الدُّنْيَا وَالْآخِرَةِ
दुनिया और आख़िरत की भलाई।
اللَّهُمَّ صَلِّ عَلَى مُحَمَّدٍ وَعَلَى آلِ مُحَمَّدٍ كَمَا صَلَّيْتَ عَلَى إِبْرَاهِيمَ , وَعَلَى آلِ إِبْرَاهِيمَ إِنَّكَ حَمِيدٌ مَجِيدٌ , اللَّهُمَّ بَارِكْ عَلَى مُحَمَّدٍ وَعَلَى آلِ مُحَمَّدٍ كَمَا بَارَكْتَ عَلَى إِبْرَاهِيمَ وَعَلَى آلِ إِبْرَاهِيمَ إِنَّكَ حَمِيدٌ مَجِيدٌ.
ऐ अल्लाह, मुहम्मद और मुहम्मद के परिवार पर सलावत नाज़िल फ़रमा जैसे तूने इब्राहीम और इब्राहीम के परिवार पर सलावत नाज़िल फ़रमाई। निश्चय ही तू प्रशंसित और महान है। ऐ अल्लाह, मुहम्मद और मुहम्मद के परिवार पर बरकत नाज़िल फ़रमा जैसे तूने इब्राहीम और इब्राहीम के परिवार पर बरकत नाज़िल फ़रमाई। निश्चय ही तू प्रशंसित और महान है।
فِي كُلِّ مَرَّةٍ تُحَطُّ عَنْهُ عَشْرُ خَطَايَا وَيُرْفَعُ لَهُ عَشْرُ دَرَجَاتٍ وَيُصَلِّي اللَّهُ عَلَيْهِ عَشْرًا وَتُعْرَضُ عَلَى الرَّسُولِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ (أَيُّ عَدَدٍ).
हर बार उसकी दस ग़लतियाँ मिटाई जाती हैं, उसके दस दर्जे बढ़ाए जाते हैं, अल्लाह उस पर दस बार सलावत भेजता है और वह रसूल, अल्लाह उन पर सलावत और सलाम नाज़िल फ़रमाए, को प्रस्तुत की जाती है (किसी भी संख्या में)।
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हदीस पुस्तकालय से

हदीस
Anas ibn Malik said, "The Prophet, may Allah bless him and grant him peace, was in the market when a man said, 'Abu'l-Qasim!' The Prophet, may Allah bless him and grant him peace, turned towards him. He said, 'Messenger of Allah, I was calling this man.' The Prophet, may Allah bless him and grant him peace, said, 'Call yourselves with my name but do no use my kunya.'"
Narrated Anas: Abu Zaid died and did not leave any offspring, and he was one of the Badr warriors.