नमाज़ की पूरी मार्गदर्शिका
पाँच दैनिक नमाज़ें चरण-दर-चरण सीखें। यह मार्गदर्शिका आम तौर पर सिखाया जाने वाला सुन्नी तरीका प्रस्तुत करती है; मान्य सुन्नी मतों में कुछ विवरण अलग हैं। अपनी क्षमता के अनुसार नमाज़ पढ़ें और ज़रूरत हो तो भरोसेमंद शिक्षक से पूछें। सीखते समय योग्य क़ारी की तिलावत सुनें। إِنَّ الصَّلَاةَ كَانَتْ عَلَى الْمُؤْمِنِينَ كِتَابًا مَوْقُوتًا नमाज़ मोमिनों पर निश्चित समयों में फ़र्ज़ की गई है। — क़ुरआन 4:103
किसके साथ सीखना है?
आम तौर पर सिखाया जाने वाला सुन्नी तरीका दिखाया गया है। कुछ बातें फ़िक़्ही मतों में अलग हैं; अपनी क्षमता के अनुसार नमाज़ पढ़ें। वुज़ू टूटने तक वैध रहता है।
नमाज़ की तैयारी
पहले सुनिश्चित करें कि नमाज़ का वक़्त शुरू हो गया है। आवश्यक पाकी हासिल करें, नजासत हटाएँ, नमाज़ के लिए ज़रूरी हिस्सों को ढकें और साफ़ जगह पर यथासंभव क़िबले की ओर रुख़ करें। वुज़ू के लिए उसकी मार्गदर्शिका देखें। शांति से नमाज़ पढ़ें और हर हरकत को पूरा समय दें।
ऊपर जाएँनीयत और पहली तकबीर
दिल में तय करें कि कौन-सी नमाज़ पढ़ रहे हैं; किसी निश्चित वाक्य को बोलना ज़रूरी नहीं है। फ़र्ज़ नमाज़ में सक्षम हों तो खड़े हों। हाथ कंधों या कानों के पास उठाकर तकबीर कहें। खड़े रहते हुए दायाँ हाथ बाएँ हाथ पर रखें और सज्दे की जगह देखें। اللَّهُ أَكْبَرُ अर्थ: अल्लाह सबसे बड़ा है।
ऊपर जाएँशुरुआती दुआ
पहली तकबीर के बाद शुरुआती दुआ पढ़ना मुस्तहब है। एक साबित दुआ का यह हिस्सा है: وَجَّهْتُ وَجْهِيَ لِلَّذِي فَطَرَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ حَنِيفًا وَمَا أَنَا مِنَ الْمُشْرِكِينَ، إِنَّ صَلَاتِي وَنُسُكِي وَمَحْيَايَ وَمَمَاتِي لِلَّهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ، لَا شَرِيكَ لَهُ وَبِذَٰلِكَ أُمِرْتُ وَأَنَا مِنَ الْمُسْلِمِينَ. फिर शैतान से अल्लाह की पनाह माँगें: أَعُوذُ بِاللَّهِ مِنَ الشَّيْطَانِ الرَّجِيمِ (अर्थ: मैं धिक्कारे हुए शैतान से अल्लाह की पनाह माँगता हूँ।) शुरुआती दुआ मुस्तहब है; उसके अलग-अलग रूपों को एक साथ पढ़ना ज़रूरी नहीं है। दुआ का अर्थ: मैं आसमानों और ज़मीन के रचयिता की ओर सच्चे दिल से रुख़ करता हूँ। मेरी नमाज़, क़ुरबानी, जीवन और मृत्यु सारे संसारों के पालनहार अल्लाह के लिए हैं, जिसका कोई साझी नहीं है।
ऊपर जाएँअल-फ़ातिहा पढ़ना
अकेले या इमाम के रूप में नमाज़ पढ़ते समय हर रकअत में अल-फ़ातिहा पढ़ें, फिर آمِينَ कहें (ऐ अल्लाह, क़बूल कर)। ज़रूरत हो तो शिक्षक के साथ धीरे-धीरे सीखें। इमाम के पीछे पढ़ने वाले की तिलावत के विवरण पर सुन्नी मत अलग हैं; इमाम से आगे हुए बिना अपने विश्वसनीय शिक्षक या मत का पालन करें। بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ الْحَمْدُ لِلَّهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ مَالِكِ يَوْمِ الدِّينِ إِيَّاكَ نَعْبُدُ وَإِيَّاكَ نَسْتَعِينُ اهْدِنَا الصِّرَاطَ الْمُسْتَقِيمَ صِرَاطَ الَّذِينَ أَنْعَمْتَ عَلَيْهِمْ غَيْرِ الْمَغْضُوبِ عَلَيْهِمْ وَلَا الضَّالِّينَ अर्थ: अल्लाह के नाम से, जो बहुत मेहरबान और रहम वाला है। सारी तारीफ़ अल्लाह के लिए है, जो सारे संसारों का पालनहार, रहम वाला और बदले के दिन का मालिक है। हम केवल तेरी इबादत करते हैं और तुझसे मदद माँगते हैं। हमें सीधा रास्ता दिखा, उन लोगों का रास्ता जिन्हें तूने नेमत दी, न उनका जिन पर ग़ज़ब हुआ और न भटके हुए लोगों का।
ऊपर जाएँऔर क़ुरआन पढ़ना
पहली दो रकअत में अल-फ़ातिहा के बाद दूसरी सूरा या कुछ आयतें पढ़ना मुस्तहब है। पाठ में पहली रकअत में अल-इख़लास और दूसरी में अल-फ़लक़ दी गई हैं। ये उदाहरण हैं, इन्हीं सूराओं को पढ़ना आवश्यक नहीं है। इस शिक्षण उदाहरण में तीसरी और चौथी रकअत में अल-फ़ातिहा पढ़ी जाती है। सूरा अल-इख़लास: بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ قُلْ هُوَ اللَّهُ أَحَدٌ اللَّهُ الصَّمَدُ لَمْ يَلِدْ وَلَمْ يُولَدْ وَلَمْ يَكُنْ لَهُ كُفُوًا أَحَدٌ सूरा अल-फ़लक़: بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ الْفَلَقِ مِنْ شَرِّ مَا خَلَقَ وَمِنْ شَرِّ غَاسِقٍ إِذَا وَقَبَ وَمِنْ شَرِّ النَّفَّاثَاتِ فِي الْعُقَدِ وَمِنْ شَرِّ حَاسِدٍ إِذَا حَسَدَ अल-इख़लास का अर्थ: कहें कि अल्लाह एक है और सब उसके मोहताज हैं। न उसकी संतान है, न वह किसी की संतान है, और कोई उसके बराबर नहीं है। अल-फ़लक़ का अर्थ: मैं सुबह के पालनहार की पनाह माँगता हूँ, उसकी बनाई चीज़ों की बुराई से, फैलते अँधेरे से, गाँठों में फूँकने वालों से और हसद करने वाले की बुराई से जब वह हसद करे।
ऊपर जाएँरुकू
तकबीर कहकर झुकें और हाथ घुटनों पर रखें। पीठ को आराम से जितना हो सके सीधा रखें। इस स्थिति में ठहरकर रुकू का ज़िक्र पढ़ें, जो आम तौर पर तीन बार पढ़ा जाता है। اللَّهُ أَكْبَرُ سُبْحَانَ رَبِّيَ الْعَظِيمِ अर्थ: अल्लाह सबसे बड़ा है। मेरा महान पालनहार पाक है।
ऊपर जाएँरुकू से उठना
रुकू से उठकर पूरी तरह सीधे और स्थिर खड़े हों। इमाम और अकेले नमाज़ पढ़ने वाला पहले «अल्लाह उसकी सुनता है जो उसकी तारीफ़ करता है», फिर «हमारे पालनहार, सारी तारीफ़ तेरे लिए है» कहता है। इमाम के पीछे पढ़ने वाला उठते समय दूसरी बात कहता है। अपने सुन्नी मत का मार्गदर्शन अपनाएँ। سَمِعَ اللَّهُ لِمَنْ حَمِدَهُ رَبَّنَا وَلَكَ الْحَمْدُ अर्थ: अल्लाह उसकी सुनता है जो उसकी तारीफ़ करता है। हमारे पालनहार, सारी तारीफ़ तेरे लिए है।
ऊपर जाएँपहला सज्दा
तकबीर कहकर अपनी क्षमता के अनुसार माथे और नाक, दोनों हाथों, दोनों घुटनों और दोनों पैरों की उँगलियों पर शांति से सज्दा करें। सज्दे का ज़िक्र आम तौर पर तीन बार पढ़ें। आप अल्लाह से दुआ भी कर सकते हैं। اللَّهُ أَكْبَرُ سُبْحَانَ رَبِّيَ الْأَعْلَى अर्थ: अल्लाह सबसे बड़ा है। मेरा सबसे ऊँचा पालनहार पाक है।
ऊपर जाएँसज्दों के बीच बैठना
तकबीर कहकर बैठें और स्थिर हो जाएँ। अपने पालनहार से माफ़ी माँगें; इस दुआ को दोहरा सकते हैं। दूसरे सज्दे से पहले ठहरें। اللَّهُ أَكْبَرُ رَبِّ اغْفِرْ لِي अर्थ: अल्लाह सबसे बड़ा है। मेरे पालनहार, मुझे माफ़ कर।
ऊपर जाएँदूसरा सज्दा
तकबीर कहकर पहले की तरह दूसरा सज्दा करें। उसमें ठहरें और सज्दे का ज़िक्र पढ़ें। अब एक रकअत की हरकतें पूरी हो गई हैं। اللَّهُ أَكْبَرُ سُبْحَانَ رَبِّيَ الْأَعْلَى अर्थ: अल्लाह सबसे बड़ा है। मेरा सबसे ऊँचा पालनहार पाक है।
ऊपर जाएँअगली रकअत में उठना
तकबीर कहकर उठें। दूसरी रकअत में अल-फ़ातिहा और दूसरा हिस्सा पढ़ें, फिर रुकू, खड़े होना और दो सज्दे दोहराएँ। اللَّهُ أَكْبَرُ अर्थ: अल्लाह सबसे बड़ा है।
ऊपर जाएँपहला तशह्हुद
दूसरी रकअत के दूसरे सज्दे के बाद तशह्हुद के लिए बैठें। फ़ज्र में यही अंतिम बैठना होता है। मग़रिब, ज़ुहर, अस्र और इशा में पहले तशह्हुद के बाद तकबीर कहकर तीसरी रकअत के लिए उठें। तशह्हुद इस तरह है: التَّحِيَّاتُ لِلَّهِ وَالصَّلَوَاتُ وَالطَّيِّبَاتُ، السَّلَامُ عَلَيْكَ أَيُّهَا النَّبِيُّ وَرَحْمَةُ اللَّهِ وَبَرَكَاتُهُ، السَّلَامُ عَلَيْنَا وَعَلَىٰ عِبَادِ اللَّهِ الصَّالِحِينَ، أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَٰهَ إِلَّا اللَّهُ وَأَشْهَدُ أَنَّ مُحَمَّدًا عَبْدُهُ وَرَسُولُهُ. अर्थ: सभी आदर, नमाज़ें और अच्छी बातें अल्लाह के लिए हैं। नबी पर, हम पर और अल्लाह के नेक बंदों पर शांति, रहमत और बरकत हो। मैं गवाही देता हूँ कि अल्लाह के सिवा कोई इबादत के योग्य नहीं है और मुहम्मद उसके बंदे और रसूल हैं।
ऊपर जाएँअंतिम तशह्हुद और दुरूद
अंतिम रकअत के बाद बैठें और ऊपर का तशह्हुद पढ़ें। उसके बाद नबी ﷺ पर दुरूद पढ़ें: اللَّهُمَّ صَلِّ عَلَىٰ مُحَمَّدٍ وَعَلَىٰ آلِ مُحَمَّدٍ، كَمَا صَلَّيْتَ عَلَىٰ إِبْرَاهِيمَ وَعَلَىٰ آلِ إِبْرَاهِيمَ، إِنَّكَ حَمِيدٌ مَجِيدٌ، اللَّهُمَّ بَارِكْ عَلَىٰ مُحَمَّدٍ وَعَلَىٰ آلِ مُحَمَّدٍ، كَمَا بَارَكْتَ عَلَىٰ إِبْرَاهِيمَ وَعَلَىٰ آلِ إِبْرَاهِيمَ، إِنَّكَ حَمِيدٌ مَجِيدٌ. अर्थ: ऐ अल्लाह, मुहम्मद और उनके परिवार पर रहमत भेज, जैसे तूने इब्राहीम और उनके परिवार पर भेजी। तू तारीफ़ के योग्य और महान है। ऐ अल्लाह, मुहम्मद और उनके परिवार को बरकत दे, जैसे तूने इब्राहीम और उनके परिवार को दी। तू तारीफ़ के योग्य और महान है।
ऊपर जाएँसलाम से पहले दुआ
अंतिम तशह्हुद और दुरूद के बाद, सलाम से पहले अल्लाह से दुआ करें। एक साबित दुआ चार आज़माइशों से बचाव माँगती है: اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنْ عَذَابِ الْقَبْرِ، وَمِنْ عَذَابِ جَهَنَّمَ، وَمِنْ فِتْنَةِ الْمَحْيَا وَالْمَمَاتِ، وَمِنْ شَرِّ فِتْنَةِ الْمَسِيحِ الدَّجَّالِ. अर्थ: ऐ अल्लाह, मैं क़ब्र और जहन्नम के अज़ाब से, जीवन और मृत्यु की आज़माइशों से और झूठे मसीह की बुरी आज़माइश से तेरी पनाह माँगता हूँ।
ऊपर जाएँसलाम से अंत
सिर को दाईं ओर मोड़कर सलाम कहें, फिर बाईं ओर मोड़कर वही शब्द कहें। इससे नमाज़ पूरी होती है। السَّلَامُ عَلَيْكُمْ وَرَحْمَةُ اللَّهِ अर्थ: आप पर शांति और अल्लाह की रहमत हो।
ऊपर जाएँनमाज़ के बाद ज़िक्र
सलाम के बाद अल्लाह का ज़िक्र करें। एक साबित तरीके में 33 बार उसकी पाकी, 33 बार उसकी तारीफ़ और 33 बार उसकी बड़ाई बयान की जाती है। फिर नीचे का ज़िक्र एक बार कहकर सौ पूरे करें: لَا إِلَٰهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ، لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ، وَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ. سُبْحَانَ اللَّهِ الْحَمْدُ لِلَّهِ اللَّهُ أَكْبَرُ तीनों ज़िक्रों का अर्थ: अल्लाह पाक है। सारी तारीफ़ अल्लाह के लिए है। अल्लाह सबसे बड़ा है। सौ पूरे करने वाले ज़िक्र का अर्थ: अकेले अल्लाह के सिवा कोई इबादत के योग्य नहीं है। उसका कोई साझी नहीं है। उसी की बादशाही है और उसी के लिए सारी तारीफ़ है; वह हर चीज़ पर क़ादिर है।
ऊपर जाएँपाँच नमाज़ें और जमाअत
फ़ज्र में दो फ़र्ज़ रकअत और अंतिम तशह्हुद होता है। मग़रिब में तीन रकअत होती हैं: दो के बाद पहला और तीन के बाद अंतिम तशह्हुद। ज़ुहर, अस्र और इशा में चार रकअत होती हैं: दो के बाद पहला और चार के बाद अंतिम तशह्हुद। ये संख्या मुक़ीम के लिए हैं; मुसाफ़िर के लिए साबित रियायतें हैं। जमाअत में इमाम का अनुसरण करें और उससे आगे न हों। इमाम फ़ज्र और मग़रिब तथा इशा की पहली दो रकअत में ऊँची आवाज़ से पढ़ता है। ज़ुहर, अस्र और मग़रिब तथा इशा की बाक़ी रकअत में धीमे पढ़ता है। धीमे पढ़ने का मतलब केवल दिल में पढ़ना नहीं है; विश्वसनीय शिक्षक से इसके विवरण सीखें।
ऊपर जाएँज़रूरी बातें, ग़लतियाँ और सुविधा
नमाज़ की शर्तों और आवश्यक कामों में वक़्त, पाकी, नीयत, पहली तकबीर, क्षमता होने पर फ़र्ज़ में खड़ा होना, रुकू, सज्दा और इत्मीनान शामिल हैं। सुन्नी मत कुछ विवरणों को अलग-अलग दर्जा देते हैं। शुरुआती दुआ या अल-फ़ातिहा के बाद अतिरिक्त क़ुरआन जैसे मुस्तहब कामों को सर्वसम्मत फ़र्ज़ न समझें। आवश्यक काम छूट जाए या शक हो तो सुधार और सज्दए सह्व के बारे में भरोसेमंद शिक्षक से पूछें। खड़े न हो सकें तो बैठकर पढ़ें। यह भी संभव न हो तो अपनी क्षमता के अनुसार करवट पर पढ़ें। नमाज़ पढ़ते हुए सीखना जारी रखें, जो अभी नहीं कर सकते उसके बारे में शिक्षक से पूछें और वहम से बचें।
ऊपर जाएँस्रोत
क़ुरआन: 4:103, 5:6 और फ़ातिहा। सहीह बुख़ारी: इत्मीनान 757, तशह्हुद 831, बीमारी में नमाज़ 1117, दुरूद 3370। सहीह मुस्लिम: फ़ातिहा 395, शुरुआती दुआ 771, सलाम से पहले दुआ 588, बाद का ज़िक्र 597। हदीस संख्या संस्करण से बदल सकती है।
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